ट्रंप की ईरान को खुली चेतावनी: “सीजफायर तोड़ा तो इस्लामिक रिपब्लिक का अस्तित्व खत्म हो सकता है” — क्या मध्य-पूर्व एक बड़े युद्ध की दहलीज पर?

बी के झा

NSK News

वाशिंगटन / नई दिल्ली, 28 जुन

मध्य-पूर्व में मुश्किल से स्थापित हुआ युद्धविराम एक बार फिर गंभीर संकट में दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के खिलाफ अत्यंत कठोर और अभूतपूर्व भाषा का प्रयोग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि तेहरान ने युद्धविराम का फिर उल्लंघन किया तो अमेरिका सैन्य अभियान को निर्णायक स्तर तक ले जाएगा और “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का अस्तित्व ही समाप्त हो सकता है।”ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच Truth Social पर दावा किया कि अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के मिसाइल एवं ड्रोन भंडारण स्थलों तथा तटीय रडार ठिकानों पर दोबारा सटीक हवाई हमले किए हैं। उनके अनुसार यह कार्रवाई ईरान द्वारा लगातार दूसरी बार युद्धविराम तोड़े जाने के जवाब में की गई।

क्या है पूरा घटनाक्रम?

अमेरिकी पक्ष का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास समुद्री सुरक्षा को चुनौती देते हुए पहले एक कार्गो जहाज और उसके बाद पनामा के ध्वज वाले तेल टैंकर M/T Kiku पर आत्मघाती ड्रोन हमला किया गया। बताया जा रहा है कि टैंकर में लगभग 20 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल था। इन घटनाओं के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सैन्य कार्रवाई की सिफारिश की, जिसके बाद ट्रंप के निर्देश पर अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।हमलों के बाद ईरान के सिरिक द्वीप और केश्म द्वीप के आसपास विस्फोटों की खबरें सामने आईं, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।

ट्रंप का संदेश: कूटनीति की सीमा या शक्ति का प्रदर्शन?

ट्रंप ने अपने संदेश में कहा कि अमेरिका ने अब तक “संयम” दिखाया है, लेकिन यदि ईरान अपनी गतिविधियां नहीं रोकता तो अमेरिका अधूरा सैन्य अभियान भी पूरा करने से पीछे नहीं हटेगा। उनका यह बयान केवल ईरान के लिए चेतावनी नहीं, बल्कि पूरे मध्य-पूर्व और वैश्विक शक्तियों के लिए अमेरिकी रणनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

रक्षा विशेषज्ञों की राय

अंतरराष्ट्रीय रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका वास्तव में ईरान के मिसाइल नेटवर्क, नौसैनिक क्षमताओं और ड्रोन ढांचे को व्यापक स्तर पर नष्ट करने का अभियान शुरू करता है, तो यह केवल दो देशों का संघर्ष नहीं रहेगा। इसका सीधा असर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर पड़ेगा।विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान वर्षों से असममित युद्ध (Asymmetric Warfare) की रणनीति अपनाता रहा है। ऐसे में प्रत्यक्ष युद्ध के बजाय वह ड्रोन, मिसाइलों और अपने क्षेत्रीय सहयोगी समूहों के माध्यम से जवाबी कार्रवाई कर सकता है, जिससे संघर्ष कई मोर्चों पर फैलने की आशंका बढ़ जाएगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का आकलन

अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार ट्रंप का आक्रामक रुख केवल सैन्य रणनीति तक सीमित नहीं है। यह अमेरिका की वैश्विक शक्ति, समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा और पश्चिम एशिया में अपनी रणनीतिक बढ़त बनाए रखने की व्यापक नीति का हिस्सा भी माना जा रहा है।विश्लेषकों का यह भी मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव इसी गति से बढ़ता रहा तो कूटनीतिक प्रयास कमजोर पड़ सकते हैं और पूरा क्षेत्र लंबे समय तक अस्थिरता की चपेट में आ सकता है।

दुनिया पर क्या होगा असर?

यदि संघर्ष और गहराता है तो सबसे पहले वैश्विक तेल बाजार प्रभावित होगा। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज विश्व के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का निर्यात होता है। इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज उछाल, समुद्री बीमा लागत में वृद्धि तथा वैश्विक व्यापार पर दबाव देखने को मिल सकता है।

निष्कर्ष

मध्य-पूर्व एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां एक छोटी सैन्य कार्रवाई भी व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकती है। ट्रंप की तीखी चेतावनी और अमेरिकी सैन्य हमलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वाशिंगटन अब ईरान के प्रति अधिक कठोर नीति अपनाने के संकेत दे रहा है।

दूसरी ओर, यदि ईरान जवाबी कदम उठाता है तो आने वाले दिनों में केवल पश्चिम एशिया ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता पर इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *