बी के झा
NSK

नई दिल्ली/ पटना, 28 नवंबर
पटना में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का सरकारी आवास खाली कराने को लेकर छिड़ा विवाद अब सूबे की राजनीति के केंद्र में आ गया है। डिप्टी सीएम एवं गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने आरजेडी नेताओं की बयानबाज़ी पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि “सरकारी आवास किसी की बपौती नहीं है। सरकार जनता की है और आवास भी जनता का है।” उनके इस बयान ने पहले से ही संवेदनशील चल रहे राजनीतिक माहौल को और उबाल दे दिया है।
सुप्रीम कोर्ट का साफ आदेश—पूर्व मुख्यमंत्रियों को स्थायी बंगला नहीं सम्राट चौधरी ने दो-टूक कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश स्पष्ट है—पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास रखने का अधिकार नहीं।राबड़ी देवी को फिलहाल विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के रूप में नया घर आवंटित किया जा चुका है, इसलिए मौजूदा आवास खाली करना सरकार के नियमों के अनुरूप है।उन्होंने यह भी कहा कि“लालू-राबड़ी से कोई व्यक्तिगत वैमनस्य नहीं, कानून और परंपरा के मुताबिक कार्य हो रहा है। पिछली सरकार में भी घर बदलने की प्रक्रिया चलती रही है। मैंने खुद 28 साल में छह घर बदले।”
RJD का पलटवार—“नीतीश सरकार BJP के दबाव में, डेरा खाली नहीं होगा”राजद प्रदेश अध्यक्ष मंगनीलाल मंडल ने साफ कहा था—“सरकार जो चाहे कर ले, हम डेरा खाली नहीं करेंगे।”आरजेडी का आरोप है कि भाजपा दबाव में नीतीश सरकार लालू परिवार को निशाना बना रही है। पार्टी ने संकेत दिया है कि वे कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
20 साल पुरानी ‘सर्कुलर रोड’ की कहानी लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी करीब दो दशक से 10 सर्कुलर रोड वाले सरकारी आवास में रह रहे हैं। नई सरकार के गठन के बाद भवन निर्माण विभाग ने इस आवास को नेता प्रतिपक्ष के लिए चिन्हित किया और तुरंत खाली करने का निर्देश जारी किया। यहीं से विवाद ने तूल पकड़ा।
विश्लेषकों और शिक्षाविदों की प्रतिक्रिया—“भाषा की मर्यादा गिर रही है”सम्राट चौधरी के “बपौती” वाले बयान पर स्थानीय शिक्षाविदों, राजनीतिक विश्लेषकों और कई वरिष्ठ पत्रकारों ने आपत्ति जताई है। उनका मत है कि इतनी ऊँची constitutional post पर बैठे व्यक्ति को अपनी भाषाई मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
एक वरिष्ठ शिक्षाविद ने कहा—“राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं, बिहार के लोकप्रिय नेताओं में गिने जाते हैं। सरकार चाहे कितना भी दृढ़ संदेश दे, भाषा संयमित रहनी चाहिए।”राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की बयानबाज़ी “कनफ्रंटेशनल पॉलिटिक्स” को बढ़ावा देती है और सरकार–विपक्ष की दूरी को और चौड़ा करती है।
सरकार का पक्ष—कानून व्यवस्था सर्वोपरिसम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि अराजकता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी।उन्होंने कहा—“सरकारी संपत्ति पर कोई गुंडागर्दी या दबाव नहीं चलेगा। नया आवास आवंटित हो चुका है, अब उसे स्वीकार करना होगा। सरकार सम्मान भी देगी और नियम भी लागू करेगी।
”राजनीतिक तापमान बढ़ा—आगे क्या?यह विवाद आने वाले दिनों में और तेज़ होने की संभावना है।आरजेडी अपनी परंपरा और राजनीतिक सम्मान का सवाल बता रही है, जबकि सरकार इसे कानून और प्रशासनिक प्रक्रिया के दायरे का विषय बता रही है।फिलहाल, राजनीति का पारा चढ़ चुका है—एक ओर नीतीश सरकार कानून की दुहाई दे रही हैं दूसरी ओर आरजेडी इसे “सम्मान बनाम सत्ता का दमन” की लड़ाई बता रही है
अब देखना यह है कि राबड़ी आवास का अध्याय न्यायालय के दरवाज़े पर हल होगा या राजनीतिक मोर्चे पर।
