बी के झा
NSK


पटना 8 मई
बिहार की नई सत्ता संरचना केवल राजनीतिक समीकरणों का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह पीढ़ियों के संक्रमण, सामाजिक प्रतिनिधित्व और भविष्य की राजनीतिक दिशा का भी संकेतक बन चुकी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई एनडीए सरकार के मंत्रिमंडल में जहां एक ओर 79 वर्षीय अनुभवी नेता बिजेंद्र प्रसाद यादव सबसे उम्रदराज मंत्री हैं, वहीं दूसरी ओर 35 वर्षीय युवा चेहरा श्रेयसी सिंह सबसे कम उम्र की मंत्री बनकर उभरी हैं।
राजनीतिक गलियारों में इस मंत्रिमंडल को “अनुभव और युवा महत्वाकांक्षा के मिश्रण” के रूप में देखा जा रहा है। मंत्रिमंडल की औसत आयु 55.31 वर्ष है, जबकि स्वयं मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 57 वर्ष के हैं।
श्रेयसी सिंह: खेल मैदान से सत्ता के केंद्र तक
इस मंत्रिमंडल में सबसे अधिक चर्चा यदि किसी नाम की हो रही है तो वह है श्रेयसी सिंह। भारतीय निशानेबाजी में देश को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाली श्रेयसी अब बिहार के औद्योगिक भविष्य की नई जिम्मेदार चेहरे के रूप में सामने आई हैं।श्रेयसी सिंह को सम्राट सरकार में उद्योग विभाग जैसा अहम मंत्रालय सौंपा गया है। इससे पहले वे खेल और आईटी विभाग संभाल रही थीं, लेकिन इस बार उन्हें उद्योग जैसे रणनीतिक मंत्रालय की जिम्मेदारी देकर भाजपा नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी युवा और आधुनिक छवि वाले नेताओं को आगे बढ़ाना चाहती है।
राज्य सरकार बिहार में निवेश, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर चुकी है। 11 नई टाउनशिप विकसित करने और उद्योग आधारित रोजगार मॉडल तैयार करने की योजना के बीच श्रेयसी सिंह की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा ने श्रेयसी सिंह को केवल “युवा महिला चेहरा” बनाकर नहीं रखा, बल्कि उन्हें ऐसा विभाग दिया है जो सीधे बिहार की आर्थिक दिशा तय करेगा।
गोल्ड मेडलिस्ट से उद्योग मंत्री तक
जमुई की विधायक श्रेयसी सिंह खेल जगत का बड़ा नाम रही हैं। उन्होंने 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स 2018 में निशानेबाजी की डबल ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था। वे ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुकी हैं और अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित हैं।राजनीति में उनका प्रवेश 2020 में हुआ, जब उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। उसी वर्ष पार्टी ने उन्हें जमुई से टिकट दिया और वे विधायक निर्वाचित हुईं।
2025 में लगातार दूसरी बार जीत हासिल करने के बाद उन्हें दोबारा मंत्रिमंडल में जगह मिली।श्रेयसी सिंह का राजनीतिक परिवार भी बिहार की राजनीति में प्रभावशाली रहा है। उनके पिता दिग्विजय सिंह केंद्र की सरकारों में मंत्री रह चुके थे, जबकि उनकी मां पुतुल कुमारी बांका से सांसद रही हैं।
युवा बनाम अनुभव: कैबिनेट का दिलचस्प संतुलन सम्राट कैबिनेट में 39 वर्ष से कम उम्र के केवल दो मंत्री हैं—
श्रेयसी सिंह और दीपक प्रकाश।40 से 49 वर्ष के आयु वर्ग में संजय सिंह, श्वेता गुप्ता, लखेंद्र रौशन और निशांत कुमार जैसे चेहरे शामिल हैं।सबसे अधिक 19 मंत्री 50 से 59 वर्ष आयु वर्ग में हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार ने पूरी तरह युवा प्रयोग करने के बजाय “राजनीतिक अनुभव और प्रशासनिक संतुलन” को प्राथमिकता दी है।वहीं 60 से 70 वर्ष के बीच नौ मंत्री हैं, जिनमें विजय कुमार चौधरी, रामकृपाल यादव, श्रवण कुमार और दिलीप कुमार जायसवाल जैसे वरिष्ठ नेता शामिल हैं।
सबसे वरिष्ठ मंत्री उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र यादव 79 वर्ष की आयु में भी सत्ता के केंद्र में बने हुए हैं। यह बताता है कि बिहार की राजनीति में अनुभव का महत्व अभी भी कम नहीं हुआ है।
महिला नेतृत्व को नया संदेश?
