बंगाल में सत्ता परिवर्तन का शंखनाद: शुभेंदु अधिकारी होंगे नए मुख्यमंत्री, कल कोलकाता में शपथ

बी के झा

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नई दिल्ली/ कोलकाता, 8 मई

पूर्वी भारत की राजनीति में एक ऐतिहासिक अध्याय लिखते हुए पश्चिम बंगाल में पहली बार भारतीय जनता पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता के शिखर पर पहुंच गई है। लंबे समय तक वामपंथ और फिर तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिक वर्चस्व वाले बंगाल में अब भगवा युग की औपचारिक शुरुआत होने जा रही है। बीजेपी विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक में सर्वसम्मति से नेता चुने जाने के बाद यह तय हो गया कि बंगाल की सत्ता की कमान अब शुभेंदु अधिकारी संभालेंगे।

शनिवार सुबह 11 बजे कोलकाता में उनका भव्य शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा।इस निर्णय ने केवल बंगाल ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी नई हलचल पैदा कर दी है। खास बात यह रही कि विधायक दल की बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह स्वयं पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद रहे। इसे बीजेपी नेतृत्व की गंभीरता और बंगाल को लेकर दीर्घकालिक रणनीति का संकेत माना जा रहा है।

ममता युग का अंत, नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत

पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह परिवर्तन केवल सत्ता परिवर्तन भर नहीं, बल्कि एक वैचारिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। 7 मई को राज्यपाल द्वारा 17वीं विधानसभा भंग किए जाने के बाद ममता बनर्जी सरकार का संवैधानिक अध्याय समाप्त हो गया। ममता बनर्जी ने इस्तीफा देने से इनकार किया था, लेकिन विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होते ही सत्ता परिवर्तन का रास्ता साफ हो गया।करीब डेढ़ दशक तक बंगाल की राजनीति का केंद्र रहीं ममता बनर्जी अब पहली बार विपक्ष की भूमिका में दिखाई देंगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव बंगाल में “परिवर्तन बनाम परंपरा” की लड़ाई बन चुका था, जिसमें जनता ने परिवर्तन को चुना।

क्यों चुने गए शुभेंदु अधिकारी?

शुभेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री बनना अचानक लिया गया फैसला नहीं, बल्कि लंबे राजनीतिक संघर्ष और संगठनात्मक क्षमता का परिणाम माना जा रहा है। वह बंगाल बीजेपी के सबसे प्रभावशाली जनाधार वाले नेताओं में गिने जाते हैं।सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि उन्होंने दो बार ममता बनर्जी को सीधे राजनीतिक चुनौती देकर पराजित किया। वर्ष 2021 में नंदीग्राम की लड़ाई ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दी थी, जबकि इस बार भवानीपुर जैसे तृणमूल के मजबूत गढ़ में जीत दर्ज कर उन्होंने अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता और मजबूत कर दी।बीजेपी के अंदर उन्हें “बंगाल विजय का आर्किटेक्ट” माना जा रहा है। पार्टी का आंकड़ा 207 सीटों तक पहुंचाने में उनकी रणनीति, बूथ प्रबंधन और जमीनी नेटवर्क को निर्णायक बताया जा रहा है।

नेता प्रतिपक्ष रहते हुए उन्होंने लगातार तृणमूल सरकार को आक्रामक ढंग से घेरा और खुद को भाजपा के सबसे सशक्त बंगाली चेहरे के रूप में स्थापित किया।राजनीतिक जानकारों के अनुसार शुभेंदु अधिकारी में तीन ऐसी विशेषताएं हैं जिन्होंने उन्हें शीर्ष नेतृत्व का पसंदीदा बनाया—

मजबूत संगठनात्मक पकड़ प्रशासनिक अनुभवआक्रामक लेकिन नियंत्रित राजनीतिक शैली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह का उन पर भरोसा भी उनकी दावेदारी को निर्णायक बढ़त देने वाला कारक माना जा रहा है।

