बी के झा
NSK

पटना/ न ई दिल्ली, 18 मई
बिहार की धरती पर रविवार को उद्योग, राजनीति, रोजगार और सामाजिक विकास का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने राज्य की भावी तस्वीर को लेकर नई बहस छेड़ दी है। देश के चर्चित उद्योगपति और Adani Group के चेयरमैन Gautam Adani ने बिहार में अगले तीन से चार वर्षों के भीतर 50 से 60 हजार करोड़ रुपये तक निवेश करने की इच्छा जताकर राज्य की आर्थिक और राजनीतिक हलचल को तेज कर दिया है।सारण जिले के परसा प्रखंड स्थित मस्तीचक गांव में नेत्र चिकित्सालय एवं प्रशिक्षण केंद्र के भूमि पूजन कार्यक्रम में पहुंचे गौतम अडानी ने न केवल बिहार की मेहनतकश पहचान की खुलकर सराहना की, बल्कि यह भी कहा कि “बिहारी होना गर्व की बात है।
”उनके इस बयान ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच उत्साह भर दिया, वहीं राजनीतिक गलियारों में भी नई चर्चाओं को जन्म दे दिया।“बिहार का युवा अब पलायन नहीं, अपने घर में रोजगार चाहता है”गौतम अडानी ने कहा कि बिहार की सबसे बड़ी ताकत यहां के लोग हैं, जो मेहनती, संघर्षशील और मजबूत इच्छाशक्ति वाले हैं। उन्होंने कहा कि उनकी सोच यह है कि बिहार का युवा रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में भटकने को मजबूर न हो, बल्कि उसे अपने ही राज्य में काम और सम्मान मिले।
उन्होंने कहा कि अडानी समूह की प्राथमिकता केवल उद्योग लगाना नहीं, बल्कि बिहार में सामाजिक आधारभूत संरचना को मजबूत करना भी है। इसके तहत स्कूल, विश्वविद्यालय, अस्पताल और स्वास्थ्य संस्थान विकसित करने की योजना बनाई जा रही है।उन्होंने जोर देकर कहा कि “हर बिहारी को बिहार में ही रोजगार मिले” और “हर घर तक सस्ती बिजली पहुंचे”, इसी सोच के साथ समूह राज्य में निवेश बढ़ा रहा है।
बिहार में शिक्षा, स्वास्थ्य और ऊर्जा पर फोकसमस्तीचक में बनने वाला नेत्र अस्पताल और प्रशिक्षण केंद्र लगभग 150 करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगा। यह परियोजना ग्रामीण और गरीब तबकों के लिए आंखों के इलाज की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।
गौतम अडानी ने कहा कि इस संस्थान के माध्यम से हर साल लगभग 3.3 लाख आंखों की सर्जरी संभव हो सकेगी, जबकि करीब 1000 हेल्थ प्रोफेशनल्स को प्रशिक्षित किया जाएगा।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना अपने घोषित स्वरूप में सफल होती है, तो बिहार ग्रामीण नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के बड़े मॉडल्स में शामिल हो सकता है।
पीरपैंती से बिजली, बिहार में उद्योग का विस्तार
अडानी समूह पहले से ही बिहार में कई बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहा है। भागलपुर के पीरपैंती में 2400 मेगावाट क्षमता वाला बिजली संयंत्र राज्य के सबसे बड़े निजी निवेशों में शामिल है।इसके अलावा सड़क निर्माण, मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स, गैस नेटवर्क और ऊर्जा परियोजनाओं को लेकर राज्य सरकार के साथ बातचीत जारी है।अडानी ने संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में बिहार औद्योगिक दृष्टि से पूर्वी भारत का बड़ा केंद्र बन सकता है।
सीएम सम्राट चौधरी से मुलाकात, राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे
सारण से लौटने के बाद गौतम अडानी ने मुख्यमंत्री Samrat Choudhary से लोक सेवा आवास में मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा करते हुए कहा कि अडानी समूह ने बिहार के विकास के लिए हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिया है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात केवल औद्योगिक निवेश तक सीमित नहीं, बल्कि आगामी चुनावी राजनीति और विकास की नई कथा गढ़ने का प्रयास भी हो सकती है।
विपक्ष का हमला : “बिहार को उद्योगपतियों के हाथ गिरवी रखा जा रहा”
जहां सत्ता पक्ष इस निवेश को “नए बिहार” की शुरुआत बता रहा है, वहीं विपक्ष ने इसे लेकर सरकार पर हमला तेज कर दिया है।Rahul Gandhi ने तंज कसते हुए कहा कि अब आर्थिक रूप से कमजोर राज्यों को भी “मोदी सरकार अपने उद्योगपति मित्रों के हवाले करने की तैयारी कर चुकी है।”विपक्षी दलों का आरोप है कि बड़े निवेश के नाम पर सरकारें कॉरपोरेट घरानों को विशेष सुविधाएं देती हैं, जबकि आम जनता महंगाई, बेरोजगारी और बुनियादी समस्याओं से जूझती रहती है।
विशेषज्ञों की राय : अवसर भी, चुनौती भी
अर्थशास्त्रियों और शिक्षाविदों का मानना है कि बिहार जैसे राज्य के लिए इतने बड़े निवेश का प्रस्ताव महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है, क्योंकि लंबे समय से राज्य को औद्योगिक पिछड़ेपन और पलायन की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि केवल निवेश की घोषणा पर्याप्त नहीं होती। असली परीक्षा यह होगी कि इन परियोजनाओं से स्थानीय युवाओं को कितना रोजगार मिलता है, छोटे व्यवसायों को कितना लाभ होता है और ग्रामीण इलाकों तक विकास की रोशनी कितनी पहुंचती है।
कानूनविदों ने भी भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और सामाजिक संतुलन जैसे मुद्दों पर पारदर्शिता बनाए रखने की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि बड़े निवेश तभी सफल माने जाएंगे जब विकास और सामाजिक न्याय दोनों साथ-साथ चलें।
बदलते बिहार की नई तस्वीर?
बिहार लंबे समय तक राजनीति, जातीय समीकरण और पलायन की चर्चा में घिरा रहा है। लेकिन अब उद्योग और निवेश की नई बहस राज्य की राजनीति को नया मोड़ देती दिखाई दे रही है।
गौतम अडानी का यह बयान कि “बिहारी होना गर्व की बात है” केवल एक भावनात्मक टिप्पणी नहीं, बल्कि बिहार की बदलती आर्थिक संभावनाओं की ओर इशारा भी माना जा रहा है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह निवेश वास्तव में बिहार के लाखों युवाओं के जीवन में रोजगार, विकास और सम्मान की नई रोशनी लेकर आएगा, या फिर यह भी केवल राजनीतिक और कॉरपोरेट घोषणाओं तक सीमित रह जाएगा।
