नौगाम पुलिस स्टेशन में भीषण धमाका: श्रीनगर दहला, 9 की मौत, 29 घायल — जब्त किए गए विस्फोटक बने त्रासदी की वजह

बी के झा

NSK

श्रीनगर / न ई दिल्ली, 15 नवंबर 2025,

दक्षिण श्रीनगर का नौगाम क्षेत्र उस रात अचानक दहल उठा जब पुलिस स्टेशन परिसर में एक भीषण विस्फोट हुआ। धमाका इतना भारी था कि आवाज रावलपोरा तक सुनाई दी और चिंगारियों से उठी आग ने पूरे इलाके को दहशत में भर दिया। प्रारंभिक जांच में आतंकवादी हमले की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन जम्मू-कश्मीर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह आतंकी हमला नहीं, बल्कि रूटीन निरीक्षण के दौरान विस्फोटक सामग्री में आकस्मिक ब्लास्ट था।

धू-धू कर जलीं गाड़ियाँ, खिड़कियाँ चटक गईं, इलाके में अंधाधुंध तबाही वायरल वीडियो और चश्मदीदों के बयान बताते हैं कि पुलिस स्टेशन के पार्किंग क्षेत्र में खड़ी कई गाड़ियाँ, जिनमें पुलिस वाहन भी शामिल थे, आग की चपेट में आकर राख हो गईं। विस्फोट से उठे मलबे ने आसपास के घरों और दुकानों की खिड़कियाँ तोड़ दीं।

धमाके की तीव्रता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि हवा में उछला धुआँ और आग की लपटें रात के अंधेरे को चीरती हुई दूर-दूर तक दिखाई दे रही थीं।घटना में अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 29 लोग घायल हैं, जिनमें कई पुलिसकर्मी और तकनीकी अधिकारी शामिल हैं।

जब्त किए गए ‘अमोनियम नाइट्रेट’ का ढेर बना मौत की वजह जांच अधिकारियों ने बताया कि पुलिस स्टेशन परिसर में अमोनियम नाइट्रेट आधारित भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री रखी गई थी। यह वही विस्फोटक था जो जैश-ए-मोहम्मद के एक नवीन मॉड्यूल की जांच के दौरान नवंबर की शुरुआत में बरामद किया गया था।इसी सामग्री की सैंपलिंग और जांच (FSL टीम के साथ) चल रही थी, तभी अचानक रासायनिक प्रतिक्रिया हुई और यह भीषण विस्फोट हो गया।

इस त्रासदी ने सुरक्षा एजेंसियों को एक बार फिर सतर्क कर दिया है कि जब्त किया गया विस्फोटक किस स्तर पर स्टोर किया जाए, यह अब भारत की सुरक्षा नीति में पुनर्मूल्यांकन का बड़ा मुद्दा बनने वाला है।

दिल्ली ब्लास्ट से कनेक्शन — देशभर में फैला जिहादी नेटवर्क नौगाम में जिस जब्त माल की जांच हो रही थी, उसका सीधा संबंध दिल्ली में 10 नवंबर को हुए कार बम हमले से जुड़ा बताया गया है।उस हमले में कम से कम 12 लोगों की मौत हुई थी और 20 से अधिक लोग घायल हुए थे।

जैश-ए-मोहम्मद द्वारा संचालित इस मॉड्यूल में डॉक्टर्स, मौलवी और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित पेशेवर शामिल थे — एक ऐसा ‘व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क’ जिसने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया था।

19 अक्टूबर 2025 को नौगाम इलाके में JeM के प्रचार पोस्टर लगने के बाद यह पूरा मॉड्यूल उजागर होना शुरू हुआ। इसके बाद जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में छापेमार कार्रवाई हुई, जिसमें अब तक:2,900 किलोग्राम से अधिक विस्फोटक सामग्री

रसायन डेटोनेटर इलेक्ट्रिक टाइमर्स हथियार जब्त किए जा चुके हैं।इन्हीं जब्त सामग्रियों का हिस्सा नौगाम पुलिस स्टेशन में मौजूद था।

श्रीनगर से दिल्ली तक

एक ही मॉड्यूल की परतें खुल रहीं जांच एजेंसियों का मानना है कि जिस मॉड्यूल ने दिल्ली में कार ब्लास्ट किया, वही मॉड्यूल जम्मू-कश्मीर में भी सक्रिय था।सुरक्षा बलों का कहना है कि ये नेटवर्क एक “डॉक्टर-ड्रिवन जेहादी सेल” था, जिसमें पेशेवरों को बड़े पैमाने पर ब्रेनवॉश कर आतंकवाद में धकेला गया।

दिल्ली ब्लास्ट, दिल्ली के डॉक्टर मॉड्यूल, और नौगाम में बरामद विस्फोटक —

तीनों की तारें अब एक ही दिशा की ओर इशारा कर रही हैं।सुरक्षा एजेंसियों के सामने बड़ा सवाल —

जब्त विस्फोटक कहाँ और कैसे रखा गया था?नौगाम पुलिस स्टेशन में विस्फोट के बाद अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि:इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री पुलिस स्टेशन परिसर में ही क्यों रखी गई?क्या स्टोरेज के लिए कोई सुरक्षित ‘डिटोनेशन-प्रूफ’ ज़ोन नहीं था?

रासायनिक विस्फोटक की हैंडलिंग को लेकर क्या SOP का पालन हुआ?केंद्र सरकार इस हादसे को गंभीर चूक मानते हुए अब हमारे सुरक्षा बुनियादी ढांचे की कमजोरियों की व्यापक समीक्षा करने की तैयारी में है।

देश के सामने चेतावनी — विस्फोट भले आकस्मिक हो, पर खतरे की जड़ें गहरी हैंजम्मू-कश्मीर पुलिस ने भले यह साफ कर दिया कि नौगाम धमाका एक हादसा था, लेकिन यह हादसा भारत को साफ संदेश देता है—

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में चूक की कोई गुंजाइश नहीं।यह विस्फोट भारत को याद दिलाता है कि:जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठन पाकिस्तान आधारित नेटवर्कऔर अब पेशेवर व शिक्षित लोगों से बना ‘व्हाइट कॉलर टेरर’हमेशा किसी न किसी रूप में सक्रिय रहता है।नौगाम का ब्लास्ट आकस्मिक जरूर था, मगर इसकी गूंज हमें भविष्य का सच दिखा गई—आतंकवाद की जड़ें अब अधिक गहरी, अधिक चालाक और अधिक तकनीकी हो चुकी हैं।

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