भारत से माफी मांगो… और मुनीर को गिरफ्तार करो, पूर्व पेंटागन अधिकारी की दो-टूक, ट्रंप प्रशासन पर तीखा हमला

बी के झा

NSK News

वॉशिंगटन/नई दिल्ली, 6 दिसंबर

अमेरिका–भारत संबंधों में पिछले वर्ष से जिस तरह की तल्ख़ी और अविश्वास पनपा है, उसका असर अब अमेरिकी रणनीतिक विशेषज्ञों और पूर्व अधिकारियों के बयानों में साफ झलकने लगा है। पेंटागन के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी माइकल रुबिन ने भारत के प्रति ट्रंप प्रशासन के व्यवहार को ‘‘अपमानजनक’’ बताते हुए कहा है कि अमेरिका को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र—भारत—से माफी मांगनी चाहिए।रुबिन ने इतना ही नहीं, बल्कि अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को ‘रणनीतिक सहयोगी’ के रूप में देखने की नीति पर भी कड़े शब्दों में सवाल उठाते हुए कहा—“

अगर पाकिस्तानी आर्मी चीफ आसिम मुनीर अमेरिका आएं तो उनके स्वागत के बजाय उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेजा जाना चाहिए। पाकिस्तान को आतंकवाद का राज्य प्रायोजक घोषित करने का समय अब निकल चुका है।”यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत–अमेरिका संबंध बीते एक वर्ष में लगातार तनावपूर्ण राह पर चलते दिखाई दे रहे हैं।“

ट्रंप प्रशासन ने भारत के साथ दुर्व्यवहार किया”—रुबिनजॉर्ज डब्ल्यू. बुश प्रशासन में अहम भूमिका निभा चुके माइकल रुबिन ने एएनआई से बातचीत में साफ कहा—“संयुक्त राज्य अमेरिका ने भारत के साथ पिछले एक वर्ष में जिस तरह का दुर्व्यवहार किया है, उसके लिए उसे पर्दे के पीछे नहीं, बल्कि खुले तौर पर माफी मांगनी चाहिए। राष्ट्रपति ट्रंप माफी मांगने में विश्वास नहीं रखते, लेकिन एक व्यक्ति का अहंकार दुनिया के लोकतांत्रिक हितों से बड़ा नहीं हो सकता।”रुबिन का यह बयान कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा करने वाला है,

क्योंकि उन्होंने पहली बार इतने खुले और तीखे स्वर में ट्रंप प्रशासन की भारत नीति पर चोट की है।पाकिस्तान पर निशाना: “रणनीतिक साझेदारी की कोई तुक नहीं”रुबिन ने पाकिस्तान के प्रति अमेरिकी नीति को “नासमझी” करार देते हुए कहा—“अमेरिका का पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से अपनाना आतंकवाद के इतिहास को नज़रअंदाज़ करना है। पाकिस्तान दुनिया में आतंकवाद का सबसे बड़ा प्रायोजक है। इसे आतंकवाद का राज्य प्रायोजक घोषित करना अब अनिवार्य हो चुका है।

”उन्होंने हैरानी जताई कि अमेरिका ने

मई 2025 में भारत–पाक संघर्ष के बाद खुलेआम पाकिस्तान का पक्ष लिया,

पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर को व्हाइट हाउस का निमंत्रण दिया,

और पाकिस्तान के साथ “नई आर्थिक साझेदारी” का ऐलान कर दिया।उनके मुताबिक, यह सब अमेरिका की कूटनीतिक विश्वसनीयता को कमजोर करने वाला है।भारत–अमेरिका तनाव कैसे बढ़ा?एक वर्ष का संक्षिप्त घटनाक्रम

ट्रंप के जनवरी 2025 में राष्ट्रपति पद संभालने के बाद प्रारंभिक संकेत मिले थे कि संबंध बेहतर होंगे, पर हालात उलटते गए।

1. भारत–पाकिस्तान संघर्ष के बाद ट्रंप प्रशासन का पाकिस्तान झुकाव मई 2025 के संघर्ष के बाद अमेरिका ने खुलकर पाकिस्तान के हितों का समर्थन करना शुरू किया।भारत इस रुख से बेहद नाराज हुआ।

2. रूस से तेल खरीद पर अमेरिका का प्रेशर अमेरिका बार-बार भारत पर दबाव डालता रहा कि वह रूस से सस्ता तेल खरीदना बंद करे।भारत ने दो-टूक कहा—“ऊर्जा सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं।”

3. ट्रंप का भारत पर टैरिफ लगाना भारत ने दबाव स्वीकार नहीं किया तो अमेरिका ने भारत पर उच्च टैरिफ लगा दिए।नई दिल्ली ने इसका विरोध किया, लेकिन अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर अडिग रही।

4. आसिम मुनीर को व्हाइट हाउस का न्यौताभारत को यह कदम खास तौर पर अपमानजनक लगा, क्योंकि पाकिस्तान की सेना परदुनिया भर में आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं।भारत की प्रतिक्रिया – “रणनीतिक स्वतंत्रता सर्वोपरि”भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि—

उसकी विदेश नीति दबाव में नहीं झुकेगी

, रूस, खाड़ी देश, यूरोप और इंडो–पैसिफिक में संतुलित कूटनीति जारी रहेगी

,ट्रंप प्रशासन के फैसले भारत की सामरिक प्राथमिकताओं को प्रभावित नहीं करेंगे।उच्च स्तर की कूटनीतिक बैठकों में भारत ने संकेत दिया है किअमेरिका से मित्रता बनी रहेगी, पर ‘निर्देशित संबंध’ नहीं।क्या अमेरिका सचमुच माफी मांग सकता है?विशेषज्ञों की राय

अमेरिकी और भारतीय रणनीतिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि—ट्रंप स्वयं औपचारिक माफी मांगने की स्थिति में शायद न हों परंतु चुनावी दबाव, वैश्विक आलोचना, और कांग्रेस की आंतरिक राजनीति अमेरिका को अपने रुख में बदलाव के लिए मजबूर कर सकती है

कई विशेषज्ञ मानते हैं कि“माइकल रुबिन का बयान सिर्फ व्यक्तिगत राय नहीं, बल्कि अमेरिकी रणनीतिक हलकों में चल रही नाराजगी का संकेत है।”

निष्कर्ष—

एक वर्ष में बदल गया समीकरण भारत–अमेरिका संबंध बीते दशक में सबसे मजबूत दौर से गुजरते रहे,लेकिन 2025 ने हालात तेजी से बदल दिए।माइकल रुबिन का बयान इस बात का संकेत है कि

अमेरिकी रणनीतिक समुदाय भारत को खोना नहीं चाहता

और पाकिस्तान पर अतिनिर्भरता को “ऐतिहासिक भूल” मान रहा हैअमेरिका के लिए चुनौती यह है कि वहभारत को फिर से भरोसे में ले,जबकि भारत की चुनौती यह है किवह अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखे।आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा किक्या माफी की मांग सिर्फ बयान भर थीया अमेरिका–भारत संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत।

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