बी के झा
NSK

नई दिल्ली , 24 अक्टूबर —
देश के कई हिस्सों में ‘आई लव मोहम्मद’ पोस्टर विवाद के बाद अब यह मामला राजधानी दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) तक पहुंच गया है। बुधवार देर रात यूनिवर्सिटी कैंपस की कई दीवारों पर “I Love Mohammad” के पोस्टर और नारे दिखाई दिए, जिससे सुरक्षा एजेंसियों में हलचल मच गई।
सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन ने विवाद की आहट मिलते ही देर रात पोस्टर और नारों को तुरंत हटवा दिया। हालांकि, इससे पहले कुछ छात्रों ने इन पोस्टरों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डाल दीं, जो तेजी से वायरल हो गईं।
पोस्टर हटाए गए, जांच शुरूJNU प्रशासन ने सुबह होते ही पोस्टर हटवाए और सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया कि सीसीटीवी फुटेज के ज़रिए पोस्टर लगाने वालों की पहचान की जाए।
सुरक्षा अधिकारी ने बताया —कैंपस की कुछ दीवारों और साइनबोर्ड पर पेंट से ‘आई लव मोहम्मद’ लिखा गया था। मामला संवेदनशील है, इसलिए तुरंत कार्रवाई की गई।”इन पोस्टरों के हटाए जाने के बाद जेएनयू परिसर में चर्चा का माहौल गर्म हो गया है।
कई छात्र संगठनों ने इसे “सोची-समझी साजिश” बताया, जबकि कुछ ने कहा कि “धार्मिक भावना को भड़काने की कोशिश” की जा रही है।
यूपी और उत्तराखंड से दिल्ली तक फैला विवाद’आई लव मोहम्मद’ पोस्टरों की शुरुआत उत्तर प्रदेश के कानपुर से हुई थी, जहां इसे लेकर स्थानीय स्तर पर तनाव फैल गया था। उसके बाद उत्तराखंड में यह विवाद हिंसा में तब्दील हो गया। अब जब यही नारे दिल्ली के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में दिखाई दिए, तो माहौल और भी संवेदनशील हो गया है।इसके जवाब में कई जगहों पर “आई लव महादेव” के पोस्टर लगाकर दूसरे समुदाय के लोग अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इस पोस्टर वॉर ने धार्मिक ध्रुवीकरण की आशंका को और गहरा कर दिया है।
जेएनयू चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल
नवंबर के पहले सप्ताह में होने वाले जेएनयू छात्रसंघ चुनाव से ठीक पहले इस तरह की गतिविधियों ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है।
एबीवीपी से जुड़े जेएनयू स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष वैभव मीणा ने कहा —देश के कई राज्यों में हिंसा हो चुकी है। ऐसे नारे कैंपस में नहीं लिखने चाहिए। धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान है, लेकिन सार्वजनिक स्थलों पर ऐसी अभिव्यक्तियाँ सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचा सकती हैं।”
विशेषज्ञों ने जताई गहरी चिंता
राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे “सोच-समझकर की गई उकसावे की कोशिश” बताया है।
एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक ने कहा —हर चुनावी मौसम में अचानक ऐसे नारे क्यों सामने आते हैं? यूपी और उत्तराखंड में हाल की घटनाओं के बाद अब जेएनयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान को निशाना बनाना इस बात का संकेत है कि कहीं न कहीं कोई बड़ी साजिश चल रही है। सरकार और खुफिया एजेंसियों को इस पर गहराई से जांच करनी चाहिए।
उन्होंने आगे कहा —धार्मिक भावनाओं को भड़काकर देश को सांप्रदायिक तनाव की आग में झोंकने की कोशिश हो रही है। सवाल यह है कि आखिर ऐसे संगठित प्रयासों के पीछे कौन लोग हैं और उनका मकसद क्या है?”
प्रशासन सतर्क, लेकिन चिंता बरकरार
जेएनयू प्रशासन ने कहा है कि कैंपस में शांति और सौहार्द बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। साथ ही, किसी भी तरह की राजनीतिक या धार्मिक गतिविधि जो विश्वविद्यालय के माहौल को प्रभावित करे, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।दिल्ली पुलिस ने भी इस मामले की जानकारी ली है और सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ये पोस्टर रातोंरात कैंपस में कैसे लगाए गए और इसके पीछे कौन संगठन या समूह सक्रिय हैं।
संपादकीय दृष्टिकोण से
जेएनयू देश का बौद्धिक और लोकतांत्रिक संवाद का प्रतीक रहा है। लेकिन बार-बार इसे सांप्रदायिक और राजनीतिक विवादों की भट्टी में झोंकने की कोशिश न केवल इस संस्थान की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाती है, बल्कि युवाओं के बीच विभाजन की रेखा गहरी करती है।‘
आई लव मोहम्मद’ और ‘आई लव महादेव’ जैसे नारे भावनाओं के प्रतीक हो सकते हैं, लेकिन जब इनका इस्तेमाल राजनीतिक या सांप्रदायिक एजेंडे के लिए होने लगे, तो यह समाज के ताने-बाने को कमजोर करता है।
अब यह जिम्मेदारी न केवल प्रशासन की है बल्कि पूरे देश की कि शिक्षा के मंदिरों को सियासत और नफरत की दीवारों से दूर रखा जाए।
