यूपी के ‘छोटे’ उद्यमियों को ‘बड़े’ सपनों की उड़ान एसएमई ग्रोथ फंड से एमएसएमई सेक्टर में नई जान, सियासत और अर्थनीति में हलचल

बी के झा

NSK

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लखनऊ / न ई दिल्ली, 2 फरवरी

उत्तर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमियों (एमएसएमई) के लिए केंद्रीय बजट से आई घोषणा को आर्थिक संजीवनी के तौर पर देखा जा रहा है। केंद्र सरकार द्वारा 10,000 करोड़ रुपये का एसएमई ग्रोथ फंड स्थापित किए जाने के फैसले से यूपी के हिस्से लगभग 1,800 करोड़ रुपये आने की संभावना है। यह राशि प्रदेश की करीब 96 लाख एमएसएमई इकाइयों, विशेषकर सूक्ष्म उद्यमों के लिए नए अवसरों का द्वार खोलेगी।

अर्थशास्त्रियों के अनुसार, यह फंड यूपी के उस वर्ग को मजबूती देगा जो रोजगार सृजन, निर्यात और स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, लेकिन अब तक पूंजी और जोखिम वहन की सीमाओं से जूझता रहा है।ओडीओपी और छोटे उद्यमों को मिलेगा संबल एसएमई ग्रोथ फंड के तहत ओडीओपी (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) से जुड़े उद्यमों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।

नवाचार, गुणवत्ता, निवेश, रोजगार सृजन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसे मानकों पर बेहतर प्रदर्शन करने वाली इकाइयों को इक्विटी सहायता दी जाएगी। इससे छोटे उद्यम न केवल बड़े उद्योगों की सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकेंगे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उनकी सीधी भागीदारी भी आसान होगी।

सरकार का टियर-टू और टियर-थ्री शहरों में ‘कार्पोरेट मित्र’ विकसित करने का प्रस्ताव भी अहम माना जा रहा है। इससे छोटे उद्योगों को कम लागत में पेशेवर सेवाएं और संस्थागत सहयोग मिल सकेगा।

आत्मनिर्भर भारत फंड से जोखिम पूंजी

आत्मनिर्भर भारत फंड में अतिरिक्त 2,000 करोड़ रुपये की पूंजी डालने का निर्णय एमएसएमई सेक्टर के लिए दीर्घकालिक सुरक्षा कवच के रूप में देखा जा रहा है। खासकर सूक्ष्म उद्यमों को इससे जोखिम पूंजी उपलब्ध होगी। साथ ही टी-रेड्स (TReDS) प्लेटफॉर्म के माध्यम से समय पर भुगतान और वित्तीय सहायता मिलने से नकदी संकट कम होने की उम्मीद है।

चमड़ा और जूता उद्योग को बड़ी राहत

टैरिफ वॉर की मार झेल रहे यूपी के चमड़ा उद्योग के लिए बजट की घोषणाएं राहत भरी हैं। चमड़ा और सिंथेटिक लेदर जूतों के निर्यातकों को अब अंतिम उत्पादों के निर्यात के लिए छह महीने के बजाय एक वर्ष का समय मिलेगा।इसके साथ ही शुल्क मुक्त आयात सुविधा का विस्तार कर जूते के ऊपरी हिस्सों को भी शामिल किया गया है। इससे उत्पादन लागत घटेगी और निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। जानकारों का अनुमान है कि इससे यूपी के लेदर निर्यात में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हो सकती है।

भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से भी निर्यातकों में नया उत्साह है।ई-कॉमर्स से वैश्विक बाजार तक सीधी पहुंच पहले

इंडिया फाउंडेशन के सहायक शोधकर्ता जशन कक्कड़ के अनुसार, कूरियर निर्यात पर प्रति खेप 10 लाख रुपये की मूल्य सीमा हटाना छोटे व्यवसायों, कारीगरों और स्टार्टअप्स के लिए बड़ा कदम है। इससे ई-कॉमर्स चैनलों के जरिए उच्च मूल्य वाली वस्तुओं का निर्यात आसान होगा और यूपी के निर्यात ग्राफ को नई ऊंचाई मिलेगी।

प्रतिक्रियाएं और विश्लेषण

राजनीतिक विश्लेषक राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि एमएसएमई पर केंद्रित यह कदम चुनावी राज्यों में आर्थिक भरोसा पैदा करने की रणनीति का हिस्सा भी है। यूपी जैसे बड़े राज्य में छोटे उद्यमियों को सशक्त करना सरकार को आर्थिक ही नहीं, राजनीतिक मजबूती भी देता है।

शिक्षाविद और अर्थशास्त्री

शिक्षाविदों का कहना है कि इक्विटी आधारित सहायता से एमएसएमई सेक्टर की बैंक ऋण पर निर्भरता कम होगी। हालांकि वे यह भी चेतावनी देते हैं कि फंड के वितरण में पारदर्शिता, तकनीकी मूल्यांकन और क्षेत्रीय संतुलन बेहद जरूरी होगा, ताकि लाभ वास्तव में सूक्ष्म उद्यमियों तक पहुंचे।

विपक्षी दल

विपक्षी दलों ने बजटीय प्रावधानों का स्वागत करते हुए सरकार से जमीनी क्रियान्वयन पर जवाबदेही की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि पूर्व की कई योजनाओं का लाभ सीमित वर्ग तक सिमट गया, इसलिए इस बार निगरानी तंत्र और समयबद्ध अमल अनिवार्य होना चाहिए।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, एसएमई ग्रोथ फंड और उससे जुड़े बजटीय फैसले यूपी के एमएसएमई सेक्टर को नई दिशा देने वाले माने जा रहे हैं।

यदि योजनाओं का ईमानदार, पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन हुआ, तो ‘छोटे’ उद्यमियों के सपनों को सचमुच ‘बड़े’ पंख लग सकते हैं और उत्तर प्रदेश देश की औद्योगिक वृद्धि का एक मजबूत इंजन बनकर उभर सकता है।

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