बी. के. झा
NSK News

पटना, 28 जून।
बिहार की राजनीति में एक बार फिर आवास का मुद्दा सुर्खियों में है। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने के लिए दी गई समय-सीमा सोमवार को समाप्त हो रही है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर राबड़ी देवी अब किस नए पते पर रहेंगी?
सूत्रों के अनुसार, सरकार द्वारा आवंटित 39, हार्डिंग रोड स्थित नए सरकारी आवास में राबड़ी देवी के शिफ्ट होने की संभावना फिलहाल बेहद कम मानी जा रही है। पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं के अनुसार, पूरा परिवार नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के 1, पोलो रोड स्थित सरकारी आवास में स्थानांतरित हो सकता है। यही आवास वर्तमान में तेजस्वी यादव के नाम आवंटित है।
अंतिम समय तक तेज हुई बंगला खाली करने की प्रक्रिया
10 सर्कुलर रोड स्थित आवास को खाली करने की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। शनिवार को भी ट्रकों के माध्यम से घरेलू सामान, फर्नीचर और अन्य सामग्री को पोलो रोड तथा कौटिल्य नगर स्थित आवासों में स्थानांतरित किया गया। आवास परिसर से सीसीटीवी कैमरे भी हटाए जा चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि बंगला खाली करने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है।सूत्रों का कहना है कि राबड़ी देवी की ओर से भवन निर्माण विभाग से उन सरकारी सामानों की सूची भी मांगी गई है, जो विभाग द्वारा आवास में उपलब्ध कराए गए थे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आवास खाली करने के बाद किसी प्रकार का प्रशासनिक या कानूनी विवाद उत्पन्न न हो।
हार्डिंग रोड का आवास क्यों नहीं?
हालांकि बिहार सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री के अधिकारों के तहत राबड़ी देवी को 39, हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास आवंटित कर दिया है, लेकिन राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सूत्रों का कहना है कि फिलहाल वहां रहने की कोई योजना नहीं है।पार्टी के जानकारों का मानना है कि परिवार को एक ही परिसर में रखने और राजनीतिक गतिविधियों के बेहतर समन्वय के दृष्टिकोण से तेजस्वी यादव का आवास अधिक उपयुक्त माना जा रहा है। हालांकि इस संबंध में राजद की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
सरकार का सख्त रुख
भवन निर्माण विभाग ने 22 जून को राबड़ी देवी को अंतिम नोटिस जारी करते हुए सात दिनों के भीतर आवास खाली करने का निर्देश दिया था। नोटिस में स्पष्ट कहा गया था कि निर्धारित अवधि के भीतर बंगला खाली नहीं करने पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।इससे पहले 9 जून को भी विभाग की ओर से पहला नोटिस जारी किया गया था। उस समय राबड़ी देवी ने आवास खाली करने पर सहमति तो जताई थी, लेकिन उन्होंने यह भी आग्रह किया था कि नए आवास में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को देखते हुए रैंप, आउट हाउस तथा अन्य सुविधाओं का निर्माण कराया जाए। किडनी प्रत्यारोपण के बाद लालू प्रसाद को सीढ़ियां चढ़ने-उतरने में कठिनाई होती है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह अनुरोध किया गया था।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
राबड़ी देवी का 10 सर्कुलर रोड आवास केवल एक सरकारी बंगला नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी रहा है। वर्षों तक यहीं से राजद की राजनीतिक रणनीतियां तैयार होती रहीं और अनेक महत्वपूर्ण राजनीतिक बैठकों का आयोजन हुआ। ऐसे में इस आवास को खाली किया जाना राजनीतिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल आवास परिवर्तन का मामला नहीं है, बल्कि बदलते राजनीतिक और प्रशासनिक समीकरणों का भी संकेत देता है। हालांकि सरकार का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों और आवास आवंटन संबंधी प्रावधानों के अनुरूप की जा रही है।
अब सबकी निगाहें सोमवार पर
सोमवार को आवास खाली करने की समय-सीमा समाप्त होने के साथ ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि राबड़ी देवी वास्तव में किस नए आवास में शिफ्ट होती हैं। यदि वह तेजस्वी यादव के पोलो रोड स्थित आवास में जाती हैं तो बिहार की राजनीति में यह एक नया राजनीतिक और पारिवारिक केंद्र बन सकता है। वहीं यदि अंतिम समय में कोई नया निर्णय होता है तो राजनीतिक चर्चाओं को एक नया मोड़ मिल सकता है।
फिलहाल आधिकारिक रूप से केवल इतना तय है कि 10 सर्कुलर रोड का अध्याय समाप्ति की ओर है, जबकि राबड़ी देवी के नए राजनीतिक और आवासीय पते को लेकर उत्सुकता लगातार बनी हुई है।
