बी के झा
NSK News

कोच्चि ( एर्नाकुलम ) ,11 जुलाई
काजू विकास विभाग के प्रभारी सचिव के. बीजू ने बुधवार को अदालत में खड़े होकर बिना शर्त माफी माँगी, लेकिन जज ने उन्हें माफ करने से इनकार कर दिया।मामला तब शुरू हुआ जब हाई कोर्ट ने उद्योग विभाग को काजू निगम के दो पूर्व अधिकारियों — तत्कालीन एमडी रथीश और चेयरमैन आर. चंद्रशेखरन — के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में मुकदमा चलाने की अनुमति पर दोबारा गौर करने का आदेश दिया।
इस आदेश से नाराज़ के. बीजू ने 2 जुलाई को एक सरकारी आदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने अदालत पर ही तीखा हमला बोल दिया।उन्होंने लिखा कि कोर्ट के दबाव में सरकार को यह अनुमति देनी पड़ी और सरकार ने इस मामले पर ठीक से विचार तक नहीं किया। इस लिखाई ने हाई कोर्ट को खासा नाराज कर दिया।
अदालत ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र पर सीधा हमला मानते हुए बीजू को अवमानना का नोटिस थमा दिया।बुधवार को खुद कोर्ट में पेश हुए IAS अधिकारी ने अपना बचाव इस प्रकार रखा:”मेरी भाषा से ऐसा लग सकता है कि मैंने माननीय अदालत का अपमान किया हो। मैं अपने आदेश की वे सारी बातें वापस लेता हूँ जिनका गलत अर्थ निकाला जा सकता है। मेरी मंशा न्यायपालिका पर सवाल उठाने की कभी नहीं थी।
“लेकिन जस्टिस ए. बदरुद्दीन कडाकम्पल्ली मनोज इस माफी से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने साफ कहा — “माफ़ी माँगने से काम नहीं चलेगा। लिखकर लाइए। और इस बार सही से लिखकर लाइए।”कोर्ट ने सख्ती से कहा कि माफीनामे में दो बातें साफ होनी चाहिए — एक, कि आदेश सोच-समझकर जारी किया गया था, और दूसरा, कि बाद में समीक्षा कर उसे वापस लिया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकारी अधिकारी अपनी निजी गलती के लिए सरकार को आगे नहीं कर सकते।
अब 15 जुलाई को के. बीजू को नया माफीनामा लेकर फिर से कोर्ट में पेश होना होगा।यह घटना सिर्फ एक IAS अधिकारी की गलती नहीं है, बल्कि यह उस घमंड की भी कहानी है जो कभी-कभी सत्ता के नशे में सरकारी अधिकारी अदालत के साथ कर बैठते हैं। जब अदालत दुरुस्त करने की कोशिश करती है, तो कुछ लोग उसे हस्तक्षेप समझने की भूल कर बैठते हैं।
अब देखना होगा कि 15 जुलाई को बीजू साहब कितनी नम्रता के साथ अपनी गलती कबूलते हैं — क्योंकि इस बार अदालत केवल शब्दों से नहीं, इरादे से माफी माँग रही है।
