जंतर-मंतर आंदोलन पर नए सवाल: विदेशों से खाने की डिलीवरी, विदेशी फंडिंग के आरोप, हाईकोर्ट में याचिका; आंदोलन की दिशा और मंशा पर छिड़ी नई बहस

बी के झा

नई दिल्ली, 23 जुलाई

नीट पेपर लीक को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आंदोलन अब केवल छात्र विरोध प्रदर्शन नहीं रह गया है। आंदोलन के बीच अब विदेशी देशों से कथित तौर पर खाने की डिलीवरी, विदेशी फंडिंग के आरोप, सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत में गतिरोध, हाईकोर्ट में जनहित याचिका तथा कानून-व्यवस्था से जुड़े नए घटनाक्रमों ने इस पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का ऐलान किया है, जबकि दूसरी ओर दिल्ली हाईकोर्ट विदेशी फंडिंग और एनआईए जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है।

विदेशों से भी पहुंच रहा खाना, सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो

पिछले कुछ दिनों से जंतर-मंतर पर एक अलग तस्वीर देखने को मिल रही है। फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म के माध्यम से देशभर से प्रदर्शनकारियों के लिए लगातार भोजन और पानी भेजा जा रहा है। कई वीडियो में डिलीवरी कर्मियों ने दावा किया कि कुछ ऑर्डर कतर, दुबई और बांग्लादेश से किए गए थे। एक वीडियो में दावा किया गया कि दुबई से लगभग 2,000 फूड पैकेट अलग-अलग खेप में भेजे गए।हालांकि, इन वीडियो और दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि ऑर्डर विदेशों में रहने वाले भारतीयों ने किए थे या अन्य व्यक्तियों ने। इस संबंध में किसी सरकारी एजेंसी ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

बताया जा रहा है कि जरूरत से अधिक भोजन पहुंचने के बाद स्वयं सीजेपी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपील की कि अनावश्यक रूप से अतिरिक्त भोजन न भेजा जाए ताकि खाद्य सामग्री व्यर्थ न जाए।

सरकार से बातचीत पर भी बना गतिरोध

सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार ने आंदोलनकारी पक्ष को बातचीत जारी रखने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन सीजेपी नेतृत्व ने इसे स्वीकार नहीं किया। प्रधानमंत्री द्वारा पेपर लीक मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने और कठोर कार्रवाई की घोषणा के बाद भी संगठन ने अपनी प्रमुख मांग—केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे—को दोहराया।सीजेपी के प्रवक्ता का कहना है कि केवल त्वरित अदालतों की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

निहंग सिखों और समर्थकों के बीच झड़प

गुरुवार को जंतर-मंतर पर उस समय तनाव का माहौल बन गया जब कुछ निहंग सिख वहां पहुंचे और कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ उनकी बहस हो गई। देखते ही देखते धक्का-मुक्की शुरू हो गई। मौके पर मौजूद दिल्ली पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को अलग किया, जिसके बाद स्थिति सामान्य हो गई।

विदेशी फंडिंग के आरोप पहुंचे अदालत

इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर मांग की गई है कि 20 जुलाई के संसद मार्च और पूरे आंदोलन की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से जांच कराई जाए।याचिका में आरोप लगाया गया है कि आंदोलन के पीछे विदेशी फंडिंग और सुनियोजित साजिश की संभावना की जांच आवश्यक है। अदालत ने याचिका पर सुनवाई करने की सहमति दी है। यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि ये आरोप फिलहाल न्यायिक विचाराधीन हैं और अभी किसी सक्षम न्यायालय द्वारा सिद्ध नहीं हुए हैं।

प्रधानमंत्री का संदेश—’युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने पेपर लीक मामलों में त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने तथा दोषियों को कठोर दंड दिलाने की घोषणा की। साथ ही संबंधित एजेंसियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए।

सुरक्षा के मद्देनज़र 16 मेट्रो स्टेशन बंद

दिल्ली में बढ़ती भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए डीएमआरसी ने राजधानी के 16 मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद रखा। हालांकि प्रमुख इंटरचेंज स्टेशनों पर यात्रियों को लाइन बदलने की सुविधा उपलब्ध कराई गई।

एक वरिष्ठ शिक्षाविद की टिप्पणी

इस पूरे घटनाक्रम पर एक वरिष्ठ शिक्षाविद ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर अपनी राय व्यक्त की। उनका कहना था:”आज सोनम वांगचुक और सीजेपी के कंधे पर बैठकर राहुल गांधी, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल जैसे विपक्षी नेता जिस प्रकार मोदी सरकार के खिलाफ जंतर-मंतर पर सक्रिय दिखाई दे रहे हैं, उससे यह संदेश जा रहा है कि आंदोलन अब केवल छात्रों के मुद्दे तक सीमित नहीं रहा।

उन्होंने आगे कहा—”छात्रों के बीच यदि वास्तव में आपराधिक मानसिकता वाले तत्व घुस आए हैं और राजधानी सहित अन्य शहरों में अव्यवस्था फैल रही है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

शिक्षाविद ने दावा किया—”हमने पहले भी पत्रकारों से कहा था कि यदि इस आंदोलन के पीछे विदेशी ताकतों की भूमिका होने के आरोप लगाए जा रहे हैं तो उनकी जांच होनी चाहिए। यदि विदेशों से भोजन या अन्य सहायता भेजे जाने के दावे सही हैं, तो संबंधित एजेंसियों को तथ्यों की पुष्टि करनी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा—”राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री आवास के बाहर दिए गए धरने सहित पूरे घटनाक्रम की भी यदि आवश्यकता हो तो निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए, ताकि तथ्य और आरोप अलग-अलग स्पष्ट हो सकें।

संपादकीय विश्लेषण

जंतर-मंतर का आंदोलन अब कई समानांतर बहसों का केंद्र बन चुका है—परीक्षा प्रणाली में सुधार, राजनीतिक हस्तक्षेप, कानून-व्यवस्था, कथित विदेशी सहयोग, लोकतांत्रिक विरोध और न्यायिक जांच।यदि विदेशी फंडिंग या किसी संगठित साजिश के आरोप लगाए जाते हैं, तो उनका सत्यापन केवल सक्षम जांच एजेंसियां और न्यायिक प्रक्रिया ही कर सकती हैं। उसी प्रकार यदि आंदोलन शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक अधिकारों के दायरे में है, तो उसकी भी संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

इस समय सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है कि आरोपों, प्रत्यारोपों और राजनीतिक बयानबाजी से ऊपर उठकर प्रत्येक तथ्य की निष्पक्ष, पारदर्शी और कानूनसम्मत जांच हो, ताकि करोड़ों विद्यार्थियों के मूल मुद्दे—परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और उनके भविष्य—से ध्यान न भटके।

NSK News

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