होर्मुज पर ट्रम्प की धमकी से कांपा दुनिया का तेल बाजार: क्रूड 100 डॉलर पार, शेयर बाजारों में हड़कंप, महंगाई की नई आहट

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 13 अप्रैल

दुनिया की ऊर्जा धुरी माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सख्त चेतावनी ने वैश्विक बाजारों में हलचल मचा दी है। जैसे ही ट्रम्प ने संकेत दिया कि अमेरिका इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर रोक लगाने या कड़ी निगरानी का कदम उठा सकता है,

अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भूचाल आ गया।

कच्चे तेल की कीमतें फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं और दुनिया भर के शेयर बाजारों में बिकवाली तेज हो गई।यह सिर्फ तेल की कीमतों का मामला नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि आने वाले दिनों में दुनिया को महंगाई, आर्थिक अस्थिरता और नए भू-राजनीतिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है।

तेल बाजार में आग, कीमतों ने पकड़ी रफ्तार

अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 8 प्रतिशत उछलकर 102 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 104 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक चढ़ गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज मार्ग पर वास्तविक रोक या सैन्य तनाव बढ़ा, तो तेल 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है।होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस आपूर्ति गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का व्यवधान सीधे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करता है।

शेयर बाजारों में मची भगदड़

तेल की तेजी का असर वॉल स्ट्रीट से लेकर एशियाई बाजारों तक साफ दिखाई दिया।

डॉव फ्यूचर्स 502 अंक टूट गया

एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में 1 प्रतिशत गिरावट

नैस्डैक फ्यूचर्स 1.15 प्रतिशत लुढ़का

निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर भागते दिखे, जबकि जोखिम वाले सेक्टरों में दबाव बढ़ गया।

ट्रम्प का संदेश: “या सबके लिए, या किसी के लिए नहीं

”रविवार को ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ईरान को अपनी पसंद के देशों को तेल बेचने की छूट नहीं देगा। उनका संदेश साफ था—यदि ऊर्जा व्यापार होगा तो सभी नियमों के तहत होगा, अन्यथा किसी के लिए नहीं।यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और मध्य पूर्व में सैन्य गतिविधियां तेज हो चुकी हैं।ईरान की कमाई भी बढ़ी तनाव के बीच ईरान को आर्थिक लाभ भी मिलता दिख रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से ईरान प्रति जहाज 20 लाख डॉलर तक शुल्क वसूल रहा है।इतना ही नहीं, मार्च तक ईरान का औसत तेल निर्यात 18.5 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया, जो पिछले महीनों की तुलना में अधिक है।

यानी संकट जितना बढ़ रहा है, ईरान की आय के रास्ते भी उतने ही चौड़े हो रहे हैं।इस साल कहां से कहां पहुंचा तेल साल 2026 की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड 61 डॉलर प्रति बैरल पर था। जनवरी-फरवरी में यह 72 डॉलर तक पहुंचा और मार्च के अंत तक 118 डॉलर प्रति बैरल छू गया। यह तेजी 1988 के बाद महंगाई-समायोजित आधार पर सबसे बड़ी तिमाही बढ़ोतरी मानी जा रही है।

शअब फिर 100 डॉलर के पार पहुंचना इस बात का संकेत है कि बाजार में डर अभी खत्म नहीं हुआ है।

भारत पर क्या असर पड़ेगा?

भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर सीधे देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है

गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ सकती है

ट्रांसपोर्ट महंगा होने से रोजमर्रा की चीजें महंगी होंगी

महंगाई दर पर दबाव बढ़ेगा

रुपया कमजोर पड़ सकता है

आगे क्या?

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम नहीं हुआ, तो वैश्विक बाजारों में अस्थिरता लंबे समय तक बनी रह सकती है। होर्मुज सिर्फ एक जलमार्ग नहीं, बल्कि दुनिया की आर्थिक धड़कन है। यहां उठी लहरें न्यूयॉर्क, लंदन, मुंबई और टोक्यो तक महसूस होती हैं।

निष्कर्ष

ट्रम्प की एक धमकी ने यह साबित कर दिया कि ऊर्जा बाजार आज भी भू-राजनीति के इशारों पर चलता है। होर्मुज पर बढ़ता तनाव सिर्फ मध्य पूर्व की समस्या नहीं, बल्कि हर उस देश की चिंता है जिसकी अर्थव्यवस्था तेल पर टिकी है।

आने वाले दिन तय करेंगे कि यह संकट अस्थायी है या दुनिया को एक नए आर्थिक तूफान की ओर ले जा रहा है।

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