बी के झा
NSK

कोलकाता, 2 मई
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के एग्जिट पोल ने सियासी पारे को चरम पर पहुंचा दिया है। हर दल अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहा है, आंकड़ों की बाज़ीगरी चल रही है, और इसी बीच क्रिकेट के मैदान से राजनीति के मैदान तक अपनी सधी हुई सोच के लिए मशहूर Sourav Ganguly ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरे विमर्श को नई दिशा दे दी है।उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा—“न तो ममता दीदी, न मोदी जी, और न ही मां दुर्गा… कोई भी इन चुनावों के नतीजों का सटीक अनुमान नहीं लगा सकता।”
अनिश्चितता का ‘बंगाल मॉडल’
गांगुली का यह बयान केवल एक हल्की टिप्पणी नहीं, बल्कि लोकतंत्र की उस सच्चाई को उजागर करता है, जहां अंतिम फैसला जनता के हाथ में होता है—और वह भी आखिरी पल तक रहस्य बना रहता है।पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि एग्जिट पोल के आधार पर नतीजों का अनुमान लगाना मुश्किल है।“जब मतपेटियां खुलेंगी, तभी असली तस्वीर सामने आएगी,” उन्होंने दो टूक अंदाज़ में कहा।
एग्जिट पोल: आंकड़ों की जंग, सच्चाई की तलाश
बंगाल के एग्जिट पोल इस बार बेहद दिलचस्प और विरोधाभासी तस्वीर पेश कर रहे हैं।कुछ सर्वेक्षणों में Narendra Modi की पार्टी भाजपा को निर्णायक बढ़त या बहुमत मिलता दिख रहा है।वहीं, दूसरी ओर Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में वापसी के दावे भी मजबूत नजर आ रहे हैं।
पीपुल्स प्लस के अनुसार:टीएमसी: 177–187 सीटें
बीजेपी: 95–110 सीटें
जनमत पोल्स का अनुमान:टीएमसी: 195–205
बीजेपी: 80–90
पोल डायरी की भविष्यवाणी:बीजेपी: 142–171 (संभावित बहुमत)
टीएमसी: 99–127 इन आंकड़ों से साफ है कि हर एजेंसी की अपनी अलग कहानी है—और यही अनिश्चितता बंगाल चुनाव को और रोचक बना रही है।
294 सीटों का महासंग्राम
पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में मतदान संपन्न हो चुका है। पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर वोटिंग हुई, जबकि दूसरे और अंतिम चरण के साथ यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया पूरी हो गई।अब सबकी नजरें मतगणना के दिन पर टिकी हैं—जब यह तय होगा कि बंगाल की सत्ता पर किसका परचम लहराएगा।
गांगुली का संदेश: धैर्य ही असली रणनीति
क्रिकेट के मैदान पर अपने आक्रामक अंदाज के लिए मशहूर गांगुली ने इस बार बेहद संयमित और संतुलित रुख अपनाया। उनका संदेश साफ है—लोकतंत्र में आखिरी फैसला जनता का होता है, न कि एग्जिट पोल का।
अंतिम सवाल: आंकड़े या हकीकत?
एग्जिट पोल भले ही सियासी माहौल को गर्म कर दें, लेकिन वे अंतिम सत्य नहीं होते।बंगाल की जनता ने किसे चुना है—यह रहस्य अब भी बंद मतपेटियों में कैद है।
और शायद यही वजह है कि गांगुली की ‘गुगली’ सबसे सटीक बैठती है—“नतीजे वही होंगे, जो जनता ने तय किए हैं… बाकी सब अनुमान है।”
