रेवंत रेड्डी के बयान से तापमान बढ़ा: हिंदू देवी-देवताओं पर टिप्पणी पर बीजेपी भड़की, राज्यव्यापी प्रदर्शन का एलान

बी के झा

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नई दिल्ली/हैदराबाद, 2 दिसंबर

तेलंगाना की राजनीति में बुधवार को अचानक हलचल तेज हो गई जब मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) की बैठक के दौरान उन्होंने हिंदू देवी-देवताओं की विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि “हिंदू धर्म में 3 करोड़ देवी-देवता हैं और लोग अपने देवताओं को लेकर भी एकमत नहीं हैं, तो पार्टी में इतने लोग कैसे सहमत हो सकते हैं?”

उनका यह वक्तव्य विपक्ष—खासतौर पर भाजपा—को आगबबूला कर गया और देखते ही देखते राजनीतिक हलकों में इसे “असम्मानजनक” बताकर विरोध की लहर दौड़ पड़ी।रेवंत रेड्डी ने क्या कहा? भाषण से उठी सियासी हलचल गांधी भवन में आयोजित TPCC की बड़ी बैठक में रेवंत रेड्डी पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर चर्चा कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने हिंदू समाज के विविध आराध्य देवताओं का उल्लेख करते हुए कहा—

हिंदू धर्म में 3 करोड़ देवी-देवता हैं। जिसने शादी नहीं की उसके लिए हनुमान हैं। दो शादी करने वालों के लिए अलग देवता। शराब पीने वालों के लिए एक और देवता… कोई बालाजी का भक्त है, कोई शिव का, कोई अयप्पा स्वामी की दीक्षा लेता है। जब देवी-देवताओं पर एकमत नहीं, तो पार्टी में कैसे सहमति होगी?”

रेवंत का मकसद भले ही “विविधता में एकता” के संदर्भ में बात करना रहा हो, लेकिन उनके कई उदाहरणों और देवताओं को श्रेणियों में बांटने वाली भाषा ने माहौल को गर्म कर दिया।बीजेपी का पलटवार: “हिंदू आस्था का अपमान, राज्यव्यापी आंदोलन होगा

”गोशामहल के विधायक और भाजपा से निलंबित नेता टी. राजा सिंह ने सबसे तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा—सीएम रेवंत रेड्डी ने हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाया है। यह सिर्फ बयान नहीं, हिंदू आस्था का खुला अपमान है।”तेलंगाना भाजपा ने आधिकारिक रूप से ऐलान किया कि पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। पार्टी की राज्य इकाई ने कहा—

मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठकर ऐसे बयान देना शर्मनाक है। भाजपा इसे हिंदू समाज पर सीधा प्रहार मानती है।”हिंदू संगठनों की कड़ी प्रतिक्रिया: “देवताओं का वर्गीकरण अस्वीकार्य”राज्य के कई सक्रिय हिंदू संगठनों ने भी निराशा व्यक्त की।विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल तथा कुछ क्षेत्रीय धार्मिक परिषदों ने संयुक्त बयान जारी किया—

देवी-देवताओं को मानव आचरणों के आधार पर वर्गीकृत करना हिंदू धर्म का अवमानना है। यह सांस्कृतिक संवेदनशीलता के विरुद्ध है। मुख्यमंत्री को तुरंत सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए।”कुछ संगठनों ने यह भी कहा कि धर्म और राजनीति का यह प्रकार का मिश्रण सामाजिक सामंजस्य के लिए हानिकारक है।

कांग्रेस की चुप्पी और राजनीतिक विश्लेषकों की राय दिलचस्प रूप से कांग्रेस ने अब तक इस बयान पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं दी है। पार्टी के कई नेता इसे “अनावश्यक विवाद” मानकर शांत रहने की नीति अपना रहे हैं। लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे चुनावी राजनीति में हिंदुत्व बनाम धर्मनिरपेक्षता की नई बहस के रूप में देख रहे हैं।

वरिष्ठ विश्लेषक प्रो. शंकर प्रसाद कहते हैं—रेवंत रेड्डी की मंशा शायद पार्टी की आंतरिक विविधता को रेखांकित करने की रही होगी, परंतु जिस तरह के उदाहरण उन्होंने चुने, वह राजनीतिक संवेदनशीलता के लिहाज़ से गलत समय और गलत भाषा साबित हुई।

”दूसरे विश्लेषक अर्चना रेड्डी का मानना है—बीजेपी इस बयान को बड़ी राजनीतिक लाठी की तरह इस्तेमाल करेगी। तेलंगाना में पहले से हिंदुत्व की जमीन कमजोर थी, लेकिन ऐसे मुद्दे भाजपा को आक्रामक राजनीति का मौका देते हैं।”क्या बढ़ेगा विवाद? विपक्ष ने पकड़ा बड़ा मुद्दा,

कांग्रेस रक्षात्मक

राजनीतिक तापमान को देखते हुए यह साफ है कि यह विवाद अभी थमेगा नहीं।बीजेपी ने आंदोलन का एलान कर दिया है।हिंदू संगठन लगातार दबाव बना रहे हैं।कांग्रेस नेतृत्व चुप है, जिससे विपक्ष को और बढ़त मिल रही है।रेवंत रेड्डी की यह टिप्पणी तेलंगाना की सियासत में आने वाले दिनों में एक मुख्य राजनीतिक धुरी बन सकती है—खासतौर पर तब, जब भाजपा हिंदू समाज के साथ इसे जोड़कर व्यापक अभियान की तैयारी कर चुकी है।

निष्कर्ष

तेलंगाना के मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए बयान ने राज्य की राजनीति को अचानक तीखे द्वंद्व में ला खड़ा किया है। विपक्ष इसे हिंदू आस्था का अपमान बता रहा है, जबकि कांग्रेस मौन रहकर स्थिति को “टालने” की कोशिश में है।विवाद कितना आगे जाएगा, यह रेवंत रेड्डी के अगले कदम पर निर्भर करेगा—माफी, सफाई या फिर राजनीतिक रूप से और मुखर रुख।

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