विदाई समारोह में CJI गवई का बड़ा संदेश, ‘बुलडोजर न्याय’ के खिलाफ फैसला बताया अपने कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि

बी के झा

NSK

नई दिल्ली, 22 नवंबर

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी. आर. गवई ने अपने विदाई समारोह में वह बात कही जिसने पूरे कानूनी जगत और राजनीति को एक बार फिर सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने अपने लगभग दो साल के छोटे कार्यकाल में दिए गए कई महत्वपूर्ण फैसलों का जिक्र किया, लेकिन एक फैसला ऐसा था जिसे उन्होंने “सबसे महत्वपूर्ण” बताया—‘बुलडोजर जस्टिस’ के खिलाफ दिया गया ऐतिहासिक निर्णय।

CJI गवई ने साफ कहा कि “बुलडोजर न्याय कानून के शासन के खिलाफ है। सिर्फ आरोप लगने से किसी की छत छीन लेना संवैधानिक नहीं है।क्या कहा CJI गवई ने?

विदाई समारोह में CJI गवई ने बड़ी स्पष्टता से कहा:अगर कोई मुझसे पूछे कि मैंने अपने पूरे कार्यकाल में सबसे महत्वपूर्ण कौन-सा फैसला दिया, तो मेरा उत्तर होगा—‘बुलडोजर न्याय’ के खिलाफ फैसला।उन्होंने आगे कहा:“किसी पर आरोप लगते ही उसका घर कैसे गिराया जा सकता है?

परिवार और माता-पिता की क्या गलती?

रहने का अधिकार (Right to Shelter) एक मौलिक अधिकार है।उन्होंने समझाया कि कानून का राज (Rule of Law) तभी बचता है जब राज्य की हर कार्रवाई प्रक्रिया का पालन करे और न्याय के सिद्धांतों का सम्मान करे।क्या था वह ऐतिहासिक फैसला?नवंबर 2024 में CJI गवई की अध्यक्षता वाली तीन-जज बेंच ने उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में बढ़ते ‘बुलडोजर एक्शन’ पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था।फैसले की मुख्य बातें:-

बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए घर तोड़ना असंवैधानिकआरोपित चाहे गंभीर अपराधी ही क्यों न हो, तब भी कानून की प्रक्रिया अनिवार्य प्रशासन को नोटिस देना, सुनवाई का मौका देना और विस्तृत कारण बताना जरूरी“राज्य अपराधियों से लड़ सकता है, लेकिन संविधान से ऊपर नहीं उठ सकता।यह फैसला उस दौर में आया था जब कई राज्यों में कथित अपराधियों के घरों पर बुलडोजर चलाना “त्वरित न्याय” का प्रतीक बन गया था।

कानूनी विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया—“यह फैसला संविधान को सांस देता है”एक वरिष्ठ संवैधानिक विशेषज्ञ ने कहा:यह फैसला याद दिलाता है कि अपराध से लड़ने का रास्ता कानून से होकर जाता है, बदले की राजनीति से नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य शक्ति की सीमाएं तय की हैं।”एक पूर्व हाई कोर्ट जज ने टिप्पणी की:–

CJI गवई ने बताए बिना संदेश दिया कि सरकारें अगर भावनाओं पर नहीं, कानून पर चलें, तभी लोकतंत्र सुरक्षित रहेगा।

”राजनीतिक विश्लेषकों की व्याख्या—“बुलडोजर राजनीति को सीधी चेतावनी”

राजनीतिक विश्लेषकों ने इस फैसले को हाल के वर्षों की राजनीतिक प्रवृत्तियों पर महत्वपूर्ण असर डालने वाला बताया।एक प्रमुख विश्लेषक ने कहा:कई राज्यों में बुलडोजर कानून या न्याय नहीं, बल्कि ‘संदेश देने की राजनीति’ का औज़ार बन चुका था। सुप्रीम कोर्ट ने इसे रोककर राजनीतिक दंश से नागरिकों की सुरक्षा की है।”दूसरे विश्लेषक के अनुसार:यह फैसला याद दिलाता है कि अपराधी भी नागरिक है और उसके अधिकार छीनने से पहले सरकार को कानूनी प्रक्रिया का पालन करना ही होगा।”

SC/ST सब-क्लासिफिकेशन पर भी बोले CJI गवई

CJI गवई ने अपने दूसरे महत्वपूर्ण फैसले का भी जिक्र किया—राज्यों को SC और ST के भीतर सब-क्लासिफिकेशन की अनुमति देने का।उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर को उद्धृत करते हुए कहा:समानता का मतलब सबके साथ एक जैसा व्यवहार करना नहीं है, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर न्याय देना है।”उन्होंने यह भी बताया कि उनका एक लॉ क्लर्क SC समुदाय से था, लेकिन अत्यंत संपन्न परिवार से।फैसला सुनने के बाद उसने कहा:मैं अब आरक्षण का लाभ नहीं लूंगा, क्योंकि मुझे इसकी जरूरत नहीं है।

”CJI ने कहा कि यह उदाहरण बताता है कि समानता का अर्थ परिस्थितियों की समानता है, जाति की नहीं।संस्था को मजबूत करने की बात भी की

CJI गवई ने बताया कि—“मैंने हमेशा सभी जजों से सलाह लेकर निर्णय लिए।”“मेरे छोटे कार्यकाल में 107 नए हाई कोर्ट जजों की नियुक्ति हुई।”“सुप्रीम कोर्ट में सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखना मेरा प्रयास रहा।”उन्होंने अपने 40 साल के न्यायिक सफर को “अनमोल अनुभव” बताया।

निष्कर्ष:

गवई का संदेश—कानून की शक्ति, बुलडोजर की ताकत से बड़ी है

CJI गवई के इस बयान ने एक बार फिर याद दिलाया है कि—लोकतंत्र में न्यायालय अंतिम प्रहरी है राज्य की शक्ति सीमित है और संविधान सबसे ऊपर हैं उनका ‘बुलडोजर न्याय’ के खिलाफ फैसला इस बात का प्रतीक है कि न्याय बदले की भावना से नहीं, संविधान की कसौटी पर दिया जाता है।

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