बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 22 नवंबर
10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए आत्मघाती कार धमाके ने देश को हिलाकर रख दिया था। धमाके में 15 लोगों की मौत और कई घायल हुए। अब जांच एजेंसियों ने जो खुलासे किए हैं, वे सिर्फ एक आतंकी हमले की कहानी नहीं, बल्कि एक बहु-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क, डिजिटल कट्टरपंथ और मल्टी-लोकेशन ब्लास्ट प्लानिंग की भयावह तस्वीर पेश करते हैं।राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अब तक चार बड़े आरोपियों—डॉ. मुज़म्मिल शकील गनाई, डॉ. अदील अहमद राठर, डॉ. शहीन सईद और मुफ्ती इरफ़ान अहमद—को गिरफ्तार किया है। धमाका करने वाला उमर नबी मौके पर ही मारा गया था।
2500 किलो अमोनियम नाइट्रेट और AK-47: मुज़म्मिल की खतरनाक तैयारीफरीदाबाद से पकड़े गए मुज़म्मिल के ठिकाने से 2500 किलो अमोनियम नाइट्रेट मिला—इतनी मात्रा कई बड़े धमाकों के लिए काफी होती है।जांच में यह भी सामने आया कि उसने 5 लाख रुपये में AK-47 खरीदी थी, जो बाद में आरोपी अदील के बैंक लॉकर से बरामद हुई।एक वरिष्ठ खुफिया अधिकारी के अनुसार—“इतनी भारी खरीद बताती है कि यह मॉड्यूल लंबे समय से तैयारी कर रहा था और इनके पास स्पष्ट वित्तीय सपोर्ट मौजूद था।”
डीप-फ़्रीज़र में विस्फोटक—मुज़म्मिल की ‘केमिकल लैब’उमर नबी, जिसने लाल किले के पास कार उड़ाई, रसायन शास्त्र और इलेक्ट्रॉनिक्स की ऑनलाइन ट्रेनिंग लेता था।भागीरथ पैलेस से इलेक्ट्रॉनिक आइटमनूह से केमिकल फरीदाबाद NIT मार्केट से सर्किट पार्ट्स खरीदें गए।सबसे चौंकाने वाली बात—उमर ने एक डीप-फ़्रीज़र खरीदा था, जिसमें वह विस्फोटक मिश्रण कोस्टेबलाइज प्रोसेसऔर ठंडा करके स्टोर करता था।यह तकनीक अक्सर अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों में देखी जाती है।
एक मॉड्यूल, कई हैंडलर—ऊपर बैठा ‘सीनियर कंट्रोलर’खुफिया एजेंसियों के अनुसार, यह पूरी साजिश तीन लेयर में बंटी थी:
1. ग्राउंड ऑपरेटिव – उमर, मुज़म्मिल, अदील
2. हैंडलर – मंसूर और हाशिम
3. एक सीनियर सुपरवाइजर – जो सबको निर्देश देता था हर आरोपी को अलग-अलग हैंडलर निर्देश दे रहे थे।यह संरचना पाकिस्तान-अफगानिस्तान स्थित आतंकी संगठनों से मेल खाती है।
तुर्की के रास्ते अफगानिस्तान भेजने की कोशिशजांच के दौरान पता चला कि 2022 मेंमुज़म्मिलअदीलऔर मुज़फ़्फर अहमद तुर्की गए थे। उन्हें TTP से जुड़े ‘उकाशा’ नाम के व्यक्ति के जरिए अफगानिस्तान भेजना था, लेकिन अंतिम क्षणों में योजना बदल दी गई। उकाशा, मुज़म्मिल से टेलीग्राम ID के माध्यम से बात करता था और उसकी बातचीत तब बढ़ी जब उसने अपने “हैंडलर की पहचान” के बारे में पूछना शुरू किया।
कार पहले से बमों से भरी थी — अल-फलाह यूनिवर्सिटी का झगड़ा एक बड़ा खुलासा यह है कि धमाके से पहले फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में उमर और मुज़म्मिल के बीच पैसे को लेकर जोरदार झगड़ा हुआ था।कई छात्रों ने उन्हें बहस करते देखा था।झगड़े के बाद—उमर ने अपनी लाल रंग की ईकोस्पोर्ट कार, जिसमें पहले से विस्फोटक मौजूद थे, मुज़म्मिल को दे दी।यह दर्शाता है कि साजिश आगे बढ़ने में आंतरिक तनाव भी बाधा बन रहा था।
कई शहरों में धमाकों की तैयारी जांच एजेंसियों का कहना है कि यह मॉड्यूल दिल्ली के अलावा कई अन्य स्थानों पर एक साथ विस्फोट करने की तैयारी में था।बरामद डिजिटल डेटा और केमिकल सामग्री से संकेत मिलता है कि यह एक कोऑर्डिनेटेड मल्टी-लोकेशन स्ट्राइक हो सकता था।एक वरिष्ठ अधिकारी के शब्दों में—“लाल क़िला धमाका उनके बड़े प्लान का सिर्फ एक हिस्सा था। पूरा मॉड्यूल एक ही समय में कई शहरों को टारगेट करने वाला था।”
हाई कोर्ट ने आरोपी वानी की मांग ठुकराई इस बीच, दिल्ली हाई कोर्ट ने सह-आरोपी जसिर बिलाल वानी को NIA मुख्यालय में अपने वकील से मिलने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।वानी फिलहाल NIA की कस्टोडियल रिमांड में है।
नतीजा: यह हमला नहीं, चेतावनी थीदिल्ली का आत्मघाती हमला एक अकेले व्यक्ति का कदम नहीं था।यह था—अंतरराष्ट्रीय मॉड्यूल डिजिटल कट्टरपंथ ऑनलाइन बम-ट्रेनिंग फंडिंग नेटवर्क मल्टी-लोकेशन प्लानिंग का मिला-जुला आतंक।जांच अभी जारी है, लेकिन अब तक के सबूत भारत की सुरक्षा एजेंसियों के सामने नए युग की चुनौती पेश करते हैं—
जहां आतंक बंदूक या बारूद से कम, और तकनीक व डिजिटल नेटवर्क से ज़्यादा संचालित हो रहा है।
