यूपी में दो दर्दनाक घटनाओं ने उठाए सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर सवाल, सहारनपुर फैक्ट्री विस्फोट और अंबेडकरनगर कब्र से शव निकाले जाने के मामले ने प्रशासनिक जवाबदेही पर छेड़ी नई बहस

बी के झा

NSK News

लखनऊ/सहारनपुर/अंबेडकरनगर, 24 जुलाई

उत्तर प्रदेश में शुक्रवार को सामने आई दो अलग-अलग घटनाओं ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा, प्रशासनिक निगरानी और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सहारनपुर के गंगोह क्षेत्र स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने कई परिवारों को तबाह कर दिया, वहीं दूसरी ओर अंबेडकरनगर में दस दिन पहले दफनाई गई महिला का शव हत्या की आशंका के चलते कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

दोनों मामलों की जांच जारी है, लेकिन इन घटनाओं ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा तंत्र पर बहस तेज कर दी है।

सहारनपुर: धमाके ने मचाई तबाही, कई परिवारों की खुशियां उजड़ी

गंगोह थाना क्षेत्र के कुंडा बसी गांव स्थित पटाखा फैक्ट्री में शुक्रवार को हुए भीषण विस्फोट की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि फैक्ट्री का बड़ा हिस्सा ध्वस्त हो गया और आसपास का इलाका दहल उठा। प्रशासन ने दो लोगों की मौत की पुष्टि की है, जबकि कई मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। राहत एवं बचाव अभियान देर शाम तक जारी रहा।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विस्फोट के बाद का दृश्य अत्यंत भयावह था। घटनास्थल पर मानव अंग दूर-दूर तक बिखरे दिखाई दिए। ऐसे वीडियो भी सामने आए हैं जिन्हें उनकी अत्यधिक संवेदनशील प्रकृति के कारण सार्वजनिक रूप से प्रसारित नहीं किया जा सकता।

दमकल, पुलिस, एसडीआरएफ और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। घायलों को विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। प्रशासन का कहना है कि विस्फोट के कारणों की जांच की जा रही है और फैक्ट्री के लाइसेंस, सुरक्षा मानकों तथा विस्फोटक सामग्री के भंडारण की भी जांच होगी।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे

सहारनपुर में यह पहली घटना नहीं है। पिछले वर्ष देवबंद क्षेत्र में भी पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट में तीन लोगों की मौत हुई थी। इसके बावजूद यदि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हुआ तो यह प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

अंबेडकरनगर: कब्र से निकाला गया महिला का शव, बेटे ने पिता पर लगाया हत्या का आरोप

दूसरी घटना अंबेडकरनगर के अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र के रामपुर बनेथू गांव की है। यहां 13 जुलाई को मृत घोषित कर दफनाई गई महिला का शव शुक्रवार को मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कब्र से बाहर निकाला गया।महिला के बेटे आकाश ने आरोप लगाया कि उसके पिता के किसी दूसरी महिला से संबंध थे और उसी कारण उसकी मां की हत्या की गई। उसने पुलिस को शिकायत देकर निष्पक्ष जांच की मांग की। शिकायत के बाद पुलिस ने न्यायालय से अनुमति प्राप्त कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौत प्राकृतिक थी या किसी आपराधिक साजिश का परिणाम।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

समाजवादी पार्टी के नेताओं ने कहा कि प्रदेश में लगातार हो रहे औद्योगिक हादसे प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि सुरक्षा नियमों का पालन कराने में सरकार विफल रही है और दोषियों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।कांग्रेस ने दोनों घटनाओं को शासन की जवाबदेही से जोड़ते हुए कहा कि यदि फैक्ट्रियों का नियमित निरीक्षण होता और शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई होती तो ऐसी नौबत नहीं आती।

बहुजन समाज पार्टी ने मृतकों के परिजनों को पर्याप्त मुआवजा देने तथा पूरे प्रदेश में पटाखा फैक्ट्रियों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की।

वहीं भाजपा नेताओं ने कहा कि सरकार किसी भी दोषी को बख्शेगी नहीं। जांच पूरी पारदर्शिता से कराई जाएगी और यदि सुरक्षा मानकों में लापरवाही मिली तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।

स्थानीय प्रशासन का पक्ष

सहारनपुर जिला प्रशासन के अनुसार राहत एवं बचाव कार्य प्राथमिकता पर चल रहा है। घायलों के समुचित उपचार की व्यवस्था की गई है और फैक्ट्री के दस्तावेजों की जांच की जा रही है।अंबेडकरनगर पुलिस का कहना है कि मामले में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

कानूनविदों की राय

वरिष्ठ कानून विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पटाखा फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन या बिना वैध अनुमति विस्फोटक सामग्री का भंडारण पाया जाता है तो फैक्ट्री संचालकों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनों के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हो सकता है।

अंबेडकरनगर मामले में यदि पोस्टमार्टम रिपोर्ट हत्या की पुष्टि करती है तो आरोपी के विरुद्ध हत्या, साक्ष्य मिटाने और अन्य संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई संभव होगी।

राजनीतिक विश्लेषकों की टिप्पणी

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार सामने आ रहे औद्योगिक हादसे केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और नियामक व्यवस्था की परीक्षा भी हैं। उनका कहना है कि हर बड़ी दुर्घटना के बाद जांच समिति बन जाती है, लेकिन यदि जांच रिपोर्टों की सिफारिशों को समय पर लागू नहीं किया जाए तो हादसे दोहराए जाते रहेंगे।

शिक्षाविदों की राय

शिक्षाविदों का कहना है कि औद्योगिक सुरक्षा को केवल फैक्ट्री मालिकों की जिम्मेदारी मानना पर्याप्त नहीं है। श्रमिकों को नियमित सुरक्षा प्रशिक्षण, आपदा प्रबंधन और प्राथमिक चिकित्सा का प्रशिक्षण भी अनिवार्य किया जाना चाहिए। विद्यालयों और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में सुरक्षा संस्कृति को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की आवश्यकता है।

समाजसेवी संस्थाओं की मांग

कई सामाजिक संगठनों ने मृतकों के आश्रितों को पर्याप्त आर्थिक सहायता, घायलों का निःशुल्क उपचार और पूरे प्रदेश की पटाखा फैक्ट्रियों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की है। साथ ही महिला संदिग्ध मृत्यु मामलों में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।

बड़ा सवाल

सहारनपुर का विस्फोट और अंबेडकरनगर का मामला भले ही प्रकृति में अलग हों, लेकिन दोनों घटनाएं एक साझा संदेश देती हैं—यदि सुरक्षा मानकों का पालन, प्रशासनिक निगरानी और कानून का प्रभावी क्रियान्वयन समय पर हो, तो अनेक जानें बचाई जा सकती हैं।अब निगाहें जांच रिपोर्टों पर टिकी हैं। सहारनपुर में यह पता लगाया जाएगा कि विस्फोट किन परिस्थितियों में हुआ और जिम्मेदार कौन है, जबकि अंबेडकरनगर में पोस्टमार्टम रिपोर्ट यह तय करेगी कि महिला की मौत एक सामान्य घटना थी या एक सुनियोजित अपराध।

दोनों मामलों में निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई ही न्याय की कसौटी होगी।

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