बी के झा
NSK

नई दिल्ली / कूच बिहार, 24 मई
भारत-बांग्लादेश सीमा पर एक बार फिर तनाव की लकीरें गहरी होती दिखाई दे रही हैं। पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिले कूच बिहार में अंतरराष्ट्रीय सीमा स्तंभ संख्या 806 के पास उस समय माहौल अचानक गरमा गया, जब Border Security Force द्वारा सीमा क्षेत्र में फेंसिंग और कथित तौर पर नया पिलर लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई।इस गतिविधि पर Border Guard Bangladesh ने कड़ी आपत्ति जताई और देखते ही देखते दोनों देशों के सीमा सुरक्षाबल आमने-सामने आ गए।
हालांकि स्थिति बाद में नियंत्रण में आ गई, लेकिन इस घटना ने भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक नई संवेदनशील बहस को जन्म दे दिया है।
आखिर पिलर नंबर 806 पर हुआ क्या?
सूत्रों के मुताबिक यह घटना बांग्लादेश के लालमणिरहाट क्षेत्र से सटी सीमा पर हुई। बीएसएफ की ओर से सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से फेंसिंग और सीमांकन से जुड़ा काम किया जा रहा था। इसी दौरान बीजीबी ने आरोप लगाया कि भारत अंतरराष्ट्रीय सीमा के बेहद करीब स्थायी ढांचा तैयार करने की कोशिश कर रहा है, जो सीमा प्रोटोकॉल के खिलाफ है।
बांग्लादेशी अधिकारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार सीमा से 150 गज के भीतर स्थायी निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता। जैसे ही यह सूचना बीजीबी तक पहुंची, उसके जवान मौके पर पहुंचे और काम रुकवा दिया। कुछ समय के लिए दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
सीमा पर फेंसिंग क्यों है इतना बड़ा मुद्दा?
भारत-बांग्लादेश सीमा दुनिया की सबसे जटिल और संवेदनशील सीमाओं में गिनी जाती है। लगभग 4,000 किलोमीटर लंबी इस सीमा पर अवैध घुसपैठ, तस्करी, नकली मुद्रा, मवेशी कारोबार और कट्टरपंथी गतिविधियों को लेकर भारत लंबे समय से चिंतित रहा है।इसी वजह से भारत लगातार सीमा पर फेंसिंग और निगरानी तंत्र को मजबूत करने में जुटा है। लेकिन हर बार जब नई फेंसिंग या संरचना का काम शुरू होता है, तो कई इलाकों में बांग्लादेश आपत्ति दर्ज कराता रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पिलर नंबर 806 की घटना केवल स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि सीमा प्रबंधन को लेकर दोनों देशों की अलग-अलग रणनीतिक सोच का प्रतिबिंब है।
राजनीतिक और कूटनीतिक संकेत भी अहम
यह तनातनी ऐसे समय सामने आई है जब दक्षिण एशिया की राजनीति पहले से ही कई भू-राजनीतिक दबावों से गुजर रही है। चीन की क्षेत्रीय सक्रियता, अवैध सीमा पार गतिविधियां और कट्टरपंथी नेटवर्क को लेकर भारत अपनी सीमाओं पर ज्यादा सतर्क दिख रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत अब सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर पहले की तुलना में अधिक आक्रामक और स्पष्ट नीति अपना रहा है।
वहीं बांग्लादेश अपनी संप्रभुता और सीमा नियमों का हवाला देकर हर संवेदनशील निर्माण गतिविधि पर तुरंत प्रतिक्रिया दे रहा है।
सेक्टर कमांडर स्तर की बैठक में दर्ज हुआ विरोध
घटना के बाद दोनों देशों के अधिकारियों के बीच सेक्टर कमांडर स्तर की फ्लैग मीटिंग आयोजित की गई। बांग्लादेश की ओर से औपचारिक विरोध दर्ज कराया गया, जबकि भारतीय पक्ष ने फिलहाल सार्वजनिक बयान देने से परहेज किया है।
हालांकि सीमा सूत्रों का कहना है कि दोनों देशों के बीच संवाद की प्रक्रिया जारी है और फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं। लेकिन जिस तरह बीजीबी ने तत्काल प्रतिक्रिया दी, उससे यह स्पष्ट हो गया कि सीमा पर किसी भी नई गतिविधि को अब बेहद संवेदनशील नजर से देखा जा रहा है।
रक्षा विशेषज्ञों की चेतावनी
रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि सीमा पर छोटे दिखने वाले ऐसे विवाद भविष्य में बड़े कूटनीतिक तनाव का रूप ले सकते हैं, यदि उन्हें समय रहते बातचीत से नहीं सुलझाया गया।पूर्व सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार भारत के लिए सीमा फेंसिंग केवल सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा है। वहीं बांग्लादेश के लिए यह मामला घरेलू राजनीति और राष्ट्रवाद से भी जुड़ जाता है। इसलिए दोनों देशों को संतुलन और संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी होगा।
क्या बढ़ेगी कड़वाहट?
भारत और बांग्लादेश के संबंध पिछले कुछ वर्षों में अपेक्षाकृत बेहतर रहे हैं। व्यापार, कनेक्टिविटी और सुरक्षा सहयोग में दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। लेकिन सीमा से जुड़े मुद्दे अब भी रिश्तों की सबसे कमजोर कड़ी बने हुए हैं।कूच बिहार के पिलर नंबर 806 पर हुई यह घटना इस बात का संकेत है कि जमीन पर तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश इस विवाद को स्थानीय स्तर पर सीमित रखते हैं या यह मामला व्यापक कूटनीतिक बहस का रूप लेता है।
