बी के झा
NSK


नई दिल्ली /वाशिंगटन, 2 जुन
ड्रोन गिरा, बम बरसे, मिसाइलें चलीं; ट्रंप के शांति दावे के बीच मध्य पूर्व में फिर बढ़ा तनाव
मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों के बीच एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच घोषित युद्धविराम (सीजफायर) के बावजूद दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव की नई घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के रडार और ड्रोन ठिकानों पर बमबारी तथा ईरान द्वारा अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के दावों ने यह संकेत दे दिया है कि कूटनीतिक प्रयासों के समानांतर सैन्य अविश्वास अब भी चरम पर है।उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष विराम का दावा कर खुद को एक बार फिर मध्य पूर्व में शांति के सूत्रधार के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की है।
लेकिन ट्रंप के बयान के कुछ ही समय बाद लेबनान से मिसाइल दागे जाने और उत्तरी इजरायल में अलर्ट जारी होने से उनकी घोषणा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
युद्धविराम या युद्ध की तैयारी?
सोमवार को अमेरिकी रक्षा विभाग ने पुष्टि की कि ईरान द्वारा एक अमेरिकी ड्रोन मार गिराए जाने के बाद जवाबी कार्रवाई में उसके रडार और ड्रोन ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके तुरंत बाद ईरान ने दावा किया कि उसने कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागीं, जिन्हें अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली ने नष्ट कर दिया।
विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति “सीमित युद्ध” और “कूटनीतिक संवाद” के बीच झूलते मध्य पूर्व की नई वास्तविकता बन चुकी है।
ट्रंप का दावा, लेकिन जमीन पर अलग तस्वीर
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि उनकी अलग-अलग बातचीत के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और हिजबुल्लाह दोनों सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमत हो गए हैं। ट्रंप ने यहां तक कहा कि बेरूत की ओर बढ़ रहे इजरायली सैनिकों को भी वापस बुला लिया गया है।
हालांकि, इजरायल की ओर से आई प्रतिक्रिया ने तस्वीर को पूरी तरह साफ नहीं किया। नेतन्याहू ने स्पष्ट कहा कि यदि हिजबुल्लाह ने इजरायली शहरों पर हमले बंद नहीं किए तो बेरूत में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई जारी रहेगी। इजरायली सेना (IDF) ने भी दक्षिणी लेबनान में अपने अभियान जारी रखने के संकेत दिए हैं।यानी राजनीतिक स्तर पर शांति की भाषा और सैन्य स्तर पर आक्रामक तैयारी एक साथ चल रही है।
रक्षा विशेषज्ञों की राय: “यह शांति नहीं, रणनीतिक विराम है
“रक्षा मामलों के विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) एस. के. सिंह कहते हैं,”अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा स्थिति को पूर्ण युद्धविराम नहीं कहा जा सकता। दोनों पक्ष अपनी सैन्य क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति का प्रदर्शन कर रहे हैं। यह वास्तविक शांति नहीं बल्कि रणनीतिक विराम (Strategic Pause) है।”उनके अनुसार, अमेरिका खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति कम करने के मूड में नहीं है, जबकि ईरान क्षेत्रीय प्रभाव बनाए रखने के लिए अपने प्रॉक्सी नेटवर्क का उपयोग जारी रखेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का आकलन
अंतरराष्ट्रीय राजनीति के विश्लेषक प्रोफेसर अजय दुबे का मानना है कि ट्रंप का ताजा हस्तक्षेप अमेरिकी घरेलू राजनीति से भी जुड़ा हुआ है।”ट्रंप खुद को एक ऐसे नेता के रूप में प्रस्तुत करना चाहते हैं जो युद्ध रोक सकता है। लेकिन मध्य पूर्व की वास्तविकता इतनी सरल नहीं है। हिजबुल्लाह, ईरान, इजरायल और अमेरिका सभी के अपने रणनीतिक हित हैं।”उनके अनुसार, जब तक गाजा, लेबनान और ईरान से जुड़े मूल विवादों का समाधान नहीं होता, तब तक किसी भी संघर्ष विराम को स्थायी नहीं माना जा सकता।
शिक्षाविदों की चेतावनी: पूरी दुनिया पर पड़ सकता है असर
अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञ और शिक्षाविद डॉ. राकेश सिन्हा कहते हैं,”यदि अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ता है तो इसका असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। तेल बाजार, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार सभी प्रभावित होंगे।”उन्होंने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की अस्थिरता से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिसका असर भारत सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।
सबसे बड़ा सवाल: क्या फिर भड़केगा खाड़ी युद्ध?
वर्तमान घटनाक्रम यह संकेत दे रहा है कि मध्य पूर्व अभी भी बारूद के ढेर पर बैठा हुआ है। एक ओर अमेरिका और ईरान बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर सैन्य कार्रवाई जारी है। इजरायल-हिजबुल्लाह संघर्ष भी किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध की चिंगारी बन सकता है।
फिलहाल दुनिया की नजरें वॉशिंगटन, तेहरान, तेल अवीव और बेरूत पर टिकी हुई हैं। सवाल केवल इतना नहीं है कि युद्धविराम टिकेगा या नहीं, बल्कि यह भी है कि क्या मध्य पूर्व एक और बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है।
निष्कर्ष
ड्रोन गिराए जा रहे हैं, मिसाइलें दागी जा रही हैं, बमबारी हो रही है और साथ ही शांति वार्ता भी चल रही है। यही विरोधाभास आज के मध्य पूर्व की सबसे बड़ी सच्चाई है। ट्रंप भले ही गोलीबारी रुकने का दावा कर रहे हों, लेकिन जमीन पर हालात अभी भी विस्फोटक बने हुए हैं।
आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि यह संघर्ष कूटनीति की मेज पर खत्म होगा या फिर युद्ध के मैदान में और भयावह रूप लेगा।
