अब हर सोमवार ‘मेट्रो डे’ : दिल्ली में सरकारी अफसर छोड़ेंगे कार, मेट्रो से पहुंचेंगे दफ्तर, ईंधन संकट के बीच मोदी की अपील का असर, दिल्ली सरकार ने शुरू किया बड़ा अभियान

बी के झा

NSK

नई दिल्ली , 18 मई

देश की राजधानी दिल्ली में सोमवार अब केवल सप्ताह की शुरुआत नहीं, बल्कि ऊर्जा बचत और राष्ट्रीय जिम्मेदारी का प्रतीक बनेगा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi की ईंधन बचाने की अपील का असर अब राज्यों में साफ दिखाई देने लगा है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री Rekha Gupta सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए हर सोमवार को ‘मेट्रो डे’ घोषित कर दिया है।इस फैसले के तहत अब सोमवार को मंत्री, अधिकारी और सरकारी कर्मचारी निजी कारों से दफ्तर नहीं आएंगे, बल्कि मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करेंगे।

सरकार का मानना है कि इससे न केवल पेट्रोल-डीजल की खपत कम होगी, बल्कि जनता के बीच भी पब्लिक ट्रांसपोर्ट को लेकर सकारात्मक संदेश जाएगा।

सरकारी गाड़ियों पर ब्रेक, ईंधन खर्च में 20% कटौती का लक्ष्य

दिल्ली सरकार ने विभागीय वाहनों में पेट्रोल और डीजल की खपत में 20 प्रतिशत कटौती का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही ‘वर्क फ्रॉम होम’, कार्यालयों की नई टाइमिंग और ट्रैफिक प्रबंधन जैसे विकल्पों पर भी मंथन तेज हो गया है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता स्वयं आज मेट्रो से यात्रा कर इस अभियान की शुरुआत करेंगी। वह आईटीओ मेट्रो स्टेशन पहुंचकर “मेरा भारत, मेरा योगदान” और “मेट्रो सोमवार” अभियान को जनता के बीच बढ़ावा देंगी।

DMRC की बड़ी तैयारी, सोमवार को चलेंगी अतिरिक्त मेट्रो सेवाएं

Delhi Metro Rail Corporation (DMRC) ने भी इस पहल को सफल बनाने के लिए कमर कस ली है। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए हर सोमवार जरूरत के अनुसार अतिरिक्त मेट्रो सेवाएं चलाई जाएंगी, ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

दिल्ली पुलिस भी अलर्ट मोड में

दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने भी सभी यूनिट्स और कार्यालयों को गैर-जरूरी सरकारी वाहनों के उपयोग में कटौती करने के निर्देश जारी किए हैं। जारी मेमोरेंडम में साफ कहा गया है कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए ईंधन बचत अब प्राथमिकता बन चुकी है।

दिल्ली से देश को संदेश

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दिल्ली का यह प्रयोग सफल रहा तो आने वाले दिनों में देश के अन्य बड़े शहर भी इसी मॉडल को अपना सकते हैं। बढ़ते प्रदूषण, ट्रैफिक जाम और ऊर्जा संकट के दौर में ‘मेट्रो डे’ केवल एक सरकारी फैसला नहीं, बल्कि भविष्य की जरूरत बनता जा रहा है।

यह पहल यह भी साबित करती है कि छोटे-छोटे बदलाव बड़े राष्ट्रीय हितों की दिशा तय कर सकते हैं।

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