वायरल वीडियो, हथियारों का प्रदर्शन और सियासी दबदबा: ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह को अदालत से फिलहाल राहत नहीं

बी के झा

NSK

पटना, 16 मई

बिहार की राजनीति में “छोटे सरकार” के नाम से चर्चित Anant Singh एक बार फिर कानूनी शिकंजे और राजनीतिक विवादों के केंद्र में आ गए हैं। गोपालगंज में जनेऊ समारोह के दौरान कथित अश्लील नृत्य, नोट उड़ाने और प्रतिबंधित हथियारों के खुले प्रदर्शन से जुड़े वायरल वीडियो मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट से उन्हें फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है।

विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए कोर्ट राजेंद्र कुमार पाण्डेय की अदालत ने शुक्रवार को उनकी अग्रिम जमानत और गिरफ्तारी पर रोक से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए केस डायरी और निचली अदालत के अभिलेख तलब कर लिए। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 20 मई की तारीख निर्धारित की है।

वायरल वीडियो ने बढ़ाई मुश्किलें

पूरा मामला गोपालगंज जिले के मीरगंज थाना क्षेत्र स्थित सेमरांव गांव का है, जहां 2 और 3 मई को मुखिया गुड्डू राय के घर उपनयन संस्कार यानी जनेऊ समारोह आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में बतौर अतिथि पहुंचे अनंत सिंह का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।एक वीडियो में मंच पर महिला डांसर प्रस्तुति दे रही है और सामने बैठे अनंत सिंह तालियां बजाते दिखाई दे रहे हैं। उनके समर्थकों द्वारा नोट उड़ाने का दृश्य भी कैमरे में कैद हुआ।

लेकिन सबसे बड़ा विवाद दूसरे वीडियो ने खड़ा किया, जिसमें कुछ युवक कथित तौर पर एके-47 जैसे प्रतिबंधित हथियार लहराते हुए डांस करते नजर आए। वीडियो सामने आते ही बिहार की राजनीति और पुलिस महकमे में हलचल मच गई।

पुलिस हरकत में, केस दर्ज

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद गोपालगंज के एसपी विनय तिवारी ने मामले का संज्ञान लिया। साइबर सेल से जांच कराई गई, जिसके बाद 4 मई को मीरगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई।इस मामले में विधायक अनंत सिंह, भोजपुरी गायक गुंजन सिंह समेत कुल नौ लोगों को आरोपी बनाया गया है। प्राथमिकी में हथियार प्रदर्शन, कानून-व्यवस्था भंग करने और अश्लीलता फैलाने जैसे आरोप शामिल बताए जा रहे हैं।

अदालत में क्या हुआ?

अनंत सिंह की ओर से दायर अग्रिम जमानत और गिरफ्तारी पर रोक की याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दावा किया कि वायरल वीडियो एडिटेड है और यह पूरा मामला राजनीतिक साजिश के तहत तैयार किया गया है।उनके अधिवक्ता राजेश कुमार पाठक ने अदालत में कहा कि वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है और उनके मुवक्किल को जानबूझकर फंसाया जा रहा है।

हालांकि अदालत ने तत्काल राहत देने के बजाय मामले की केस डायरी और संबंधित दस्तावेज तलब करते हुए अगली सुनवाई 20 मई तय कर दी। इससे साफ है कि फिलहाल अनंत सिंह की कानूनी मुश्किलें टली नहीं हैं।“

नाच देखना गलत है तो सरकार बैन करे” —

अनंत सिंह एफआईआर दर्ज होने के बाद अनंत सिंह ने अपने अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस केस से कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि अगर नाच देखना गलत है तो सरकार को ऐसे कार्यक्रमों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा देना चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें राजनीतिक रूप से बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

वहीं कार्यक्रम में डांस करने वाली महिला कलाकार भी सामने आई और उसने कहा कि वह अपनी मर्जी से पेशेवर रूप से डांस करती है। उसके मुताबिक अनंत सिंह ने कोई गलत हरकत नहीं की, लेकिन वायरल वीडियो के बाद अनावश्यक रूप से उसे बदनाम किया जा रहा है।

बिहार की राजनीति में फिर गरमाया बाहुबली बनाम कानून का मुद्दा

इस मामले ने बिहार में एक बार फिर बाहुबली राजनीति और कानून व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। विरोधी दल सवाल उठा रहे हैं कि आखिर सार्वजनिक कार्यक्रमों में खुलेआम हथियार कैसे लहराए जा रहे हैं और सत्ता से जुड़े प्रभावशाली नेताओं के कार्यक्रमों में कानून का डर क्यों नहीं दिखाई देता।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में चुनावी माहौल के बीच ऐसे वीडियो सरकार और प्रशासन दोनों के लिए असहज स्थिति पैदा करते हैं। खासकर तब, जब राज्य में अपराध और हथियार संस्कृति को लेकर पहले से विपक्ष सरकार को घेरता रहा हो।

सोशल मीडिया का नया राजनीतिक अदालत घर यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि आज के दौर में सोशल मीडिया केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहा, बल्कि वही सबसे बड़ी “जन अदालत” बन चुका है। कुछ सेकंड का वीडियो नेताओं की छवि बना भी सकता है और बिगाड़ भी सकता है।

अनंत Singh लंबे समय से बिहार की राजनीति के सबसे चर्चित और विवादित चेहरों में गिने जाते रहे हैं। समर्थकों के बीच उनका प्रभाव आज भी मजबूत माना जाता है, लेकिन हर नया विवाद उनकी राजनीतिक यात्रा पर नए सवाल भी खड़े करता है।

अब सबकी नजरें 20 मई की सुनवाई पर टिक गई हैं, जहां यह तय होगा कि अदालत उन्हें राहत देती है या फिर यह मामला और गहराता है।

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