मुश्किलों में घिरे शुभेंदु अधिकारी: TMC ने चुनाव आयोग से की शिकायत, लगाया धमकाने का आरोप

बी के झा

NSK

कोलकाता / न ई दिल्ली, 1 नवंबर

पश्चिम बंगाल की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। राज्य में विपक्ष के नेता और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी ने दावा किया है कि शुभेंदु अधिकारी ने बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) को धमकाया है और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की है।

TMC ने चुनाव आयोग को सौंपी लिखित शिकायत

राज्य के मंत्री और टीएमसी के सीनियर नेता अरूप बिस्वास ने पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी को एक विस्तृत पत्र सौंपा है। इस पत्र में उन्होंने शुभेंदु अधिकारी पर आरोप लगाया है कि वे सरकारी कर्मचारियों पर दबाव बना रहे हैं, जो मतदाता सूची की सुरक्षा और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

बिस्वास ने पत्र में लिखा, “जिन अधिकारियों को मतदाता सूची की सुरक्षा का जिम्मा दिया गया है, उन्हें योजनाबद्ध तरीके से धमकाया जा रहा है। अगर इस पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई, तो राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं होंगे।”तुरंत कार्रवाई की मांग, सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील

टीएमसी ने चुनाव आयोग से शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है। साथ ही आयोग से यह सुनिश्चित करने की भी अपील की गई है कि भविष्य में किसी भी सरकारी कर्मचारी या चुनावी अधिकारी को इस तरह के दबाव या धमकी का सामना न करना पड़े।

शुभेंदु अधिकारी की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल इस पूरे मामले पर शुभेंदु अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। भाजपा की ओर से भी अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में बंगाल की चुनावी राजनीति को और गर्मा सकता है।

टीएमसी का आरोप — “निष्पक्ष चुनाव असंभव बनाना चाहती है बीजेपी”टीएमसी नेताओं का आरोप है कि भाजपा राज्य में प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनाकर मतदाता सूची में हेरफेर करना चाहती है। अरूप बिस्वास ने कहा कि यदि आयोग ने समय रहते कड़ा कदम नहीं उठाया तो चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग जाएगा।

पृष्ठभूमि:

शुभेंदु अधिकारी का राजनीतिक प्रभावशुभेंदु अधिकारी कभी टीएमसी के ही कद्दावर नेता थे और नंदीग्राम आंदोलन के नायक के रूप में पहचान बनाई थी। बाद में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ा था। इस सीट पर उनकी जीत के बाद वे पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता बने।

क्या कहता है चुनाव आयोग का नियमचुनाव

आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल या नेता द्वारा सरकारी कर्मचारियों को धमकाना या चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना एक गंभीर अपराध माना जाता है। ऐसे मामलों में आयोग जांच कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *