बी के झा
NSK

लखनऊ/नई दिल्ली, 6 दिसंबर
अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण के बाद अब काशी और मथुरा को लेकर जारी विवादों पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान सियासी तापमान को और बढ़ा गया है। हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट 2025 में पूछे गए सवाल पर सीएम योगी ने बेझिझक कहा— “हम सभी जगह पहुंचेंगे… और पहुंच चुके हैं। हमारी विरासत पर गर्व की अनुभूति हर समाज को होनी चाहिए। इन्हीं भावों के साथ कार्य प्रारंभ हुए हैं।”यह बयान ऐसे समय आया है जब काशी में ज्ञानवापी परिसर को लेकर कोर्ट में कानूनी कार्यवाही चल रही है, जबकि मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि–शाही ईदगाह विवाद नए मोड़ पर है।अयोध्या पर बोले योगी—‘एक कलंक हट गया’सीएम योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर आंदोलन और उसके न्यायिक परिणामों पर अपनी संतुष्टि जाहिर करते हुए कहा—“
हम सुप्रीम कोर्ट के आभारी हैं कि तथ्य और प्रमाणों के आधार पर सर्वसम्मति से फैसला सुनाया। भारत के लोकतंत्र की खूबसूरती है कि पूरे देश ने इसे स्वीकार किया। आज विवादित ढांचा हटने का दिन ऐतिहासिक है, एक कलंक मिट गया।”उन्होंने आगे बताया कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद अब तक 24 करोड़ से अधिक श्रद्धालु अयोध्या पहुंच चुके हैं, जबकि त्योहारों पर यह संख्या 40 लाख तक पहुंच जाती है। उन्होंने इसे भारत की सांस्कृतिक शक्ति और सामाजिक एकता का उदाहरण बताया।मथुरा–काशी विवाद:
पृष्ठभूमि और वर्तमान स्थिति मथुरा कृष्णा जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर विवाद वर्षों पुराना है। हिंदू याचिकाकर्ताओं का दावा है कि मुगल बादशाह औरंगजेब ने 17वीं सदी में मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनवाई थी। काशी ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के सर्वे में ASI ने गुप्त “हिंदू मंदिर के अवशेष” जैसे संकेत मिलने की बात कही थी। यह मामला अभी कोर्ट में लंबित है।योगी के बयान को इन दोनों विवादों से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसने राजनीतिक विमर्श को नई दिशा दे दी है।
राजनीतिक विश्लेषकों की प्रतिक्रिया
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक अनुराग मिश्रा का कहना है,“योगी का यह बयान सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की उस धारा को मजबूत करता है जिसने 2024 और 2022 में बीजेपी को भारी लाभ दिया था। ‘सभी जगह पहुंचने’ वाला संदेश आगामी 2027 विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के दीर्घकालिक एजेंडे को रेखांकित करता है।”राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. रश्मि सिन्हा ने कहा,“यह सिर्फ धार्मिक भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि यह सत्ता के नैरेटिव को स्थायी दिशा देने की कोशिश है। काशी और मथुरा को लेकर आने वाले महीनों में तेज़ राजनीतिक गतिविधियाँ दिख सकती हैं।”
विपक्ष ने किया पलटवार सपा (समाजवादी पार्टी)सपा ने योगी के बयान को “चुनावी स्टंट” बताया। पार्टी के प्रवक्ता ने कहा—“जब बेरोजगारी, महंगाई, कानून-व्यवस्था चरम पर है, तब सरकार जानबूझकर जनता का ध्यान भटकाने के लिए धार्मिक मुद्दों को हवा दे रही है।”
कांग्रेस
कांग्रेस ने आरोप लगाया—“योगी आदित्यनाथ धर्म के नाम पर ध्रुवीकरण की राजनीति कर रहे हैं। अयोध्या के नाम पर वोट लेने के बाद अब काशी–मथुरा को आगे बढ़ाया जा रहा है।”टीएमसी और क्षेत्रीय दल कुछ अन्य दलों ने केंद्र और यूपी सरकार पर आरोप लगाया कि “भारतीय संविधान और गंगा-जमुनी तहज़ीब को क्षति पहुंचाने की कोशिश हो रही है।”
हिंदू संगठनों और धर्मगुरुओं की प्रतिक्रिया
हिंदू जागरण मंचसंस्था ने योगी के बयान का स्वागत करते हुए कहा—“काशी और मथुरा हिंदू अस्मिता के केंद्र हैं। सरकार इन स्थलों की मूल गरिमा बहाल करे, यह हमारा वर्षों से संकल्प रहा है।”कांची पीठ के एक धर्माचार्य
उन्होंने कहा—“अयोध्या, काशी और मथुरा हमारी सांस्कृतिक आत्मा के तीन स्तंभ हैं। ऐतिहासिक सत्य दुनिया के सामने आना चाहिए।”विहिप (विश्व हिंदू परिषद)विहिप नेताओं ने इसे “स्वाभाविक सांस्कृतिक पुनरुत्थान” बताया और कहा कि *“2025–2030 का दशक भारत की सभ्यतागत पहचान के पुनर्स्थापन का समय बनेगा।
विश्लेषण:
क्या यह 2027 की राजनीतिक पिच है?विशेषज्ञों का मानना है कि योगी का यह बयान केवल धार्मिक भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि राजनीतिक दूरगामी संदेश है।अयोध्या के बाद काशी और मथुरा का मुद्दा स्वाभाविक रूप से हिंदू मतदाता आधार को मजबूत कर सकता है। वहीं विपक्ष इसे ध्रुवीकरण बताकर काउंटर नैरेटिव तैयार करने में जुट सकता है।
निष्कर्ष
योगी आदित्यनाथ के बयान ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को एक बार फिर सांस्कृतिक विमर्श के केंद्र में ला दिया है।अयोध्या से शुरू हुई यात्रा अब काशी और मथुरा की ओर बढ़ती दिख रही है।आने वाले महीनों में यह मुद्दा कानूनी, सामाजिक और राजनीतिक तीनों मोर्चों पर बड़ा असर डाल सकता है।