नई कैबिनेट में श्रेयसी सिंह और रमा निषाद, लेशी सिंह, शीला कुमारी मंडल और श्वेता गुप्ता जैसी महिलाओं की मौजूदगी को भाजपा “महिला सशक्तिकरण” के रूप में प्रस्तुत कर रही है।पटना स्थित एक महिला अधिकार संगठन की संयोजक ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा—“सिर्फ महिलाओं को मंत्री बनाना पर्याप्त नहीं है, असली सवाल यह है कि क्या उन्हें निर्णय लेने की वास्तविक शक्ति भी मिलेगी।
श्रेयसी सिंह को उद्योग विभाग मिलना सकारात्मक संकेत है, क्योंकि यह पहली बार है जब किसी युवा महिला चेहरे को राज्य की आर्थिक दिशा से जुड़ा महत्वपूर्ण मंत्रालय सौंपा गया है।”
शिक्षाविदों की राय: “नई पीढ़ी को संदेश देने की कोशिश
”मिथिला के एक वरिष्ठ शिक्षाविद और राजनीतिक विश्लेषक का कहना है कि सम्राट सरकार का यह मंत्रिमंडल केवल प्रशासनिक गठन नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक राजनीतिक संदेश भी है।उनके अनुसार—“भाजपा यह दिखाना चाहती है कि अब बिहार की राजनीति केवल पारंपरिक जातीय नेतृत्व तक सीमित नहीं रहेगी। श्रेयसी सिंह जैसे युवा और पेशेवर पृष्ठभूमि वाले चेहरे यह संकेत देते हैं कि पार्टी नई पीढ़ी को राजनीति से जोड़ना चाहती है। लेकिन चुनौती यह होगी कि क्या इन युवा चेहरों को स्वतंत्र राजनीतिक पहचान विकसित करने का अवसर मिलेगा या वे केवल प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व बनकर रह जाएंगी।
”विपक्ष का हमला: “चेहरे नए, राजनीति पुरानी”
राष्ट्रीय जनता दल ने मंत्रिमंडल विस्तार को “इमेज मेकओवर” करार दिया। पार्टी नेताओं का कहना है कि युवा चेहरों को आगे लाने का दावा तब तक अधूरा है जब तक सरकार बेरोजगारी और पलायन पर ठोस परिणाम नहीं दिखाती।वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि सरकार सचमुच युवाओं को प्राथमिकता देना चाहती है तो मंत्रिमंडल में 40 वर्ष से कम उम्र के केवल दो मंत्री ही क्यों हैं।विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार ने “युवा बनाम वरिष्ठ” का संतुलन दिखाने की कोशिश तो की है, लेकिन सत्ता संचालन अभी भी पुराने राजनीतिक ढांचे के हाथों में ही रहेगा।
बिहार की राजनीति का बदलता चेहरा
सम्राट चौधरी मंत्रिमंडल यह संकेत देता है कि बिहार की राजनीति संक्रमण के दौर से गुजर रही है। एक ओर दशकों का अनुभव रखने वाले नेता सत्ता में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं, तो दूसरी ओर श्रेयसी सिंह जैसे युवा चेहरे नई राजनीतिक आकांक्षाओं का प्रतीक बनकर उभर रहे हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह युवा नेतृत्व बिहार को रोजगार, उद्योग और निवेश के नए दौर में ले जा पाएगा,
या फिर यह प्रयोग भी पारंपरिक राजनीति के बोझ तले सीमित होकर रह जाएगा।
