बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 14 मार्च
वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति को लेकर पैदा हुई चिंता के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। एलपीजी से लदे दो भारतीय जहाज—शिवालिक और नंदादेवी—सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पार कर भारत की ओर बढ़ चुके हैं। अधिकारियों के अनुसार ये जहाज क्रमशः 16 मार्च और 17 मार्च को भारत पहुंचने की संभावना है।मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण सख्त करने के बाद वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं।
इसी बीच यह खबर सामने आई कि ईरान ने विशेष अनुमति देते हुए भारत के दो एलपीजी वाहक जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान किया, जिसके बाद दोनों जहाजों ने आज सुबह जलडमरूमध्य पार कर लिया।
विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी
भारत सरकार की ओर से जानकारी देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया किआज सुबह भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी वाहक जहाजों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित रूप से पार कर लिया है और वे भारत की ओर बढ़ रहे हैं।उन्होंने कहा कि इन जहाजों में बड़ी मात्रा में एलपीजी है और इनके भारत पहुंचने के बाद घरेलू गैस आपूर्ति को लेकर जो दबाव बना हुआ है, उसमें कुछ राहत मिल सकती है।विशेषज्ञों के अनुसार प्रत्येक जहाज की क्षमता लगभग 46,000 मीट्रिक टन एलपीजी ले जाने की है। इससे घरेलू वितरण प्रणाली को अस्थायी राहत मिलने की संभावना है।
भारतीय नौसेना की सतर्क निगरानी
सरकारी सूत्रों के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय नौसेना के युद्धपोत स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं।गल्फ ऑफ ओमान क्षेत्र में मौजूद नौसैनिक जहाज व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एस्कॉर्ट मिशन की तैयारी में हैं। बताया गया है कि फारस की खाड़ी में इस समय लगभग 24 भारतीय व्यापारी जहाज मौजूद हैं, जिनकी सुरक्षा और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।रणधीर जायसवाल ने यह भी बताया कि हाल के दिनों में कई भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया गया है और सरकार भारतीय समुद्री कर्मियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
पेट्रोल और डीजल को लेकर सरकार का दावा
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि देश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति को लेकर किसी तरह की कमी नहीं है।उनके अनुसारभारत के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और देश की रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं। खुदरा बिक्री केंद्रों पर पेट्रोल और डीजल की कमी की कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है।उन्होंने यह भी कहा कि भारत अपनी जरूरत के अनुसार पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल और डीजल का उत्पादन करने में सक्षम है।
एलपीजी संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक योजना
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि जहां-जहां वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को एलपीजी की आपूर्ति में कठिनाई आ रही है, वहां उन्हें पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज की जाएगी।इसी उद्देश्य से गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (GAIL) ने विभिन्न सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन ऑपरेटरों के साथ बैठक कर उन्हें निर्देश दिया है कि पात्र उपभोक्ताओं को जल्द से जल्द पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराया जाए।विशेषज्ञों का मानना है कि इससे एलपीजी पर निर्भरता कम करने और आपूर्ति दबाव को संतुलित करने में मदद मिल सकती है।
वैश्विक ऊर्जा राजनीति का असर
ऊर्जा मामलों के जानकारों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व की सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्ति लाइनों में से एक है। वैश्विक तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।ऐसे में यदि इस क्षेत्र में सैन्य या राजनीतिक तनाव बढ़ता है तो उसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहता बल्कि एशिया और यूरोप समेत पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार पर पड़ता है।एक अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विशेषज्ञ का कहना है कि“ऊर्जा आपूर्ति की वैश्विक श्रृंखला इतनी परस्पर जुड़ी हुई है कि किसी एक क्षेत्र में अस्थिरता पैदा होने से दूर-दराज के देशों की घरेलू अर्थव्यवस्था और बाजार भी प्रभावित हो सकते हैं।”
विपक्ष ने उठाए सवाल
एलपीजी की उपलब्धता को लेकर देश के कुछ हिस्सों में बनी स्थिति को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर दीर्घकालिक रणनीति और भंडारण क्षमता को मजबूत करने की आवश्यकता है।कुछ विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा कि यदि वैश्विक संकट के समय घरेलू आपूर्ति प्रणाली पर दबाव दिखाई देता है तो इसका मतलब है कि आपूर्ति श्रृंखला को और अधिक मजबूत बनाने की जरूरत है।हालांकि सरकार का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और आवश्यक कदम लगातार उठाए जा रहे हैं।
कानूनविदों की राय
कानून विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में सरकार के पास ऊर्जा आपूर्ति और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कई प्रशासनिक और कानूनी विकल्प मौजूद होते हैं।यदि संकट गहराता है तो आवश्यक वस्तु प्रबंधन से जुड़े प्रावधानों के तहत वितरण प्रणाली को नियंत्रित किया जा सकता है और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
जनता के लिए राहत का संकेत
विश्लेषकों के अनुसार एलपीजी से लदे इन जहाजों का भारत पहुंचना केवल आपूर्ति की दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इससे बाजार और उपभोक्ताओं में विश्वास भी बढ़ेगा।हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए ऊर्जा सुरक्षा को लेकर दीर्घकालिक रणनीति पर भी गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
आगे की चुनौती
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान संकट भारत के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है कि भविष्य में ऊर्जा आपूर्ति के विविध स्रोत, रणनीतिक भंडार और वैकल्पिक ऊर्जा ढांचे को और मजबूत बनाना होगा।फिलहाल देश की निगाहें 16 और 17 मार्च पर टिकी हैं, जब एलपीजी से लदे ये दोनों जहाज भारत के बंदरगाहों पर पहुंचेंगे और उम्मीद की जा रही है कि इससे घरेलू गैस आपूर्ति की स्थिति में कुछ राहत मिल सकेगी।
