बी के झा
NSK

गया / पटना, 17 दिसंबर
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार 17 दिसंबर को गया पहुंचकर दो दिवसीय उच्चस्तरीय प्रशासनिक कार्यशाला ‘मंथन-2025’ का उद्घाटन करेंगे। बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बीआईपीएआरडी) के गया परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम सरकार की उस सोच को दर्शाता है, जिसमें नीति निर्माण और जमीनी अमल के बीच की दूरी कम करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। लेकिन प्रशासनिक मंथन से पहले ही गया शहर में आम लोगों के लिए ट्रैफिक को लेकर एक तरह की कसौटी शुरू हो चुकी है।
क्या है ‘मंथन-2025’ और क्यों अहम है यह बैठक?सरकार के मुताबिक, ‘मंथन-2025’ का मूल उद्देश्य जिला-केंद्रित शासन व्यवस्था को मजबूत करना, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना और जिलों के सफल प्रयोगों को राज्यव्यापी नीति का हिस्सा बनाना है।कार्यशाला में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, अतिरिक्त मुख्य सचिव बी. राजेंदर समेत राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा लेंगे। उत्तरदायी शासन, व्यापार करने में आसानी, शहरी विकास की चुनौतियां, प्रभावी प्रशासन के कानूनी पहलू, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और आधारभूत संरचना जैसे विषयों पर गहन चर्चा प्रस्तावित है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह कार्यशाला केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी देती है। एक वरिष्ठ विश्लेषक कहते हैं,“लोकसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार यह संकेत देना चाहते हैं कि बिहार सरकार अब सिर्फ योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर फोकस कर रही है। ‘मंथन’ इसी छवि को मजबूत करने की कवायद है।”
स्थानीय प्रशासन तैयार, लेकिन जनता की चिंता ट्रैफिक को लेकर
मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर गया जिला प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात को लेकर व्यापक तैयारियां की हैं। जिला जनसंपर्क अधिकारी दीपक कुमार देव के अनुसार, सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रतिबंध और डायवर्जन लागू रहेगा।
कहां रहेगा ट्रैफिक बंद या डायवर्ट?
घुघरीटांड बाईपास से अधिकारी प्रशिक्षण अकादमी (गेट नंबर-5) होते हुए बोधगया डोमुहान तक वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित।डोमुहान की ओर जाने वाले वाहन घुघरीटांड बाईपास से नदी किनारे वाली सड़क का उपयोग करेंगे।सिकारिया मोड़ से डोमुहान जाने वाले वाहन मगध मेडिकल और चेरकी रोड के रास्ते डायवर्ट किए जाएंगे।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया: ‘
मंथन ठीक है, लेकिन परेशानी भी समझिए’शहर के आम नागरिकों की राय मिली-जुली है।डोमुहान क्षेत्र के एक दुकानदार कहते हैं,“मुख्यमंत्री आ रहे हैं, यह गर्व की बात है। लेकिन हर बार ट्रैफिक बंद होने से रोजमर्रा के कामकाज पर असर पड़ता है।
प्रशासन को आम लोगों की सुविधा का भी ध्यान रखना चाहिए।”
वहीं, एक ऑटो चालक का कहना है,“डायवर्जन की जानकारी पहले मिल जाए तो दिक्कत कम हो। अचानक रास्ता बंद होता है तो सवारी भी नाराज होती है।”
विपक्ष का तंज: ‘
मंथन कम, प्रदर्शन ज्यादा’
विपक्षी दलों ने इस कार्यक्रम को लेकर सवाल भी उठाए हैं। राजद के एक स्थानीय नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा,“सरकार हर साल मंथन करती है, लेकिन जमीनी हकीकत वही रहती है—
सड़कों की हालत, बेरोजगारी और स्वास्थ्य व्यवस्था जस की तस। मंथन तभी सार्थक है जब उसका असर दिखे।”कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रशासनिक कार्यशालाओं से ज्यादा जरूरी है कि जिलों की समस्याओं का समाधान फाइलों से बाहर निकलकर हो।
निष्कर्ष:
शासन पर मंथन, शहर की परीक्षा‘मंथन-2025’ निश्चित तौर पर बिहार की प्रशासनिक दिशा तय करने की एक महत्वपूर्ण पहल है। जहां सरकार इसे सुशासन के अगले चरण के रूप में पेश कर रही है, वहीं आम जनता और विपक्ष इसकी उपयोगिता को जमीनी परिणामों से जोड़कर देख रहा है।
गया के लिए यह दो दिन प्रशासनिक चिंतन के साथ-साथ यातायात प्रबंधन की परीक्षा भी हैं। अब देखना यह होगा कि यह मंथन केवल सभागार तक सीमित रहता है या सचमुच बिहार की शासन व्यवस्था में ठोस बदलाव की नींव रखता है।
