बी के झा
NSK

नई दिल्ली, 1 दिसंबर
भारत के सबसे व्यस्त और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हवाई अड्डे—दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट—के ऊपर हाल में जो खतरा मंडराया, उसने राष्ट्रीय सुरक्षा और एविएशन सेक्टर दोनों के लिए गहरी चिंता पैदा कर दी है। संसद में नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू किंजरपु द्वारा दिए गए बयान ने यह साफ कर दिया है कि यह खतरा केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई बड़े हवाई अड्डे इससे प्रभावित हो चुके हैं।GPS स्पूफिंग—यानी नकली उपग्रह संकेत भेजकर नेविगेशन सिस्टम को गुमराह करना—आज वैश्विक एयरस्पेस के लिए सबसे बड़े साइबर-खतरों में से एक माना जा रहा है। और अब यह भारत के कई एयरपोर्ट्स के सिरहाने खड़ा है।IGI एयरपोर्ट पर क्या हुआ?—
सरकार ने सदन में बताई पूरी कहानीमंत्री नायडू के अनुसार:रनवे 10 के पास आने वाली कई उड़ानों ने GPS स्पूफिंग की शिकायत दर्ज की।उड़ानें GPS-आधारित अप्रोच पर थीं, जिससे नकली सिग्नल की वजह से इन्हें वैकल्पिक प्रक्रियाएं अपनानी पड़ीं।पारंपरिक (ग्राउंड-बेस्ड) नेविगेशन सिस्टम काम कर रहा था, इसलिए संचालन पर कोई बड़ा खतरा नहीं आया।सरकार ने तुरंत DGCA के एडवाइजरी सर्कुलर, SOP, और रियल-टाइम रिपोर्टिंग सिस्टम के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने का दावा किया है।लेकिन असल चिंता यहीं खत्म नहीं होती—
दिल्ली ही नहीं—देश के कई बड़े एयरपोर्ट पर भी स्पूफिंग की शिकायत सरकार ने स्वीकार किया कि नवंबर 2023 से अनिवार्य रिपोर्टिंग लागू करने के बाद कई बड़े एयरपोर्ट से GNSS हस्तक्षेप की रिपोर्टें मिली हैं:कोलकाता मुंबई हैदराबाद बैंगलोर अमृतसर चेन्नई यह सूची बताती है कि यह खतरा किसी एक शहर का नहीं, बल्कि भारत के पूरे एयरस्पेस सुरक्षा ढांचे के सामने तेजी से उभरती चुनौती है।स्पूफिंग का स्रोत खोजने के लिए हाई-लेवल एक्शनहाई-लेवल बैठक में सरकार ने वायरलेस मॉनिटरिंग ऑर्गनाइजेशन (WMO) को:DGCA और AAI द्वारा साझा किए गए अनुमानित स्पूफिंग लोकेशंस का विश्लेषण करने संदिग्ध स्रोतों की पहचान के लिए अधिक संसाधन लगानेका निर्देश दिया है।यह संकेत देता है कि स्थिति सतह से ज्यादा गंभीर और जटिल है। स्पूफिंग उपकरण अक्सर मोबाइल, पोर्टेबल और ढूंढने में बेहद कठिन होते हैं—इसलिए स्रोत खोजने का काम राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता बन गया है।सरकार की सुरक्षा रणनीति: ग्राउंड नेविगेशन से लेकर साइबर सुरक्षा तक मंत्री नायडू के अनुसार, भारत कई स्तरीय सुरक्षा कवच पर काम कर रहा है:
1. मिनिमम ऑपरेटिंग नेटवर्क (MON) तैयार रखा गया हैGPS या उपग्रह संकेत विफल होने परग्राउंड-बेस्ड रडाररेडियो नेविगेशन एड्सके जरिए विमानों को सुरक्षित गाइड किया जाता है। यह वैश्विक मानकों के अनुसार है।
2. साइबर सुरक्षा को लगातार अपग्रेड किया जा रहाएयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया:एडवांस साइबर सुरक्षा उपकरण नेटवर्क हार्डनिंगअनधिकृत सिग्नल डिटेक्शन सिस्टमका इस्तेमाल कर रही है, NCIIPC और CERT-In के दिशानिर्देशों के तहत।
3. अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म्स पर भारत सक्रिय क्योंकि यह खतरा सीमा पार से भी उत्पन्न हो सकता है, भारत वैश्विक निगरानी और सहयोग मंचों में भी शामिल है।GPS स्पूफिंग क्या है और क्यों बेहद खतरनाक है?GPS स्पूफिंग एक ऐसा साइबर हमला है, जिसमें—असली उपग्रह संकेत की नकल उससे अधिक ताकत का नकली संकेतऔर नेविगेशन सिस्टम को भ्रमित करने का प्रयास किया जाता है।
विमानों में ऑटो पायलट से लेकर अप्रोच सिस्टम तक कई प्रक्रियाएं GPS पर निर्भर होती हैं।स्पूफिंग की स्थिति में विमान:गलत दिशा में मुड़ सकता है गलत ऊंचाई दिखा सकता है रनवे से अलग पथ पकड़ सकता है जिससे दुर्घटना की संभावना बढ़ जाती है।भारत को यह समस्या विदेशी अभियानों में भी झेलनी पड़ी—
म्यांमार में राहत कार्य के लिए भेजे गए सैन्य विमानों को मार्च 2024 में इसी प्रकारकी बाधा का सामना करना पड़ा था।विश्लेषण: क्या यह भारत के एयरस्पेस के खिलाफ संगठित साइबर हमला है?कुछ रक्षा विशेषज्ञों का मानना है:यह गतिविधि स्थानीय गुंडागर्दी नहीं, बल्कि उन्नत तकनीक वाले समूहों या विदेशी स्रोतों का संकेत हो सकती है।GPS स्पूफिंग अक्सर जियो पॉलिटिकल तनाव, सीमा क्षेत्रों, या रेकॉनिसेंस गतिविधियों से जुड़ी होती है।लगातार कई एयरपोर्ट पर घटनाएं मिलना “पैटर्न” की ओर इशारा करता है।भारत की ओर से WMO, DGCA और AAI का नया सक्रिय होना इस खतरे के स्तर को खुद ही रेखांकित करता है।
निष्कर्ष:
भारत का आसमान सुरक्षित है—पर खतरे बड़े और बदलते हुए हैं सरकार ने साफ कहा है कि—उड़ानों पर अभी तक कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ा पारंपरिक सिस्टम के कारण नेविगेशन सुरक्षित रहा साइबर सुरक्षा को लगातार अपग्रेड किया जा रहा है लेकिन तथ्य यह भी है कि GPS स्पूफिंग एक ऐसा खतरा है जिसका कोई एक समाधान नहीं—
बल्कि निरंतर सतर्कता, नवीन तकनीकों और मजबूत निगरानी तंत्र की आवश्यकता है।भारत के लिए यह चेतावनी है कि:आने वाले समय में युद्ध केवल ज़मीन या आकाश में नहीं, सिग्नल और साइबर स्पेस में भी लड़े जाएंगे—और हवाई सुरक्षा इसका मुख्य केंद्र बनेगी।
