बी के झा
NSK News

पटना, 25 जुलाई
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव जैसे-जैसे मतदान की तारीख के करीब पहुंच रहा है, वैसे-वैसे राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। अब इस चुनाव में एक नया मोड़ तब आया जब जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने अपनी पार्टी की ओर से जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर को समर्थन देने की घोषणा कर दी। इस फैसले के बाद बांकीपुर का मुकाबला और अधिक दिलचस्प तथा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह फैसला केवल एक उम्मीदवार के समर्थन तक सीमित नहीं है, बल्कि विपक्षी राजनीति में नए समीकरणों और संभावित एकजुटता का संकेत भी देता है।
दूसरी ओर भाजपा ने भी इस घटनाक्रम पर तत्काल राजनीतिक जवाब देते हुए प्रशांत किशोर पर तीखा हमला बोला है।
नामांकन रद्द, फिर बदली पूरी रणनीति
सूत्रों के अनुसार, जेजेडी ने पहले बांकीपुर सीट से वीणा मानवी को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी की थी। वह लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय थीं और विशेषकर महिला मतदाताओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जा रही थी। लेकिन तकनीकी कारणों से उनका नामांकन रद्द हो गया।इसके बाद पार्टी के सामने चुनावी रणनीति बदलने की चुनौती थी। अंततः तेज प्रताप यादव ने स्वयं आगे आकर प्रशांत किशोर को समर्थन देने का ऐलान किया और कार्यकर्ताओं से भी उसी दिशा में काम करने का संकेत दिया।
तेज प्रताप बोले— भाजपा को हराना प्राथमिकता
समर्थन की घोषणा करते हुए तेज प्रताप यादव ने कहा कि उनकी सुबह प्रशांत किशोर से फोन पर बातचीत हुई थी।उनके अनुसार, “प्रशांत किशोर ने कहा कि बांकीपुर में भाजपा किसी भी कीमत पर नहीं जीतनी चाहिए। पूरे देश की यही इच्छा है।”तेज प्रताप ने कहा कि उनका समर्थन किसी व्यक्तिगत राजनीति के लिए नहीं, बल्कि उन मुद्दों के लिए है जिन पर आज देश का युवा आवाज उठा रहा है।उन्होंने कहा कि देशभर में छात्र-छात्राएं, महिलाएं और युवा विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। जंतर-मंतर पर लंबे समय से चल रहे धरनों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार को युवाओं की मांगों को गंभीरता से सुनना चाहिए।
NEET और शिक्षा व्यवस्था पर सरकार को घेरा
तेज प्रताप यादव ने अपने संबोधन में नीट पेपर लीक का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में समय-समय पर परीक्षा संबंधी अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाएं सामने आती रही हैं, लेकिन सरकार प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही है।उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी चिंताजनक है। उनके अनुसार यही कारण है कि युवा सड़कों पर उतरकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं।
भाजपा का पलटवार, ऋतुराज सिन्हा ने मांगा जवाब
तेज प्रताप के समर्थन के कुछ ही घंटों बाद भाजपा ने भी आक्रामक रुख अपनाया।बांकीपुर में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री ऋतुराज सिन्हा ने प्रशांत किशोर पर तीखा हमला बोला।उन्होंने कहा,”जो व्यक्ति बिहार की जनता से कथित तौर पर लिए गए 20 करोड़ रुपये का हिसाब नहीं दे सकता, उसे दूसरों से जवाब मांगने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।”ऋतुराज सिन्हा ने आरोप लगाया कि ‘परिवार लाभ अभियान’ के दौरान बिहार के लगभग एक करोड़ लोगों से पीला कार्ड के नाम पर ₹20-₹20 लेकर करोड़ों रुपये जुटाए गए, लेकिन आज तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उस अभियान से किसी परिवार को वास्तविक लाभ मिला या नहीं।उन्होंने कहा कि यदि यह अभियान वास्तव में जनहित का था तो जनता के सामने पूरा लेखा-जोखा रखा जाना चाहिए।
“गरीबों की गाढ़ी कमाई का हिसाब दें”
भाजपा नेता ने आगे कहा कि यह राशि बिहार के गरीब और मेहनतकश लोगों की मेहनत की कमाई है।उन्होंने मांग की कि यदि किसी अभियान के नाम पर जनता से धन लिया गया है तो उसका पूरा सार्वजनिक विवरण प्रस्तुत किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता केवल बड़े-बड़े वादे नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही चाहती है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेज प्रताप यादव द्वारा प्रशांत किशोर को समर्थन दिए जाने से चुनावी मुकाबले का मनोवैज्ञानिक प्रभाव अवश्य पड़ सकता है। हालांकि इसका वास्तविक असर मतदान के दिन मतदाताओं के रुझान पर निर्भर करेगा।विश्लेषकों का कहना है कि विपक्षी दल यदि स्थानीय स्तर पर अपने मतों का प्रभावी समन्वय कर पाते हैं तो मुकाबला और कड़ा हो सकता है। वहीं भाजपा अपने मजबूत संगठन और बूथ प्रबंधन के भरोसे चुनाव मैदान में पूरी ताकत के साथ डटी हुई है।
अब चुनाव प्रचार में आरोप-प्रत्यारोप का दौर
बांकीपुर उपचुनाव अब केवल विकास और स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रह गया है। चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप, जवाबी हमले और राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।एक ओर विपक्ष भाजपा को शिक्षा, बेरोजगारी और परीक्षा प्रणाली जैसे मुद्दों पर घेर रहा है, तो दूसरी ओर भाजपा विपक्ष और उसके सहयोगियों से जवाबदेही तथा विश्वसनीयता पर सवाल पूछ रही है।
जनता के फैसले पर टिकी निगाहें
बांकीपुर का उपचुनाव अब प्रतिष्ठा, रणनीति और राजनीतिक संदेश—तीनों का केंद्र बन चुका है। सभी प्रमुख दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। अब यह फैसला बांकीपुर की जनता के हाथ में है कि वह किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है।
यह परिणाम न केवल एक सीट का भविष्य तय करेगा, बल्कि बिहार की बदलती राजनीतिक दिशा और आगामी चुनावी समीकरणों का संकेत भी देगा।
