बी के झा
NSK



कोलकाता, 2 मई
पश्चिम बंगाल की सियासत एक बार फिर उफान पर है। दो चरणों की वोटिंग के बाद जहां राजनीतिक दल अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर उठे सवालों ने लोकतंत्र को एक नई परीक्षा के सामने खड़ा कर दिया है। इसी कड़ी में आज दक्षिण 24 परगना जिले की मगराहाट वेस्ट और डायमंड हार्बर विधानसभा सीटों के 15 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान हो रहा है।सुबह 7 बजे से शुरू हुई यह प्रक्रिया शाम 6 बजे तक चलेगी, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह पुनर्मतदान केवल तकनीकी खामी का समाधान है या फिर चुनावी प्रणाली में गहरे बैठे अविश्वास का संकेत?
मामले की जड़: शिकायतों का अंबार और आयोग का फैसला
चुनाव आयोग को कुल 77 पोलिंग स्टेशनों पर पुनर्मतदान की मांग मिली थी। आरोप गंभीर थे—EVM से छेड़छाड़, मशीनों में गड़बड़ी और मतदान प्रक्रिया में बाधा। ऑब्जर्वर्स की रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने फिलहाल 15 बूथों पर पुनर्मतदान का आदेश दिया, जिनमें मगराहाट वेस्ट के 11 और डायमंड हार्बर के 4 बूथ शामिल हैं।यह फैसला जहां एक ओर आयोग की सतर्कता को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर यह भी संकेत देता है कि चुनावी प्रक्रिया में विश्वास की दरारें उभर रही हैं।
सियासी संग्राम: आरोप-प्रत्यारोप का दौर
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं इस पूरे घटनाक्रम को और तीखा बना रही हैं।BJP ने चुनाव आयोग के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि “और अधिक बूथों पर पुनर्मतदान होना चाहिए था।”वहीं TMC ने इसे “राज्य को बदनाम करने की साजिश” बताते हुए सीधे तौर पर BJP को कटघरे में खड़ा किया।डायमंड हार्बर सीट पर BJP के दीपक कुमार हलधर और TMC के पन्नालाल हलधर के बीच सीधी टक्कर है, जबकि मगराहाट वेस्ट में त्रिकोणीय मुकाबला—BJP, TMC और ISF—चुनाव को और जटिल बना रहा है।
सुरक्षा का सख्त पहरा: RAF और CRPF की तैनाती
पुनर्मतदान को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए प्रशासन ने कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। संवेदनशील बूथों पर रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती की गई है, जबकि CRPF के जवान भी सक्रिय रूप से निगरानी कर रहे हैं।डायमंड हार्बर के बूथ नंबर 117 पर एक CRPF जवान द्वारा छड़ी के सहारे चल रहे मतदाता की मदद करते हुए दृश्य ने इस तनावपूर्ण माहौल में मानवीय संवेदना की झलक भी दिखाई।
जमीनी हकीकत: लंबी कतारें और मतदाताओं का उत्साह
हरिदेवपुर प्राइमरी स्कूल स्थित बूथ नंबर 194 पर मतदाताओं की लंबी कतारें इस बात का संकेत हैं कि तमाम विवादों और आशंकाओं के बावजूद जनता का लोकतंत्र में विश्वास कायम है। लोग घरों से निकलकर अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं—यह अपने आप में लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है।
विश्लेषण: क्या कहता है यह पुनर्मतदान?
यह पुनर्मतदान केवल 15 बूथों तक सीमित एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह कई बड़े सवाल खड़े करता है—क्या EVM पर उठ रहे सवाल केवल राजनीतिक रणनीति हैं या वास्तविक चिंता?क्या चुनावी हिंसा और गड़बड़ियों पर अंकुश लगाने में प्रशासन पूरी तरह सक्षम है?और सबसे अहम—क्या मतदाता का विश्वास इस प्रक्रिया में बना रहेगा?
निष्कर्ष:
लोकतंत्र की मजबूती या कमजोरी?
पश्चिम बंगाल में हो रहा यह पुनर्मतदान लोकतंत्र की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी आत्म-सुधार की क्षमता का प्रमाण भी माना जा सकता है। जब शिकायतें आती हैं और उन पर कार्रवाई होती है, तो यह व्यवस्था के जीवंत होने का संकेत है।लेकिन साथ ही, यह चेतावनी भी है कि चुनावी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने की जरूरत है।
आखिरकार, लोकतंत्र केवल वोट डालने का अधिकार नहीं, बल्कि उस वोट की निष्पक्षता और सम्मान की गारंटी भी है।
