बी के झा
NSK

नई दिल्ली / पटना, 27 नवंबर
बिहार के नव नियुक्त उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री सम्राट चौधरी का दिल्ली दौरा महज़ शिष्टाचार है या आने वाली बड़ी राजनीतिक हलचल का संकेत—यह प्रश्न गुरुवार को राजधानी की गलियों से लेकर पटना के सत्ता गलियारों तक गूंजता रहा। एनडीए की प्रचंड जीत के बाद सम्राट चौधरी का यह पहला दिल्ली प्रवास है, लेकिन मुलाकातों की तीव्रता और उनका वृहद दायरा साफ बताता है कि यह सिर्फ औपचारिक यात्रा नहीं, कुछ गहरे राजनीतिक संदेशों की वाहक भी है।
अमित शाह से मुलाकात—शुरू हुई “गृह–गृह” की बड़ी राजनीति गृह विभाग पहली बार सीधे भाजपा के पास है और उसकी कमान सम्राट चौधरी को मिली है। इस लिहाज़ से उनका केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलना स्वाभाविक भी था और अत्यंत महत्वपूर्ण भी।शाह ने सोशल मीडिया पर लिखकर संकेत दिए—बिहार ने प्रचंड बहुमत से एनडीए को चुना है। मोदी–नीतीश नेतृत्व में ‘विकसित बिहार’ का लक्ष्य और तेजी से पूरा होगा।
”लेकिन राजनीतिक जानकार कहते हैं कि इस मुलाकात के पीछे सिर्फ औपचारिकता नहीं थी, बल्कि कई स्तर पर ‘कोऑर्डिनेशन’ और ‘डैमेज कंट्रोल’ की चर्चा भी हुई।नड्डा के आवास पर रात्रिभोज—सम्राट को दिखाया केंद्र का ‘फुल सपोर्ट’एनडीए की जीत के बाद भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के आवास पर आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम में सम्राट चौधरी की उपस्थिति कई मायनों में खास रही।अमित शाह बीएल संतोष नित्यानंद राय संजय सेठ जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ सम्राट का एक ही मंच पर होना इस बात का संकेत है कि बिहार भाजपा में अब सम्राट चौधरी की भूमिका सिर्फ एक उपमुख्यमंत्री की नहीं, बल्कि केंद्रीय नेतृत्व से सीधे कनेक्टेड चेहरा की है।
तावड़े से बैठक—बिहार भाजपा की ‘संगठनात्मक री–ड्राफ्टिंग’ की तैयारी?
बिहार प्रभारी विनोद तावड़े से उनकी अलग बैठक ने सियासी विश्लेषकों के कान और खड़े कर दिए। तावड़े संगठन के रणनीतिकार माने जाते हैं, और उनकी सम्राट से मुलाकात का अर्थ है—बिहार में भाजपा एक बड़े संगठनात्मक फेरबदल या नई रणनीति पर काम कर रही है।
क्या सम्राट को दिल्ली अचानक बुलाया गया?—
महाराष्ट्र ने बढ़ाई बेचैनी
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार दिल्ली नेतृत्व की असल बेचैनी महाराष्ट्र महायुति में बढ़ता तनाव और एनडीए में अविश्वास का बढ़ता भाव है।– महाराष्ट्र में शिवसेना (शिंदे गुट) बनाम भाजपा की दूरियाँ– राज्य में लगातार उभरते सियासी विवाद– गठबंधन की बिगड़ती सामंजस्य स्थिति इन कारणों से केंद्र चाहता है कि बिहार में एनडीए एकदम मजबूत बने रहे, क्योंकि—
“अगर महाराष्ट्र में भूचाल आया तो दिल्ली तक उसका कंपन महसूस होगा।”
ओवैसी का समर्थन—बिहार की राजनीति में नया ‘सस्पेंस फैक्टर’AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अपने सभी 5 विधायकों का बिना शर्त समर्थन नीतीश कुमार को दे दिया।यह कदम भाजपा के लिए असहज करने वाला है क्योंकि—ओवैसी का समर्थन जेडीयू के लिए अतिरिक्त विकल्प केंद्र के लिए असुविधाजनक समीकरण नीतीश को एक बार फिर से “किंगमेकर” की भूमिका में धकेल सकता है
नीतीश कुमार का इतिहास खुद डर पैदा करता है—एक पल में बाजी पलटने वाले खिलाड़ी नीतीश का राजनीतिक इतिहास किसी से छिपा नहीं—NDA → महागठबंधन → NDAमोदी विरोध → मोदी समर्थन → फिर दूरी
विपक्ष का पीएम चेहरा बनने की कोशिश
एक वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक के शब्दों में—यदि नीतीश कुमार के मन में शिंदे वाला प्रकरण बैठ गया तो बीजेपी से गठबंधन तोड़ने में उन्हें एक पल भी नहीं लगेगा। उनका ‘दिल्ली–पीएम–समीकरण’ आज भी जीवित है।
”ममता–पवार–कांग्रेस—नीतीश को ‘राष्ट्रीय नेता’ बनाने की कोशिश तेज
सूत्र बताते हैं कि—ममता बनर्जी शरद पवार गांधी परिवार सभी ने हाल के दिनों में नीतीश कुमार के प्रति नरमी दिखाई है।
विशेषज्ञों का दावा है—“2024 की तरह 2029 के लिए विपक्ष नीतीश को एक बार फिर PM फेस के रूप में खड़ा करने की रणनीति पर विचार कर रहा है।”
क्या महाराष्ट्र की लड़ाई दिल्ली की राजनीति को डुबो देगी?सम्राट चौधरी के दिल्ली दौरे का समय बेहद महत्वपूर्ण है—महाराष्ट्र में महायुति के भीतर तनावबिहार में ओवैसी का समर्थन नीतीश की राजनीतिक ‘अनिश्चितता’विपक्ष की नई सक्रियता इन सबके बीच केंद्र इस बार कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।निष्कर्ष: सम्राट का दौरा सिर्फ ‘शिष्टाचार’ नहीं—यह एक ‘वार्निंग मीटिंग’ भी थी सम्राट चौधरी भले मुलाकात को शिष्टाचार बता रहे हों, पर सियासी जमीन कुछ और ही कहती है।
यह दौरा— बिहार को स्थिर रखने
महाराष्ट्र के तनाव का समाधान खोजने
नीतीश कुमार की “पलटी राजनीति” पर नजर रखने
और एनडीए को एकजुट संदेश देनेके उद्देश्य से कहीं अधिक जुड़ा हुआ दिखता है।सियासत की बिसात अभी और उलझेगी, और सम्राट चौधरी की हर अगली दिल्ली यात्रा राजनीतिक संकेतों से भरी होगी।
