बी के झा
NSK

पटना, 9 नवंबर
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा “वोट चोरी” और SIR को लेकर लगाए गए गंभीर आरोपों पर जनशक्ति जनता दल प्रमुख तेज प्रताप यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। महुआ से चुनाव मैदान में उतरे तेज प्रताप ने रविवार को कहा कि ऐसे आरोपों का चुनावी समीकरण पर “कोई असर नहीं पड़ने वाला” है।मीडिया से बातचीत में तेज प्रताप ने साफ कहा,“इन सब बातों का कोई फायदा नहीं होने वाला है। जनता सब समझ रही है। ऐसे आरोपों से न दिशा बदलेगी, न हवा।”
उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि इस तरह के बयानों से जनता का मूड नहीं बदलने वाला।“
मेरी जान को खतरा… दुश्मन मरवा भी सकते हैं” —
तेज प्रताप का सनसनीखेज दावा
पत्रकारों से बातचीत के दौरान तेज प्रताप ने अपनी सुरक्षा पर बड़ा और सनसनीखेज दावा भी कर दिया।उन्होंने कहा,“मेरी सुरक्षा बढ़ा दी गई है… मैं खतरे में हूं। मेरे दुश्मन मुझे मरवा भी सकते हैं। अब तो सभी दुश्मन जैसे लग रहे हैं।”
हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्हें किससे खतरा है और वे किन लोगों को ‘दुश्मन’ मानते हैं।उनका यह बयान राजनीतिक हल्कों में नई चर्चा पैदा कर रहा है, खासकर तब जब वे हाल ही में अपने ही परिवार की पार्टी आरजेडी से निष्कासित होकर नए राजनीतिक सफर पर निकले हैं।
भाई तेजस्वी को जन्मदिन की शुभकामनाए
राजनीतिक मतभेदों के बीच भी तेज प्रताप ने अपने छोटे भाई तेजस्वी यादव के प्रति नरम रुख दिखाया और जन्मदिन की बधाई दी।उन्होंने कहा,“मेरा आशीर्वाद हमेशा उसके साथ है।
वह और आगे बढ़े—यही दुआ है।”तेज प्रताप के इस बयान को कई राजनीतिक विश्लेषक परिवार के भीतर जमी बर्फ पिघलने की संभावनाओं के रूप में भी देख रहे हैं।
निष्कासन के बाद नई पार्टी—
महुआ से मैदान में तेज प्रताप यादव इस चुनाव में अपने नए राजनीतिक दल ‘जनशक्ति जनता दल’ के साथ मैदान में हैं।25 मई को लालू प्रसाद यादव ने उन्हें आरजेडी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था।अनुशासनहीनता के आरोपों के बाद तेज प्रताप ने पार्टी से दूरी बना ली थी और बाद में अपना नया दल गठित कर महुआ सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी।तेज प्रताप का कहना है कि उनकी लड़ाई “व्यक्तिगत नहीं, वैचारिक” है और वे जनता के भरोसे पर उतरना चाहते हैं।
चुनावी मौसम में बयानबाज़ी का तेज दौर
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के इस चरण में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप अपने चरम पर हैं।एक ओर राहुल गांधी लगातार चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे हैं, तो दूसरी ओर तेज प्रताप जैसे क्षेत्रीय नेता इन आरोपों को बेअसर बताते हुए अपने-अपने वोट बैंक को साधने में जुटे हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि तेज प्रताप का यह बयान उनके नए राजनीतिक अभियान को और सुर्खियों में ला सकता है—खासकर उनकी सुरक्षा संबंधी टिप्पणी ने सियासी तापमान और बढ़ा दिया है।
