बी. के. झा
NSK News

मुंबई / नई दिल्ली 28 जून
मुंबई में मुहर्रम के अवसर पर निकाले गए पारंपरिक शिया जुलूस के दौरान एक कथित बड़े षड्यंत्र का खुलासा होने से सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है। मुंबई पुलिस ने दावा किया है कि उसने समय रहते एक ऐसी साजिश को विफल कर दिया, जिससे हजारों लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी। पुलिस ने पुणे निवासी 39 वर्षीय फैयाज प्रेमजी को गिरफ्तार किया है। उसके पास से लगभग 14 हजार संदिग्ध जहरीले कैप्सूल बरामद किए गए हैं, जिनमें पुलिस के अनुसार चूहा मारने वाले रसायन जिंक फॉस्फाइड का इस्तेमाल किया गया था।हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और आरोपी के कथित उद्देश्य तथा किसी संभावित नेटवर्क की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
अस्पताल से मिली सूचना, खुली कथित साजिश की परतें
मुंबई पुलिस के अनुसार पूरा मामला तब सामने आया जब दक्षिण मुंबई के एक अस्पताल से पुलिस को सूचना मिली कि मुहर्रम जुलूस में शामिल एक व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में तबीयत बिगड़ गई है। पीड़ित ने डॉक्टरों को बताया कि उसने जुलूस के दौरान दर्द निवारक दवा बताकर दिया गया एक कैप्सूल खाया था, जिसके बाद उसे लगातार उल्टियां और पेट में तेज दर्द शुरू हो गया।डॉक्टरों द्वारा मामले की सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हुई और जांच के दौरान संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में ले लिया।
पुलिस का दावा—पहले से की गई थी पूरी तैयारी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी के पास से लगभग 14 हजार कैप्सूल बरामद किए गए। प्रारंभिक पूछताछ में यह भी सामने आया कि उसने कथित रूप से 30 हजार खाली कैप्सूल तथा लगभग 50 किलोग्राम जिंक फॉस्फाइड ऑनलाइन खरीदा था। पुलिस का आरोप है कि इन कैप्सूलों को स्वयं भरकर वह मुहर्रम जुलूस में शामिल लोगों के बीच बांटने की तैयारी में था।पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या उसके पीछे किसी संगठित गिरोह अथवा अन्य व्यक्तियों का हाथ था।
धार्मिक आयोजन को निशाना बनाने का आरोप
प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस का कहना है कि आरोपी कथित रूप से उन लोगों को दर्द निवारक दवा बताकर कैप्सूल दे रहा था, जो मातमी जुलूस में शामिल होकर शारीरिक रूप से थके हुए थे। यदि यह आरोप जांच में सही साबित होता है, तो इसे धार्मिक आयोजन को निशाना बनाने की अत्यंत गंभीर आपराधिक साजिश माना जाएगा।
आरोपी की पृष्ठभूमि भी जांच के दायरे में
पुलिस के अनुसार आरोपी शिक्षित है और पुणे में अपने परिवार के व्यवसाय से जुड़ा रहा है। उसकी विदेश यात्राओं तथा अन्य गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। हालांकि पुलिस ने अभी तक किसी आतंकी संगठन या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से उसके संबंधों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि जांच में पुलिस के दावे सही साबित होते हैं तो यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रहेगा, बल्कि धार्मिक आयोजनों की सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती के रूप में देखा जाएगा।विश्लेषकों के अनुसार ऐसे मामलों में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अधिक आवश्यक है कि निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को कठोर दंड मिले।
कानूनविदों का मत
संवैधानिक और आपराधिक कानून के जानकारों का कहना है कि इस तरह के मामलों में जांच एजेंसियों को वैज्ञानिक साक्ष्यों, फोरेंसिक रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निष्कर्ष तक पहुंचना चाहिए।उनका कहना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो भारतीय दंड कानून की गंभीर धाराओं के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और जनजीवन को खतरे में डालने से संबंधित प्रावधान भी लागू हो सकते हैं। वहीं न्याय का मूल सिद्धांत यह भी है कि अंतिम दोषसिद्धि केवल न्यायालय द्वारा ही निर्धारित की जाती है।
मुस्लिम संगठनों और उलेमा की प्रतिक्रिया
विभिन्न मुस्लिम संगठनों तथा शिया और सुन्नी उलेमा ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि मुहर्रम इमाम हुसैन की शहादत, इंसाफ और मानवता का प्रतीक है। यदि किसी ने धार्मिक आस्था और श्रद्धा के अवसर को निशाना बनाने की कोशिश की है तो उसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।मौलानाओं ने लोगों से अपील की कि किसी भी धार्मिक आयोजन में अजनबियों से दवा, खाद्य पदार्थ या अन्य वस्तु लेने से पहले सावधानी बरतें तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना दें।
शिक्षाविदों की चिंता
शिक्षाविदों का कहना है कि समाज में कट्टरता, अफवाह और घृणा के वातावरण को रोकने के लिए संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक सद्भाव और नागरिक जिम्मेदारी की शिक्षा को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
समाजसेवी संस्थाओं की अपील
सामाजिक संगठनों ने सभी समुदायों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है। उनका कहना है कि किसी एक आरोपी के कथित कृत्य को किसी धर्म या पूरे समुदाय से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। अपराधी की पहचान उसके अपराध से होनी चाहिए, न कि उसकी धार्मिक पहचान से।
विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों के नेताओं ने घटना की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि पुलिस के दावे सही हैं तो यह सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है और इसके पीछे यदि कोई बड़ा नेटवर्क है तो उसका पूरी तरह खुलासा होना चाहिए।साथ ही विपक्ष ने सरकार से धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने की मांग की है।
पुलिस की जांच जारी
मुंबई पुलिस की अपराध शाखा और स्थानीय पुलिस संयुक्त रूप से मामले की जांच कर रही है। बरामद कैप्सूलों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी का वास्तविक उद्देश्य क्या था और क्या इस कथित साजिश में अन्य लोग भी शामिल थे।
निष्कर्ष
मुहर्रम जैसे संवेदनशील धार्मिक आयोजन के दौरान सामने आया यह मामला सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चेतावनी माना जा रहा है। यदि जांच में पुलिस के आरोप सिद्ध होते हैं तो यह केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव और सार्वजनिक सुरक्षा पर गंभीर हमला माना जाएगा।
साथ ही यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने या किसी समुदाय को दोषी ठहराने से बचा जाए।
कानून का शासन यही कहता है कि अपराधी को कठोरतम दंड मिले, लेकिन न्याय केवल तथ्यों, साक्ष्यों और न्यायालय के निर्णय के आधार पर ही सुनिश्चित किया जाए।
