राजनाथ की रैली उड़ गई हवा में, राहुल बोले — बिहारियों का हक़ अब दूसरों की जेब में

बी के झा

NSK

छपरा/ मुजफ्फरपुर/ न ई दिल्ली, 29 अक्टूबर

बिहार की धरती इन दिनों फिर से सियासत के रंग में रंगी है।नेताओं की रैलियाँ, जनता की तालियाँ, और भाषणों की गोलाबारी — सब कुछ चुनावी जोश में घुलमिल चुका है।कहीं मोदी-नीतीश का “डबल इंजन” गूंज रहा है तो कहीं राहुल-तेजस्वी का “बदलाव का शंखनाद” बज रहा है।

लेकिन बीच में मौसम ने भी आज अपना खेल दिखा दिया!🌧️ राजनाथ की रैली पर बादलों का हमला!छपरा के उधमा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की रैली की तैयारी जोरों पर थी — मंच सज गया था, कुर्सियाँ लग गई थीं, कार्यकर्ता नारे लगाने को तैयार थे।मगर तभी मौसम ने कहा — “रुकिए जनाब!”तेज़ हवा चली, बादल गरजे और राजनाथ सिंह की हेलिकॉप्टर उड़ान ही रद्द हो गई।यानी जनता आई, कुर्सियाँ आईं, लेकिन राजनाथ नहीं आए!किसी ने व्यंग्य में कहा —बिहार की राजनीति में आज बादल भी विपक्ष की तरह खड़े हो गए!”

मुजफ्फरपुर में राहुल का हमला — ‘बिहार में ईमानदार मेहनत का कोई मोल नहीं!’वहीं दूसरी ओर, राहुल गांधी ने मुजफ्फरपुर में माइक संभाला और नीतीश सरकार पर बिजली की तरह बरसे।उनका अंदाज बिल्कुल बदल चुका था — शांत चेहरे के पीछे तीखा शब्दों का तूफ़ान।राहुल बोले —बिहार का नौजवान दिन-रात मेहनत करे, लेकिन पेपर तो पहले से अमीरों के घर पहुंच जाता है। मेहनतकश का हक़ चोरी हो जाता है!जनता में तालियों की गूंज — जैसे किसी ने अंदर का दर्द छेड़ दिया हो।राहुल ने साफ कहा —अब वक़्त है ऐसी व्यवस्था का जिसमें मेहनत जीते, जुगाड़ नहीं।

‘बिहार में बिहारियों का भविष्य नहीं’ — राहुल का सीधा वारराहुल गांधी ने नीतीश कुमार और बीजेपी दोनों को एक ही निशाने पर साधते हुए कहा —बिहार के लोग दिल्ली, मुंबई, गुजरात जाकर शहर खड़ा करते हैं, लेकिन अपने ही राज्य में बेरोजगार घूमते हैं!”उन्होंने भीड़ से सवाल किया —क्या आप ऐसा बिहार चाहते हैं, जहां अदाणी को दो रुपये में ज़मीन मिले और आम आदमी को सिर छुपाने की जगह भी न मिले?”भीड़ ने एक सुर में कहा — “नहीं!”

‘महागठबंधन बिहार को बदल देगा’ — राहुल का वादाराहुल गांधी ने आगे कहा —हम ऐसा बिहार बनाएंगे जहां बाहर वाले रोजगार की तलाश में आएं, न कि बिहारी बाहर जाएं। पाँच साल में हिंदुस्तान की सबसे बढ़िया यूनिवर्सिटी यहीं बनेगी!”भीड़ में बैठे युवाओं की आंखों में उम्मीद की चमक दिखी, लेकिन साथ ही एक बुजुर्ग ने बगल में बैठे पत्रकार से धीरे से कहा —बात तो ठीक है, पर कांग्रेस ने भी तो सालों तक बिहार को ऐसा ही छोड़ा था…”

शिक्षाविद की टिप्पणी — ‘सच बोले राहुल, पर ज़िम्मेदार भी वही हैं!’रैली खत्म होने के बाद मुजफ्फरपुर के एक वयोवृद्ध शिक्षाविद बोले —आज राहुल गांधी ने जो कहा वो बिहार की सच्चाई है। लेकिन इस हालत तक पहुंचाने में कांग्रेस का भी बड़ा हाथ है। अगर गांधी परिवार पुराने नेताओं को साथ लेकर युवाओं को जगह देता, तो आज बिहार में कांग्रेस मिट्टी नहीं होती।”उन्होंने यह भी कहा —अब भाजपा और सहयोगी दलों ने भ्रष्टाचार और धर्म की राजनीति को ऐसा मिलाया है कि देश फिर उसी खतरे की ओर जा रहा है, जहाँ बंटवारे के समय खून बहा था।”

टिप्पणी —

‘बिहार में राजनीति अब नहीं, रणछेड़ है!’राजनाथ के रद्द कार्यक्रम से लेकर राहुल के तेवर तक,एक बात साफ है —बिहार का मैदान अब केवल चुनाव नहीं, इम्तिहान बन गया है।हर नेता जनता की नब्ज़ टटोल रहा है, और जनता अब पहले जैसी नहीं —वो नारे नहीं, नतीजे मांग रही है।अब जनता बोलेगी — किसके वादे असली हैं, किसके भाषण नकली!”

निष्कर्ष

:बिहार की हवा इस बार बदली है।राजनीति का पारा चढ़ा है, और जनता की उम्मीदें तप रही हैं।राजनाथ की रैली भले उड़ न पाई हो, लेकिनराहुल के शब्दों ने बिहार की ज़मीन पर बहस की आग जरूर लगा दी है।

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