बिहार में 350 करोड़ के बालू घोटाले का सनसनीखेज खुलासा, खनन विभाग के डिजिटल सिस्टम में सेंध, एनआईसी कर्मियों से लेकर 17 जिलों के लाइसेंसधारी रडार पर

बी. के. झा

नई दिल्ली/ पटना, 7 जुन

बिहार में खनन व्यवस्था को लेकर अब तक के सबसे बड़े डिजिटल घोटालों में से एक का खुलासा हुआ है। राज्य के खनन एवं भूतत्व विभाग के ऑनलाइन सिस्टम में कथित सेंधमारी कर करीब 350 करोड़ रुपये मूल्य के बालू के अवैध कारोबार का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि खनन विभाग के “खनन सॉफ्ट” पोर्टल के साथ छेड़छाड़ कर बालू उठाव की निर्धारित सीमा को अवैध रूप से बढ़ाया गया और सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जांच के दायरे में अब राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के कुछ कर्मियों के साथ-साथ राज्य के 17 जिलों के 100 से अधिक लाइसेंसधारी कारोबारियों के आने की चर्चा है।

कैसे खेला गया करोड़ों का खेल?

जांच एजेंसियों के अनुसार पूरा खेल डिजिटल सिस्टम के भीतर सुरक्षा तंत्र को कमजोर कर अंजाम दिया गया। आरोप है कि कारोबारियों ने जिला खनन कार्यालय की स्वीकृति के बिना पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड किए और बालू उठाव की मात्रा में मनमाने तरीके से वृद्धि कर ली।आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की जांच में यह भी सामने आया है कि ओटीपी आधारित सुरक्षा व्यवस्था को निष्प्रभावी बना दिया गया था। इसके बाद डेटाबेस और सॉफ्टवेयर स्तर पर कथित छेड़छाड़ कर बड़े पैमाने पर अवैध ई-चालान जारी किए गए और बालू का कारोबार किया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल वित्तीय घोटाला नहीं बल्कि सरकारी डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

एक एफआईआर से खुला पूरा नेटवर्क

मामले का खुलासा तब हुआ जब विभागीय स्तर पर अनियमितताओं की शिकायत सामने आई। इसके बाद तत्कालीन खनन निरीक्षक मृत्युंजय कुमार झा द्वारा पटना साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई।जांच के दौरान यह पाया गया कि लाइसेंसधारियों को सीमित उपयोग के लिए उपलब्ध कराए गए लॉगिन और पासवर्ड का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। इसके माध्यम से तय सीमा से कहीं अधिक मात्रा में बालू की बिक्री और परिवहन किया गया।अब तक 17 जिलों में कुल 62 मामले दर्ज किए जा चुके हैं और आर्थिक अपराध इकाई की विशेष टीम पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।

प्रशासनिक तंत्र पर भी सवाल

घोटाले के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि डिजिटल सिस्टम में इतने बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ हुई तो उसकी भनक समय रहते विभाग को क्यों नहीं लगी?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल कुछ कारोबारियों तक सीमित नहीं हो सकता। यदि जांच निष्पक्ष और गहराई से हुई तो कई प्रशासनिक स्तरों पर जवाबदेही तय हो सकती है।

विपक्षी दलों ने भी पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि सरकारी खजाने को हुए नुकसान की भरपाई के साथ दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

बिहार की डिजिटल व्यवस्था के लिए चेतावनी

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला सरकारी पोर्टलों की साइबर सुरक्षा को लेकर भी बड़ा सबक है। यदि संवेदनशील विभागों के डेटा और प्रमाणीकरण प्रणाली को इतनी आसानी से प्रभावित किया जा सकता है तो भविष्य में इससे भी बड़े खतरे पैदा हो सकते हैं।

फिलहाल आर्थिक अपराध इकाई की जांच जारी है और आने वाले दिनों में कई बड़े नामों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

फैजल खान उर्फ खान सर मामले में नया मोड़: वकील बोले- ‘बदले की भावना से दर्ज हुई एफआईआर’

पटना चर्चित शिक्षक खान सर उर्फ फैजल खान के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को लेकर अब कानूनी लड़ाई तेज होती दिखाई दे रही है। उनके अधिवक्ता अरविंद कुमार मउआर ने दावा किया है कि खान सर को एक सुनियोजित साजिश के तहत मामले में फंसाया गया है और उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है।

क्या है बचाव पक्ष का तर्क?

वकील का कहना है कि 2 जून की घटना के बाद खान ग्लोबल स्टडीज की ओर से पहले दूसरे पक्ष के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। उसी के जवाब में दूसरी एफआईआर दर्ज कराई गई, जिसमें फैजल खान उर्फ खान सर का नाम भी जोड़ दिया गया।बचाव पक्ष का दावा है कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे सुरक्षा गार्डों ने आत्मरक्षा के उद्देश्य से हवाई फायरिंग की थी और इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।वकील ने कहा कि फैजल खान उर्फ खान सर के खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और अदालत में अग्रिम जमानत याचिका के माध्यम से उनका पक्ष रखा जाएगा।

पुलिस का पक्ष

दूसरी ओर पुलिस की जांच में गिरफ्तार किए गए सुरक्षा गार्डों से पूछताछ के बाद कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने का दावा किया गया है। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।इसी आधार पर फैजल खान उर्फ खान सर के खिलाफ भी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

कहां हैं फैजल खान उर्फ खान सर?

एफआईआर दर्ज होने के बाद से फैजल खान उर्फ खान सर सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उनके ठिकाने को लेकर विभिन्न प्रकार की चर्चाएं हैं, लेकिन आधिकारिक रूप से उनके वकील यही कह रहे हैं कि वे कानून के दायरे में रहकर न्यायिक प्रक्रिया का पालन करेंगे।

आगे क्या?

अब पूरे मामले की दिशा अदालत में दाखिल होने वाली अग्रिम जमानत याचिका, पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगी। यदि अदालत से राहत मिलती है तो फैजल खान उर्फ खान सर को तत्काल गिरफ्तारी से संरक्षण मिल सकता है, वहीं दूसरी स्थिति में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और तेज हो सकती है।

फिलहाल यह मामला बिहार के सबसे चर्चित कानूनी और शैक्षणिक विवादों में से एक बन चुका है, जिस पर छात्रों, अभिभावकों, राजनीतिक दलों और प्रशासन की नजरें टिकी हुई हैं।

NSK

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