बी के झा
पटना (फतुहा) / न ई दिल्ली, 31 जनवरी
बिहार में ज़मीन सिर्फ संपत्ति नहीं, बल्कि अक्सर खूनखराबे की वजह बन जाती है। राजधानी पटना के फतुहा थाना क्षेत्र के रसलपुर गांव से आई यह घटना इस कड़वी सच्चाई को एक बार फिर उजागर करती है, जहां महज दो इंच ज़मीन ने एक ही परिवार को लहूलुहान कर दिया।इस विवाद ने ऐसा भयावह रूप लिया कि एक युवक ने अपने ही रिश्तों पर गोलियां दाग दीं—चाची की मौके पर मौत, पड़ोसी की इलाज के दौरान जान गई और चचेरा भाई जिंदगी-मौत से जूझ रहा है।
सुबह की बहस, दोपहर तक दो अर्थियां
घटना शुक्रवार सुबह की है। गांव के लोग रोज़मर्रा के काम में लगे थे। किसी ने नहीं सोचा था कि पारिवारिक बातचीत देखते-देखते मौत का तांडव बन जाएगी।पुलिस के अनुसार, श्रवण प्रसाद और उनके सगे भाई राजकुमार प्रसाद के बीच लंबे समय से दो इंच जमीन को लेकर विवाद चला आ रहा था। शुक्रवार को इसी मुद्दे पर दोनों भाइयों में कहासुनी हो रही थी।इसी बीच राजकुमार प्रसाद का पुत्र शिवम कुमार मौके पर पहुंचा—और बातचीत को बंदूक की भाषा में बदल दिया।
जबड़े में लगी गोली, वहीं टूट गई सांस
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शिवम ने देसी कट्टे से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी।
पहली गोली राजमंत्री देवी (50 वर्ष) के जबड़े में लगी। उन्होंने वहीं दम तोड़ दिया।
दूसरी गोली उनके 24 वर्षीय बेटे राजन कुमार के हाथ में लगी।
तीसरी गोली पड़ोसी देवसागर सिंह (55 वर्ष) के सिर में लगी।
घायलों को आनन-फानन में फतुहा अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें पीएमसीएच रेफर किया गया। लेकिन इलाज के दौरान देवसागर सिंह की भी मौत हो गई।“मेरी मां जमीन की नहीं, शांति की बात कर रही थीं”घटना के प्रत्यक्षदर्शी और मृतका के बेटे जितेंद्र कुमार की आवाज़ कांप जाती है। वह कहते हैं—“मेरे पापा और चाचा बात कर रहे थे। कोई झगड़ा नहीं था। तभी शिवम आया और गोली चला दी। मेरी मां बीच-बचाव कर रही थीं… उन्हें ही मार दिया गया।”उनके शब्दों में सिर्फ दर्द नहीं, बल्कि यह सवाल भी है कि रिश्ते इतने सस्ते कब हो गए?
हथियारों का जखीरा, गुस्से की तैयारी?
घटना के बाद पुलिस ने आरोपित के घर से—दो देसी कट्टा,एक तलवार,और एक बाइक बरामद की है।
ग्रामीण एसपी कुंदन कुमार ने बताया कि इससे साफ है कि वारदात अचानक नहीं, बल्कि हिंसक मानसिकता और हथियारों की सहज उपलब्धता का नतीजा है।एफएसएल टीम ने घटनास्थल से नमूने जुटाए हैं और आरोपित की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।
गांव में तनाव, पुलिस का पहरादो मौतों के बाद रसलपुर गांव में सन्नाटा और तनाव है।मृतकों के घरों में कोहराम मचा है।पुलिस को आशंका है कि हालात बिगड़ सकते हैं, इसलिए गांव में कैंप किया गया है।
समाज के लिए आईना है यह वारदात
यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज की गहरी बीमारी को दिखाती है—ज़मीन विवाद पीढ़ियों तक खिंचते हैंपंचायत और संवाद की जगह हथियार ले लेते हैंऔर कानून तब पहुंचता है, जब लाशें गिर चुकी होती हैं।
सामाजिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार में ज़मीन विवाद आज भी हत्याओं का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है, और हथियारों की आसान उपलब्धता इसे और घातक बना देती है।सवाल जो रह जाएंगे।
क्या दो इंच ज़मीन की कीमत दो जानों से ज़्यादा थी?
क्या समय रहते प्रशासनिक या सामाजिक हस्तक्षेप होता तो यह खूनखराबा टल सकता था?
और सबसे बड़ा सवाल—क्या रिश्तों की कीमत अब रजिस्ट्री से भी कम हो गई है?
निष्कर्ष
फतुहा की यह घटना बताती है कि बिहार में जमीन का झगड़ा अब सिर्फ कागजों का मामला नहीं, बल्कि रिश्तों, भरोसे और इंसानियत का कत्ल बन चुका है।
जब तक विवाद सुलझाने के शांत रास्ते मजबूत नहीं होंगे, तब तक हर दो इंच जमीन पर किसी न किसी घर में मौत की लकीर खिंचती रहेगी।
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