बाबर के नाम पर बनी इमारत का वही हाल होगा,” उमा भारती की कड़ी चेतावनी से बंगाल की सियासत में हलचल तेज

बी के झा

NSK

नई दिल्ली / भोपाल/ कोलकाता, 29 नवंबर

TMC विधायक के ‘बाबरी मस्जिद निर्माण’ बयान पर BJP का हमला, राजनीतिक विश्लेषकों ने बताया—खतरनाक वक्तव्य युद्ध पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के विधायक हुमायूं कबीर के उस बयान ने राज्य की राजनीति में तूफान ला दिया है, जिसमें उन्होंने मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में 6 दिसंबर को ‘बाबरी मस्जिद निर्माण’ की बात कही थी।अब इस बयान पर राम जन्मभूमि आंदोलन की प्रख्यात नेत्री और पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने ममता बनर्जी सरकार को सीधी चेतावनी दी है।उन्होंने साफ कहा:खुदा और इबादत के नाम पर मस्जिद बने हम सम्मान करेंगे, लेकिन बाबर के नाम पर बनी इमारत का वही हाल होगा जो 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में हुआ था।”उनका यह बयान आते ही बंगाल की राजनीति में नया भूचाल आ गया है।

क्या कहा था TMC विधायक हुमायूं कबीर ने?कुछ दिन पहले एक धार्मिक कार्यक्रम में बोलते हुए कबीर ने कहा था:“6 दिसंबर को बेलडांगा (मुर्शिदाबाद) में बाबरी मस्जिद बनाई जाएगी।”“इसमें बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक धर्मगुरु शामिल रहेंगे।”उनका दावा था कि मुस्लिम समाज “इंसाफ” के प्रतीक के रूप में इस कदम को देखेगा।राजनीतिक हलकों में यह बयान आग की तरह फैल गया और BJP ने TMC पर “देश को सांप्रदायिक आग में झोंकने” का आरोप लगाया।

उमा भारती का तीखा हमला: “ममता जिम्मेदारी लें, कार्रवाई करें”अयोध्या आंदोलन की अग्रणी नेता उमा भारती ने कहा:बाबर भारत का शत्रु था, आक्रांता था। उसके नाम की मस्जिद बनाने का प्रयास देश की अस्मिता पर हमला है।ममता बनर्जी जी कार्रवाई करें—यह आपकी जिम्मेदारी है।”उन्होंने यह भी कहा:1947 हो या 1992—देश की धरोहर और सांस्कृतिक सम्मान पर हमला करने वालों को इतिहास भूलना नहीं चाहिए।कारसेवक क्या करते हैं, दुनिया जानती है।”उनका संकेत बेहद स्पष्ट था—“बाबर के नाम पर किसी निर्माण की कोशिश होगी तो जनता वैसा ही जवाब देगी जैसा 1992 में दिया था।

राजनीतिक विश्लेषकों की राय: ‘खतरनाक शब्दयुद्ध’कई वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषकों ने इस विवाद को राजनीतिक ध्रुवीकरण का सबसे खतरनाक संकेत बताया है।उनके अनुसार:

1. TMC विधायक का बयान—कानूनी रूप से असंभव, राजनीतिक रूप से उत्तेजकभारत के किसी भी हिस्से में “बाबरी मस्जिद पुनर्निर्माण” का दावा कानूनी रूप से कोई आधार नहीं रखता।ऐसा बयान देकर TMC के अल्पसंख्यक नेता ध्रुवीकरण की रणनीति पर काम करते दिखते हैं, खासकर 2026 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए।

2. उमा भारती की टिप्पणी—BJP के लिए भावनात्मक मुद्दे को पुनर्जीवित करने का अवसर विशेषज्ञों का कहना है कि:“अयोध्या” और “बाबर” जैसे शब्द BJP की वैचारिक राजनीति के केंद्र में हैं।उमा भारती जैसे पुराने आंदोलनकारियों का आगे आना बताता है कि BJP इस मुद्दे को चुनावी नैरेटिव बनाना चाहती है।

3. दोनों तरफ से बयान—सड़क पर तनाव बढ़ा सकते हैंविश्लेषकों का मानना है कि:बंगाल पहले से साम्प्रदायिक फॉल्टलाइन पर खड़ा है। ऐसे बयान सीधे-सीधे सामाजिक तनाव को हवा दे सकते हैं।दोनों पार्टियों को शब्दों की जिम्मेदारी समझनी चाहिए।”

तृणमूल कांग्रेस की प्रतिक्रिया: ‘BJP भ्रम फैलानाचाहती है’TMC ने उमा भारती के बयान को “अनावश्यक उकसावे” वाला बताया है।

TMC सूत्रों और पार्टी नेताओं ने कहा:“हुमायूं कबीर ने जो कहा, वह पार्टी की आधिकारिक लाइन नहीं है।”“बाबरी मस्जिद का मामला अदालत में निपट चुका है। पुनर्निर्माण का सवाल ही नहीं।”“BJP बंगाल में दंगे का माहौल बनाना चाहती है।”कुछ नेताओं ने यह भी कहा कि हुमायूं कबीर का बयान राजनीतिक अपरिपक्वता का उदाहरण है और पार्टी उसे गंभीरता से नहीं लेती।

ममता बनर्जी पर बढ़ा दबाव

उमा भारती ने ममता को नाम लेकर चेतावनी दी है, जिससे—कानून-व्यवस्था मुस्लिम वोट-बैंक केंद्र-राज्य संबंध तीनों मोर्चों पर दबाव बढ़ गया है।

BJP लगातार यह दावा भी कर रही है कि—ममता अल्पसंख्यक तुष्टिकरण में इतनी डूबी हैं कि देश की संवैधानिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता की परवाह नहीं करतीं।”

क्या बढ़ सकती है राजनीतिक गर्मी?विश्लेषकों के अनुसार:बंगाल की सियासत तेज़ी से धार्मिक ध्रुवीकरण के रास्ते पर जा रही है।TMC के भीतर भी विधायक के बयान से असहजता है।BJP इसे 2026 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है।उधर, मुस्लिम संगठनों में भी विधायक के बयान के बाद हलचल है, लेकिन कई मौलाना इसे “भावनात्मक बयान, व्यावहारिक नहीं” करार दे रहे हैं।

निष्कर्ष

TMC विधायक के “बाबरी मस्जिद निर्माण” वाले बयान ने बंगाल की सियासत में आग लगा दी है।उमा भारती की तीखी चेतावनी ने इसे राष्ट्रीय स्तर का विवाद बना दिया है।अब पूरा देश देख रहा है—ममता बनर्जी इस विवाद पर क्या कदम उठाती हैं?क्या TMC अपने विधायक पर कार्रवाई करेगी?या विवाद को शांत करने के लिए कोई मध्य मार्ग निकालेगी?

आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीतिक तापमान और भी बढ़ने वाला है।

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