बी के झा
NSK News


नई दिल्ली, 22 जुलाई
राष्ट्रीय राजधानी में छात्र आंदोलन के नाम पर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन अब गंभीर कानून-व्यवस्था की चुनौती में बदलता दिखाई दे रहा है। जंतर-मंतर से संसद मार्ग और कनॉट प्लेस तक फैली हिंसा के बीच मंगलवार शाम तथाकथित प्रदर्शनकारियों के निशाने पर सिर्फ निष्पक्ष पत्रकार और रेपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान पर कथित रूप से भीड़ द्वारा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। पुलिस ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।इधर, सोमवार को हुए उपद्रव के बाद दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS), आर्म्स एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से संरक्षण अधिनियम (PDPP Act) की गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। राजधानी में हालात को देखते हुए जंतर-मंतर और संसद क्षेत्र के आसपास अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी गई है।
RAF जवान और महिला पत्रकार पर हमला, वीडियो ने बढ़ाई चिंता
मंगलवार शाम करीब आठ बजे का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक RAF जवान भीड़ से बचने की कोशिश करता दिखाई देता है। वीडियो में कुछ लोग उसे गिराते हुए और उसके साथ मारपीट करते हुए नजर आते हैं। वहीं दूसरी तरफ एक महिला पत्रकार के साथ प्रदर्शनकारी गुण्डों ने एक महिला पत्रकार के साथ मारपीट और अभद्रता कि हर सीमा लांघ दी बाद में अन्य सुरक्षाकर्मियों ने हस्तक्षेप कर जवान और महिला पत्रकार को वहां से सुरक्षित निकाला।
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि घटना के संबंध में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और वीडियो सहित उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों की पहचान की जा रही है।यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि किसी सुरक्षाकर्मी और महिला पत्रकार को घेरकर सामूहिक हिंसा की गई, तो संबंधित आरोपियों के विरुद्ध गंभीर दंडात्मक कार्रवाई संभव है।
कनॉट प्लेस से पुलिस मुख्यालय तक उपद्रव
पुलिस के अनुसार प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर बैरिकेड तोड़े गए, पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया और सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ की गई।रिपोर्ट के अनुसार देर रात कनॉट प्लेस क्षेत्र में पुलिस बैरिकेड हटाने और तोड़ने की घटनाएं हुईं। कुछ पुलिस वाहनों के शीशे भी क्षतिग्रस्त किए गए।जय सिंह रोड और टॉलस्टॉय मार्ग पर कुछ प्रदर्शनकारी पारंपरिक हथियार लहराते हुए दिखाई दिए। हालांकि पुलिस का कहना है कि किसी पर हथियार से हमला होने की पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी पूरे मामले की जांच की जा रही है।
राजधानी में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम
बढ़ते तनाव को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और संसद क्षेत्र के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है।राजीव चौक, सेंट्रल सेक्रेटेरिएट, पटेल चौक और बाराखंबा रोड मेट्रो स्टेशनों के बाहर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। आने-जाने वालों पर निगरानी रखी जा रही है तथा संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त बढ़ा दी गई है।संसद, केंद्रीय मंत्रालयों और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा भी उच्च स्तर पर रखी गई है।
किन धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर
सोमवार को हुए उपद्रव के बाद संसद मार्ग थाना में दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS), आर्म्स एक्ट तथा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से संरक्षण अधिनियम (PDPP Act) की विभिन्न धाराएं लगाई गई हैं।एफआईआर में मुख्य रूप से सरकारी कार्य में बाधा डालने, लोक सेवकों पर हमला करने, गैरकानूनी जमावड़ा, दंगा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, आपराधिक साजिश और साझा मंशा के तहत अपराध करने जैसे आरोप शामिल किए गए हैं।साथ ही आर्म्स एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान से संरक्षण अधिनियम के तहत भी कार्रवाई शुरू की गई है।
पुलिस की जांच कई स्तरों पर
दिल्ली पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, सोशल मीडिया वीडियो और मोबाइल फुटेज की मदद से उपद्रव में शामिल लोगों की पहचान कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी आरोपी को केवल वायरल वीडियो के आधार पर नहीं, बल्कि उपलब्ध डिजिटल और प्रत्यक्ष साक्ष्यों के आधार पर चिन्हित किया जाएगा।
कानूनविदों की राय
संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का संविधान शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देता है, लेकिन यह अधिकार हिंसा, सरकारी कर्मचारियों पर हमला, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या सुरक्षा व्यवस्था भंग करने तक विस्तारित नहीं होता।कानूनविदों के अनुसार यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि किसी सुरक्षाकर्मी वा पत्रकारों पर संगठित भीड़ ने हमला किया या सरकारी संपत्ति को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया गया, तो संबंधित धाराओं के तहत कठोर दंड का प्रावधान है।
राजनीतिक विश्लेषकों का आकलन
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छात्र आंदोलनों की सबसे बड़ी ताकत उनका नैतिक आधार होता है। यदि किसी आंदोलन में हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान या पत्ररकार , सुरक्षाबलों पर हमले जैसे आरोप प्रमुख हो जाएं, तो आंदोलन का मूल उद्देश्य पीछे छूट सकता है और सार्वजनिक समर्थन प्रभावित हो सकता है।उनका कहना है कि सरकार को भी वैध और शांतिपूर्ण विरोध तथा हिंसक गतिविधियों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखते हुए कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
समाजसेवी संगठनों की अपील
कई सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शनकारियों से संयम बरतने और किसी भी प्रकार की हिंसा से दूर रहने की अपील की है। साथ ही उन्होंने पुलिस से भी आग्रह किया है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए आवश्यक होने पर ही बल प्रयोग किया जाए और प्रत्येक कार्रवाई कानून तथा मानवाधिकारों के स्थापित मानकों के अनुरूप हो।
सरकार का रुख
केंद्र सरकार का कहना है कि लोकतांत्रिक विरोध प्रत्येक नागरिक का अधिकार है, लेकिन हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, पत्रकार,सुरक्षाबलों पर हमला और संवेदनशील क्षेत्रों में अराजकता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।
राजधानी में बढ़ी सतर्कता
दिल्ली में लगातार दूसरे दिन बढ़े तनाव के बाद सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट हैं। संसद क्षेत्र, जंतर-मंतर और केंद्रीय दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की गई है।राजनीतिक विरोध और कानून-व्यवस्था के बीच खिंची इस महीन रेखा ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि लोकतांत्रिक आंदोलन अपनी वैधता और नैतिक शक्ति कैसे बनाए रखें।
आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई, न्यायिक प्रक्रिया और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेंगी।
