रामलला के दरबार में चढ़ावे पर डाका! 40 दिनों में 70 बार चोरी और कथित गबन का खुलासा, CCTV फुटेज से उजागर हुआ पूरा खेल; 8 आरोपी न्यायिक हिरासत में

बी के झा

NSK News

अयोध्या, यूपी/ न ई दिल्ली, 26 जुन

देश की आस्था के सबसे बड़े केंद्रों में शुमार अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए चढ़ावे में कथित चोरी और गबन का मामला सामने आने के बाद सनसनी फैल गई है। प्रारंभिक जांच में ऐसे तथ्य सामने आए हैं जिन्होंने मंदिर की दान प्रबंधन व्यवस्था और आंतरिक निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।पुलिस द्वारा अदालत में प्रस्तुत न्यायिक रिमांड नोट के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज की शुरुआती जांच में कई आरोपी चढ़ावे की नकदी और आभूषण कथित रूप से अपनी जेब में रखकर बाहर ले जाते हुए दिखाई दिए हैं। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आठों आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है।

40 दिनों में 70 संदिग्ध घटनाएं

विशेष जांच दल (SIT) ने 27 अप्रैल से 5 जून 2026 तक की सीसीटीवी फुटेज का विस्तृत विश्लेषण किया। जांच में लगभग 70 संदिग्ध घटनाएं सामने आने का दावा किया गया है, जिन्हें पुलिस चोरी अथवा गबन जैसी गतिविधियों के रूप में जांच रही है।यदि जांच में ये आरोप सिद्ध होते हैं तो यह केवल आर्थिक अनियमितता नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था से जुड़ा अत्यंत गंभीर मामला माना जाएगा।

CCTV में क्या दिखा?

पुलिस के अनुसार अदालत में प्रस्तुत सामग्री में दावा किया गया है कि आरोपी टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश, करुणेश, मनीष यादव, लवकुश मिश्रा और रमा शंकर मिश्र चढ़ावे की गिनती पूरी होने के बाद कथित रूप से नकदी और आभूषण अपने पास रखकर बाहर ले जाते दिखाई देते हैं। इन फुटेज की फोरेंसिक एवं कानूनी जांच भी आगे की प्रक्रिया का हिस्सा होगी।

लगभग 79.84 लाख रुपये की बरामदगी

जांच अधिकारी ने अदालत को बताया कि सात आरोपियों की निशानदेही पर अब तक लगभग 79.84 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं। हालांकि आठवें आरोपी सुभाष श्रीवास्तव के पास से अभी तक कोई बरामदगी नहीं हुई है। पुलिस इस संबंध में आगे की जांच जारी रखे हुए है।चाबियों की जिम्मेदारी भी एक आरोपी के पास प्रारंभिक जांच के अनुसार आरोपी टिन्नू यादव के पास दान पात्र, कैश काउंटर और नोट गिनने वाले हॉल की चाबियों की जिम्मेदारी थी। पुलिस का आरोप है कि इस व्यवस्था का दुरुपयोग कर कथित अनियमितताओं को अंजाम दिया गया।

वहीं अनुकल्प मिश्रा पर वाउचर प्रक्रिया में गड़बड़ी करने तथा अपने रिश्तेदार लवकुश मिश्रा के साथ मिलकर कथित हेराफेरी करने का आरोप है। पुलिस ने लवकुश मिश्रा के घर से लगभग 10 लाख रुपये बरामद करने का दावा किया है।

सुरक्षा व्यवस्था में कई बड़ी खामियां

SIT की प्रारंभिक जांच में चढ़ावे की गिनती और उसके लेखा-जोखा की व्यवस्था में कई गंभीर कमियां सामने आने की बात कही गई है। इनमें—ड्यूटी समाप्त होने के बाद कर्मचारियों की नियमित तलाशी नहीं होना।

नोट गिनने की प्रक्रिया की पर्याप्त निगरानी का अभाव।

रिकॉर्ड संधारण में कथित अनियमितताएं।

सीसीटीवी कवरेज और आंतरिक नियंत्रण व्यवस्था में कमियां।

विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी धार्मिक संस्था में वित्तीय पारदर्शिता और बहुस्तरीय निगरानी व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए।

अदालत में पेश हुए आठों आरोपी

पुलिस ने सभी आठ आरोपियों को अदालत में पेश किया। नियमित न्यायाधीश उपलब्ध न होने के कारण ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने सभी आरोपियों को तीन दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। पुलिस यदि आगे पूछताछ के लिए हिरासत चाहती है तो नियमित अदालत में रिमांड का अनुरोध कर सकती है।

आस्था के साथ विश्वास का भी प्रश्न

यह मामला केवल धन की कथित चोरी तक सीमित नहीं है। देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ मंदिर में चढ़ावा अर्पित करते हैं। ऐसे में यदि जांच में वित्तीय अनियमितताएं सिद्ध होती हैं तो यह धार्मिक संस्थानों की पारदर्शिता और जवाबदेही पर व्यापक बहस को जन्म दे सकता है।

विशेषज्ञों की राय

प्रशासनिक और वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े धार्मिक संस्थानों में आधुनिक डिजिटल लेखा प्रणाली, बहुस्तरीय ऑडिट, स्वतंत्र निगरानी तंत्र, उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी नेटवर्क तथा प्रत्येक कर्मचारी की जवाबदेही सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है। इससे न केवल श्रद्धालुओं का विश्वास मजबूत होगा बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की संभावना भी कम होगी।

आगे क्या?

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। सीसीटीवी फुटेज, बरामद धनराशि, दस्तावेजी रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की पुष्टि या खंडन किया जाएगा। अदालत में सुनवाई और जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित चोरी और गबन के आरोप किस सीमा तक सिद्ध होते हैं।

नोट: वर्तमान में यह मामला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों का अंतिम सत्यापन न्यायालय के निर्णय और पूर्ण जांच के बाद ही माना जाएगा।

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