बंगाल मॉडल: एक मुख्यमंत्री, दो उपमुख्यमंत्री

सूत्रों के अनुसार बीजेपी बंगाल में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए “एक मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री” वाला फॉर्मूला अपना सकती है। इसमें एक महिला नेता को भी उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की प्रबल संभावना है। इसे महिला मतदाताओं के बीच भाजपा की बढ़ती स्वीकार्यता से जोड़कर देखा जा रहा है।

महिला शक्ति बनी बीजेपी की सबसे बड़ी ताकत

इस चुनाव में बंगाल की महिलाओं ने बीजेपी को खुलकर समर्थन दिया। पार्टी ने 34 महिलाओं को टिकट दिया था, जिनमें 23 उम्मीदवार जीतकर विधानसभा पहुंचीं। लगभग 68 प्रतिशत का स्ट्राइक रेट बीजेपी के लिए बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।इन्हीं महिला चेहरों में दो नाम सबसे अधिक चर्चा में हैं—रूपा गांगुली टीवी जगत से राजनीति में आईं रूपा गांगुली बंगाल में बीजेपी का प्रभावशाली महिला चेहरा बन चुकी हैं। महिलाओं से जुड़े मुद्दों को आक्रामक ढंग से उठाने और शहरी-ग्रामीण दोनों वर्गों में उनकी पकड़ को पार्टी बड़ी ताकत मानती है। सोनारपुर साउथ से बड़ी जीत दर्ज करने के बाद उनका कद और बढ़ा है।अग्निमित्रा पॉलआसनसोल दक्षिण से भारी मतों से जीतने वाली अग्निमित्रा पॉल को बीजेपी का “फायरब्रांड महिला चेहरा” कहा जाता है।

फैशन डिजाइनिंग की दुनिया से राजनीति में आईं अग्निमित्रा ने ममता बनर्जी की राजनीति को सीधे चुनौती देने की शैली से पार्टी नेतृत्व का भरोसा जीता है।

दलित राजनीति पर बीजेपी की बड़ी पकड़ इस चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश

दलित वोट बैंक का व्यापक ध्रुवीकरण माना जा रहा है। पश्चिम बंगाल की 68 आरक्षित सीटों में बीजेपी ने 51 सीटें जीतकर तृणमूल कांग्रेस को करारा झटका दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह बदलाव बंगाल की सामाजिक राजनीति में बड़े परिवर्तन का संकेत है।इसी वजह से पूर्व केंद्रीय मंत्री निशिथ प्रमाणिक का नाम भी उपमुख्यमंत्री पद की दौड़ में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राजवंशी समाज से आने वाले निशिथ प्रमाणिक उत्तर बंगाल में मजबूत जनाधार रखते हैं और केंद्र सरकार में गृह राज्य मंत्री रह चुके हैं।

दिलीप घोष की भूमिका भी अहम

बंगाल बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष दिलीप घोष का नाम भी सत्ता संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए चर्चा में है। संगठन निर्माण, RSS पृष्ठभूमि और कार्यकर्ताओं के बीच मजबूत पकड़ के कारण उन्हें नई सरकार का रणनीतिक स्तंभ माना जा रहा है।

विपक्ष का हमला, लेकिन बीजेपी उत्साहित

तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी पर “ध्रुवीकरण की राजनीति” का आरोप लगाया है, जबकि कांग्रेस और वाम दलों ने इसे “बंगाल की सांस्कृतिक राजनीति पर बाहरी प्रभाव” बताया है। हालांकि बीजेपी इसे “जनता का जनादेश” करार दे रही है।बीजेपी नेताओं का कहना है कि नई सरकार कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और राजनीतिक हिंसा के मुद्दों पर कठोर कार्रवाई करेगी। शुभेंदु अधिकारी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि “गुंडाराज और कटमनी संस्कृति” के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।

राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर

विशेषज्ञ मानते हैं कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार बनना केवल एक राज्य की जीत नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में शक्ति संतुलन बदलने वाला घटनाक्रम है। पूर्वी भारत में बीजेपी की यह सबसे बड़ी वैचारिक विजय मानी जा रही है।

अब सबकी निगाहें शनिवार सुबह कोलकाता पर टिकी हैं, जहां शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर बंगाल की राजनीति में एक नए युग का औपचारिक उद्घाटन करेंगे।

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