अनुपूरक बजट से विकास को रफ्तार, वंदे मातरम पर राष्ट्रबोध की चर्चा यूपी विधानसभा में आज वित्त, राष्ट्रवाद और सियासत—तीनों की परीक्षा

बी के झा

लखनऊ, 22 दिसंबर

उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र का दूसरा दिन आज वित्तीय फैसलों, वैचारिक विमर्श और सियासी टकराव—तीनों के लिहाज़ से बेहद अहम माना जा रहा है। योगी सरकार आज वित्तीय वर्ष 2025–26 का अनुपूरक बजट पेश करेगी, जिसके तुरंत बाद सदन में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर लंबी और ऐतिहासिक चर्चा प्रस्तावित है।

वहीं दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने कफ सिरप मुद्दे को लेकर प्रदर्शन और विरोध की रणनीति तैयार कर रखी है।सदन की कार्यवाही से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक होगी, जिसमें अनुपूरक बजट को मंजूरी दी जाएगी। इसके बाद दोपहर 12:20 बजे वित्त मंत्री द्वारा बजट सदन में रखा जाएगा।अनुपूरक बजट: योजनाओं को ठहराव से निकालने की कोशिश आम बजट से करीब दो महीने पहले पेश किया जा रहा यह अनुपूरक बजट सरकार की उस कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जिससे बजट के अभाव में अटकी योजनाओं को गति दी जा सके।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अनुपूरक बजट का आकार 25 से 30 हजार करोड़ रुपये के बीच हो सकता है। बीते वर्ष दिसंबर में यह आंकड़ा 17,865 करोड़ रुपये था।विशेषज्ञों के अनुसार, यह बजट प्रशासनिक निरंतरता विकास कार्यों की गति और वित्तीय अनुशासन—

तीनों को संतुलित करने का प्रयास होगा।जल, सड़क, बिजली और स्वास्थ्य पर फोकस सरकार की प्राथमिकताओं में इस बार भी बुनियादी ढांचा केंद्र में रहेगा।जल जीवन मिशन: केंद्र से इस वित्त वर्ष में बजट न मिलने के कारण योजना की रफ्तार धीमी पड़ी है। यहां तक कि कर्मचारियों के वेतन पर भी असर पड़ा है। अनुपूरक बजट में राज्य सरकार इसके लिए संसाधन जुटाएगी।अटल भूजल मिशन: केंद्र द्वारा योजना बंद किए जाने के बाद राज्य सरकार इसे अपने स्तर पर आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

सड़क निर्माण: ग्राम्य विकास विभाग और लोक निर्माण विभाग को ग्रामीण व शहरी सड़कों के लिए अतिरिक्त राशि मिलने की संभावना है।बिजली व्यवस्था: गर्मियों से पहले बिजली संकट से बचने के लिए नेटवर्क सुधार और नए पावर प्लांटों के लिए ऊर्जा विभाग को अतिरिक्त बजट दिया जाएगा।स्वास्थ्य सेवाएं: अस्पतालों में सुविधाओं के विस्तार और उपकरणों की खरीद पर भी विशेष ध्यान रहेगा।

लिंक एक्सप्रेस-वे और डिफेंस कॉरिडोर को बढ़ावा अनुपूरक बजट का सबसे बड़ा हिस्सा लिंक एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं के लिए आवंटित होने की उम्मीद है।प्रदेश में—

निर्माणाधीन लिंक एक्सप्रेस-वेऔर प्रस्तावित नए एक्सप्रेस-वेके लिए धनराशि की व्यवस्था की जाएगी, जिससे कनेक्टिविटी को नई रफ्तार मिले।इसके साथ ही डिफेंस कॉरिडोर में आधारभूत ढांचे के विकास और भूमि अधिग्रहण के लिए भी बजट में प्रावधान किया जाएगा।उद्योगों को सब्सिडी, निवेश पर ज़ोरयोगी सरकार प्रदेश में औद्योगिक निवेश को गति देने के लिए लगातार प्रयासरत है।आगामी ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (GBC) को देखते हुए—

नए उद्योगों को दी जाने वाली सब्सिडीऔर विभिन्न औद्योगिक नीतियों के तहत प्रोत्साहन के लिए अनुपूरक बजट में अतिरिक्त धन का इंतजाम किया जाएगा।

वंदे मातरम के 150 वर्ष: सदन में राष्ट्रवाद पर विमर्शअनुपूरक बजट के बाद विधानसभा में एक विशेष प्रस्ताव लाया जाएगा, जिसमें यह स्मरण किया जाएगा कि 7 नवंबर 2025 को ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे हुए।कार्यसूची के अनुसार, सदन यह मानेगा कि—“

वंदे मातरम भारत की राष्ट्रीय पहचान, एकता और सांस्कृतिक चेतना के विकास का प्रतीक रहा है।”इस विषय पर लगभग चार घंटे की चर्चा होने की संभावना है। इससे पहले संसद के दोनों सदनों—

लोकसभा और राज्यसभा—

में भी इसी अवसर पर चर्चा हो चुकी है।सपा की रणनीति: कफ सिरप पर प्रदर्शन इन तमाम सरकारी कार्यक्रमों के बीच समाजवादी पार्टी ने भी अपनी सियासी तैयारी पूरी कर ली है।सपा कफ सिरप मामले को लेकर—विधानसभा के भीतरऔर बाहर प्रदर्शन की रणनीति पर काम कर रही है।

सत्र के पहले दिन भी सपा ने इस मुद्दे पर विरोध जताया था, जिसके बाद सीएम योगी और अखिलेश यादव के बीच तीखा वाक्युद्ध देखने को मिला था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि—“जहां सरकार विकास और राष्ट्रवाद के एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहती है, वहीं विपक्ष सरकार को कानून-व्यवस्था और कथित घोटालों के मुद्दे पर घेरने की कोशिश में है।”

निष्कर्ष:

सदन में विकास, विमर्श और विरोध—तीनों साथआज का दिन उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए केवल बजट या चर्चा तक सीमित नहीं है। यह—

सरकार की विकास प्राथमिकताओं राष्ट्रवादी विमर्श और विपक्ष की राजनीतिक आक्रामकता—

तीनों की एक साथ परीक्षा है।अब देखना यह होगा कि अनुपूरक बजट सरकार की योजनाओं को कितनी रफ्तार देता है और वंदे मातरम पर चर्चा सदन को किस दिशा में ले जाती है, या फिर सियासी हंगामा इन दोनों एजेंडों पर भारी पड़ता है।

NSK

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *