बी के झा
NSK News

अयोध्या ( यूपी ) 9 जुलाई
अयोध्या में राम मंदिर दान प्रबंधन से जुड़े कथित गबन प्रकरण की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे दान गणना और सुरक्षा व्यवस्था में निर्धारित मानकों के अनुपालन पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। पुलिस रिमांड पर लिए गए आरोपियों से पूछताछ में कथित रूप से ऐसी फर्जी रसीद पुस्तिकाएं बरामद हुई हैं, जो देखने में मूल रसीदों से लगभग अभिन्न बताई जा रही हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित अनियमितताओं को रोकने के लिए वर्ष 2025 में लागू की गई मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) का पालन किस सीमा तक हुआ।
एसओपी के अनुसार दानपात्रों को नामित अधिकारियों की संयुक्त उपस्थिति में खोलना, प्राप्त राशि को निर्धारित अंतराल पर बैंक खाते में जमा करना और संपूर्ण प्रक्रिया का विधिवत अभिलेखीकरण अनिवार्य है। नोट एवं सिक्का गणना के लिए मशीनों की नियमित जांच, नकदी का न्यूनतम भंडारण तथा कर्मचारियों की नियुक्ति और दायित्वों का स्पष्ट लेखा-जोखा भी इसी व्यवस्था का हिस्सा है। बैंक अधिकारियों के मासिक रोटेशन का प्रावधान संभावित हित-संघर्ष और अनियमितताओं की आशंका को कम करने के उद्देश्य से किया गया था।
ट्रस्ट और बैंक की साझा जिम्मेदारियों में दानपात्र खोलने से लेकर गणना कक्ष के संचालन, रिकॉर्ड संधारण और सुरक्षा व्यवस्था तक की जवाबदेही निर्धारित की गई है। गणना कक्ष में प्रवेश के लिए सख्त नियम, तलाशी की अनिवार्यता और आगंतुक पंजी का संधारण इस बात को रेखांकित करते हैं कि दान प्रबंधन को अत्यधिक संवेदनशील प्रक्रिया माना गया था।
जांच का अंतिम निष्कर्ष अभी आना शेष है, किंतु प्रकरण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी धार्मिक या सार्वजनिक संस्थान में पारदर्शिता केवल नियम बनाने से नहीं, बल्कि उनके कठोर और निरंतर पालन से सुनिश्चित होती है।
अब सबकी निगाहें जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह स्पष्ट करेगी कि कथित चूकें व्यक्तिगत स्तर तक सीमित थीं या व्यवस्थागत सुधार की व्यापक आवश्यकता है।
