लालू परिवार के केस में ‘जज बदली’ की मांग ने बढ़ाई हलचल, राबड़ी की अपील पर आज सुनवाई संभव, भाजपा से लेकर कानूनविदों तक ने कसा तंज—“न्यायपालिका पर उठी उंगली या रणनीति?

बी के झा

NSK

नई दिल्ली/ पटना, 24 नवंबर

दिल्ली के बहुचर्चित राउज एवेन्यू कोर्ट में चल रहे आईआरसीटीसी घोटाला और ‘नौकरी के बदले जमीन’ मामले में सोमवार को नया मोड़ आ गया। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज की अदालत में एक महत्वपूर्ण याचिका दाखिल करते हुए मांग की कि उनके परिवार के खिलाफ चल रहे सभी मामलों को मौजूदा जज विशाल गोगने की अदालत से हटाकर किसी अन्य जज को सौंपा जाए।राबड़ी देवी का आरोप है कि जज गोगने “अभियोजन पक्ष की ओर झुके हुए” लगते हैं और उनके आदेशों से “निष्पक्ष सुनवाई पर संदेह” उत्पन्न हो रहा है। बता दें कि जज गोगने की अदालत में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव से जुड़े चार बड़े मामले लंबित हैं। 13 अक्टूबर को इसी अदालत ने इन सभी आरोपियों पर चार्ज फ्रेम कर दिया था, जिसके बाद मुकदमे की रफ्तार तेज मानी जा रही थी।

राबड़ी देवी की याचिका में मुख्य बिंदुआईआर‌ सी टी सी घोटाला और ‘नौकरी के बदले जमीन’ केस को दूसरी अदालत में भेजा जाए।वर्तमान जज के रुख से “पूर्वाग्रह की आशंका” जताई गई।निष्पक्ष ट्रायल सुनिश्चित करने के लिए ट्रांसफर जरूरी बताया गया।यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष जब भी कोई दलील रखता है, अदालत उसका अधिक समर्थन करती दिखती है।राबड़ी देवी के वकील मनिंदर सिंह ने अदालत को अवगत कराया कि इस याचिका पर मंगलवार को ही सुनवाई संभव है।क्या है मामला?

आईआरसीटीसी घोटाले में आरोप है कि रेलमंत्री रहते लालू यादव ने होटल संचालन के ठेके के बदले जमीन प्राप्त की। वहीं ‘नौकरी के बदले जमीन’ केस में आरोप है कि रेलवे में ग्रुप-डी नौकरी दिलाने के बदले उनके परिवार ने औने-पौने दाम पर कीमती जमीनें अपने नाम करवाईं। ईडी इन मामलों की मनी-लॉन्ड्रिंग जांच भी कर रही है।राजनीतिक घमासान—भाजपा का तंज: “जो दोषी होता है, वही जज बदलने की कोशिश करता है”राबड़ी की याचिका पर भाजपा ने तीखा हमला बोला। पार्टी प्रवक्ता ने कहा—“यह साफ संकेत है कि लालू परिवार कानून के शिकंजे से घबरा चुका है। जब सबूत मजबूत होते हैं तो आरोपी जज पर ही सवाल उठाने लगते हैं।”भाजपा नेताओं ने यह भी कहा कि अदालतों को प्रभावित करने की “पुरानी आदत” अब काम नहीं आएगी। कुछ नेताओं ने इसे “सुनियोजित विलंब रणनीति” करार दिया।

राजनीतिक विश्लेषकों की प्रतिक्रिया—‘यह सिर्फ कानूनी नहीं, राजनीतिक दांव है’राजनीति विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे ट्रायल तेजी से आगे बढ़ रहा है, लालू परिवार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

कई विश्लेषकों ने कहा—“जज बदलने की मांग राजनीति में एक संदेश देने के लिए भी हो सकती है कि वे खुद को पीड़ित के रूप में पेश करना चाहते हैं।”“तेजस्वी यादव की राजनीतिक छवि पर प्रभाव न पड़े, इसलिए परिवार मामले को लंबा खींचना चाहता है।”“चार्ज फ्रेम होने के बाद चीजें गंभीर होती जाती हैं—ऐसे में कोई भी पक्ष अदालत की प्रकृति पर सवाल उठाकर समय लेना चाहता है।”कानूनविदों का मत—‘जज पर पक्षपात का आरोप बहुत बड़ी बात, सबूत जरूरी’

कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कहा कि—“सिर्फ आशंका के आधार पर जज बदलने का आदेश मिलना कठिन होता है; ठोस वजह और रिकॉर्ड पर दर्ज उदाहरण देने होते हैं।”“भारतीय न्याय व्यवस्था में जज पर पूर्वाग्रह का आरोप एक गंभीर आरोप माना जाता है। कोर्ट इस पर अत्यंत सावधानी से फैसला लेती है।”“अगर अदालत को लगे कि आरोप ठोस नहीं है, तो राबड़ी की याचिका खारिज हो सकती है।”कुछ कानूनविदों ने कहा कि ट्रायल को तेजी से पूरा करने की मंशा से अदालतें आमतौर पर इस तरह के ट्रांसफर से बचती हैं।क्या हो सकता है आगे?

मंगलवार की संभावित सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि क्या राबड़ी देवी की आशंकाएं न्यायिक दृष्टि से पर्याप्त हैं या नहीं।अगर याचिका खारिज होती है तो ट्रायल मौजूदा जज के ही अधीन जारी रहेगा।अगर स्वीकार होती है तो केस किसी अन्य अदालत में स्थानांतरित होगा, जिससे ट्रायल की गति प्रभावित हो सकती है।

नतीजाराबड़ी देवी द्वारा उठाया गया कदम न सिर्फ कानूनी रूप से महत्वपूर्ण है बल्कि राजनीतिक रूप से भी बड़े संदेश देता है।अब नजर मंगलवार की सुनवाई पर है, जो यह तय करेगी कि लालू परिवार के खिलाफ चल रहे सबसे चर्चित मामलों की दिशा क्या होगी।

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