बी के झा
NSK News

अयोध्या, 22 जुलाई
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बुधवार को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक पर देशभर की निगाहें टिकी हैं। यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित अनियमितताओं के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सार्वजनिक चर्चा तेज हुई है। ऐसे में माना जा रहा है कि यह बैठक केवल नए महासचिव के चयन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ट्रस्ट के संगठनात्मक ढांचे, प्रशासनिक व्यवस्था और भविष्य की कार्ययोजना को भी नई दिशा दे सकती है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में ट्रस्ट के नए महासचिव के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। साथ ही रिक्त ट्रस्टी पदों को भरने, विभिन्न प्रशासनिक समितियों के गठन और राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति प्रक्रिया की समीक्षा भी एजेंडे में शामिल रहेगी।
चम्पत राय के इस्तीफे के बाद पहली बड़ी परीक्षा
राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद के बाद ट्रस्ट के लंबे समय तक महासचिव रहे चम्पत राय ने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 6 जुलाई की बैठक में कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब ट्रस्ट स्थायी महासचिव के चयन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।बैठक की अध्यक्षता ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास करेंगे। यह बैठक मणिराम छावनी में दो चरणों में आयोजित होगी।
ट्रस्ट में तीन पद खाली, नए चेहरों की संभावना
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में मूल रूप से 11 स्थायी सदस्य हैं। वर्तमान में तीन पद रिक्त हैं। इनमें अयोध्या राजपरिवार के राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन, चम्पत राय के इस्तीफे और ट्रस्टी अनिल मिश्र के पद छोड़ने के बाद रिक्तियां बनी हैं।ट्रस्ट डीड के अनुसार बहुमत के आधार पर नए सदस्यों का चयन किया जा सकता है। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार निर्मोही अखाड़े के लिए आरक्षित सीट में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता।
सूत्रों के अनुसार राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के पुत्र यतीन्द्र मिश्र को ट्रस्ट में शामिल किए जाने की संभावना प्रबल मानी जा रही है।
कार्यप्रणाली को पेशेवर बनाने की तैयारी
सूत्रों का कहना है कि बैठक में वित्त प्रबंधन, पूजा व्यवस्था, दर्शन व्यवस्था, चढ़ावा गणना, श्रद्धालु सुविधा और पास व्यवस्था के लिए अलग-अलग समितियों के गठन पर भी निर्णय लिया जा सकता है। उद्देश्य यह है कि प्रत्येक विभाग की जवाबदेही स्पष्ट हो और व्यवस्थाओं में अधिक पारदर्शिता लाई जा सके।
CEO चयन प्रक्रिया अंतिम चरण की ओर
राम मंदिर के पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन को लेकर भी बैठक में चर्चा संभावित है।जानकारी के अनुसार इस पद के लिए 5,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। चयन समिति पहले सभी आवेदनों की जांच करेगी, फिर योग्य उम्मीदवारों का साक्षात्कार लिया जाएगा। इसके बाद तीन नाम ट्रस्ट के समक्ष रखे जाएंगे, जिनमें से अंतिम चयन ट्रस्ट करेगा। चयन समिति में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी तथा सुरेश हावरे शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि 15 अगस्त तक CEO के नाम पर अंतिम निर्णय संभव है।
SIT रिपोर्ट पर फिलहाल चर्चा की संभावना कम
पहले माना जा रहा था कि चढ़ावा प्रकरण में SIT की रिपोर्ट पर भी चर्चा होगी, लेकिन मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण अब संभावना है कि ट्रस्ट इस विषय पर औपचारिक चर्चा से परहेज करेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राम मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व का सांस्कृतिक प्रतीक भी बन चुका है। ऐसे में ट्रस्ट के प्रत्येक निर्णय की पारदर्शिता और विश्वसनीयता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि विवादों के बाद यदि ट्रस्ट प्रशासनिक सुधार और जवाबदेही को प्राथमिकता देता है तो इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा।
कानूनविदों का मत
संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप गठित संस्था है। इसलिए ट्रस्ट डीड के प्रावधानों का अक्षरशः पालन, वित्तीय पारदर्शिता, संस्थागत जवाबदेही और निर्णय प्रक्रिया की वैधानिकता अत्यंत आवश्यक है। उनका मानना है कि किसी भी बड़े धार्मिक ट्रस्ट की विश्वसनीयता उसके प्रशासनिक अनुशासन से तय होती है।
धर्माचार्यों की प्रतिक्रिया
कई संतों और धर्माचार्यों ने कहा कि श्रीराम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इसलिए ट्रस्ट के सभी निर्णय सेवा, त्याग, पारदर्शिता और मर्यादा के सिद्धांतों पर आधारित होने चाहिए। उनका मत है कि प्रशासनिक व्यवस्थाओं को आधुनिक बनाया जा सकता है, लेकिन मंदिर की धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक गरिमा से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
शिक्षाविदों की दृष्टि
शिक्षा और संस्कृति के जानकारों का कहना है कि राम मंदिर भारतीय सभ्यता, इतिहास और सांस्कृतिक चेतना का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। इसलिए यहां विकसित होने वाला प्रशासनिक मॉडल देश के अन्य बड़े धार्मिक संस्थानों के लिए भी उदाहरण बन सकता है। आधुनिक प्रबंधन और पारंपरिक मूल्यों का संतुलन समय की आवश्यकता है।
समाजसेवी संस्थाओं की अपेक्षाएं
सामाजिक संगठनों ने ट्रस्ट से अपेक्षा जताई है कि श्रद्धालुओं की सुविधाओं, दिव्यांगजन के लिए बेहतर व्यवस्थाओं, डिजिटल पारदर्शिता, दान प्रबंधन और सामाजिक सेवा परियोजनाओं को और अधिक मजबूत किया जाए। उनका कहना है कि राम मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि सेवा और जनकल्याण का भी केंद्र बनना चाहिए।
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्षी दलों के कुछ नेताओं का कहना है कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का विषय है और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी तथा जवाबदेह होनी चाहिए। उनका मत है कि चढ़ावे, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर समय-समय पर सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए ताकि किसी प्रकार के विवाद की गुंजाइश न रहे। साथ ही विपक्ष ने यह भी कहा कि धार्मिक आस्था के विषय को दलगत राजनीति से ऊपर रखकर देखा जाना चाहिए।
सरकार का रुख
केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि श्रीराम मंदिर देश की सांस्कृतिक धरोहर और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। सरकार का स्पष्ट मत है कि ट्रस्ट एक स्वतंत्र संस्था है और वह अपने ट्रस्ट डीड तथा सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप निर्णय लेने के लिए सक्षम है। सरकार आवश्यक प्रशासनिक और सुरक्षा सहयोग उपलब्ध कराती रहेगी।
नजरें आज की बैठक पर
बुधवार की बैठक केवल नए महासचिव के चयन तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे राम मंदिर ट्रस्ट के प्रशासनिक पुनर्गठन, पारदर्शिता और भविष्य की कार्यशैली तय करने वाली महत्वपूर्ण बैठक के रूप में देखा जा रहा है।
अब यह देखना होगा कि ट्रस्ट नए नेतृत्व और नई व्यवस्थाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं के विश्वास को और अधिक सुदृढ़ करने में कितना सफल होता है।
