ऐसे तो अराजकता फैल जाएगी” — सीजेआई बी.आर. गवई पर जूता फेंकने की घटना पर बोलीं उनकी मां कमलताई गवई, कहा — यह संविधान पर हमला है, ऐसे कृत्य देश को बदनाम करते हैं

बी के झा

NSK

अमरावती /नई दिल्ली, 8 अक्टूबर

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई पर एक वकील द्वारा जूता फेंकने की कोशिश की घटना ने देशभर में सनसनी फैला दी है। इस प्रकरण पर अब सीजेआई गवई की मां 84 वर्षीय कमलताई गवई ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस घटना को न केवल व्यक्तिगत हमला बताया, बल्कि भारतीय संविधान पर सीधा प्रहार करार दिया।अमरावती में पत्रकारों से बातचीत में भावुक कमलताई गवई ने कहा —मैं इस घटना की घोर निंदा करती हूं। यह सिर्फ मेरे बेटे पर हमला नहीं, बल्कि संविधान की गरिमा पर हमला है। भारतीय संविधान सभी को समान अधिकार देता है, लेकिन कुछ लोग कानून को अपने हाथ में लेकर अपमानजनक हरकत करते हैं, जिससे देश में अराजकता फैल सकती है। ऐसे कार्यों से हमें बचना चाहिए।”उन्होंने आगे कहा कि हर नागरिक को अपनी बात कहने का अधिकार है, लेकिन वह अधिकार शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से प्रयोग किया जाना चाहिए।“यह जहरीली विचारधारा का हिस्सा है”कमलताई ने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक खतरनाक विचारधारा का हिस्सा है जिसे फैलने से पहले रोकना होगा। उन्होंने कहा —हमारे देश की बुनियाद आपसी सम्मान और संयम पर टिकी है। जो लोग संविधान के खिलाफ जाकर काम करेंगे, उन्हें कठोर दंड मिलना चाहिए। इस देश में कानून सर्वोपरि है, किसी व्यक्ति या विचार से ऊपर नहीं।”उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के आदर्शों का स्मरण करते हुए कहा कि “बाबासाहेब अंबेडकर ने हमें ‘जियो और जीने दो’ का सिद्धांत सिखाया था। किसी को भी देश में अशांति फैलाने या धार्मिक टकराव पैदा करने का अधिकार नहीं है।”क्या है पूरा मामलायह घटना उस समय हुई जब सीजेआई गवई सुप्रीम कोर्ट में एक केस की सुनवाई कर रहे थे। एडवोकेट राकेश किशोर नामक वकील ने अचानक उनकी ओर जूता उछाल दिया। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की सतर्कता से जूता उन तक नहीं पहुंच सका। तत्काल सुरक्षाकर्मियों ने वकील को काबू में लेकर बाहर निकाल दिया।बाहर निकलते वक्त राकेश किशोर ने नारे लगाए —सनातन का अपमान नहीं सहेंगे।”माना जा रहा है कि यह नारा सीजेआई गवई की खजुराहो की विष्णु प्रतिमा से जुड़े एक मामले में की गई टिप्पणी के विरोध में लगाया गया था।धर्मगुरुओं और संगठनों की प्रतिक्रियामुख्य न्यायाधीश की मां कमलताई के बयान पर कई हिन्दू संगठनों और धर्मगुरुओं ने प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि —कमलताई गवई देश की सम्मानित महिला हैं, लेकिन उन्हें यह बयान देने से पहले यह भी सोचना चाहिए था कि उनके पुत्र ने सुप्रीम कोर्ट की गरिमा के साथ-साथ करोड़ों हिन्दुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी की थी। पुत्र मोह में किसी का पक्ष लेना उचित नहीं है।”संगठनों ने यह भी कहा कि सीजेआई जैसे उच्च पद पर बैठे व्यक्ति को धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखते हुए बोलना चाहिए, ताकि समाज में विभाजन की स्थिति न बने।वकीलों का विरोध प्रदर्शनइधर, अमरावती जिला अधिवक्ता संघ ने सुप्रीम कोर्ट की इस घटना की कड़ी निंदा की है। मंगलवार को सैकड़ों वकील जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर एकत्र हुए और दोषी एडवोकेट के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। वकीलों ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा के साथ खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।समापन टिप्पणीकमलताई गवई का यह बयान उस समय आया है जब देश में न्यायपालिका और आस्था से जुड़े मुद्दों पर बहस तेज़ है। एक ओर संविधान और कानून की सर्वोच्चता की बात की जा रही है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक भावनाओं को लेकर नाराजगी भी उभर रही है।कमलताई का संदेश साफ है —संविधान की मर्यादा ही इस देश की आत्मा है, इसे ठेस पहुंचाना अपने देश को कमजोर करना है।”

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