बी के झा
NSK

पटना / नई दिल्ली, 2 नवंबर
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों से पहले ही राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने दावा किया है कि इस बार बिहार में सत्ता परिवर्तन तय है।
उन्होंने यहां तक कह दिया कि 18 नवंबर को नई सरकार का शपथग्रहण होगा और दो महीने के भीतर अपराधियों व असामाजिक तत्वों को जेल भेज दिया जाएगा।तेजस्वी का यह बयान न सिर्फ चुनावी आत्मविश्वास को दर्शाता है, बल्कि बिहार की कानून व्यवस्था पर सत्तारूढ़ एनडीए पर सीधा हमला भी है।
शपथ ग्रहण की तारीख घोषिततेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा —
14 नवंबर को चुनाव परिणाम आएंगे और 18 नवंबर को हमारी महागठबंधन सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होगा। 26 नवंबर से 26 जनवरी 2026 के बीच बिहार के सभी अपराधी और असामाजिक तत्व जेल की सलाखों के पीछे होंगे। खरमास में सब अपराधियों का खात्मा हो जाएगा, किसी को नहीं बख्शा जाएगा।उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। कई पर्यवेक्षकों का कहना है कि तेजस्वी का यह आत्मविश्वास या तो आंतरिक सर्वेक्षण पर आधारित है या फिर विपक्षी खेमे को जोश में रखने की रणनीति है।
प्रधानमंत्री के रोड शो पर तीखा वारप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पटना रोड शो पर तंज कसते हुए तेजस्वी यादव ने कहा —
प्रधानमंत्री फैक्ट्री गुजरात में लगाते हैं और विक्ट्री के लिए बिहार आते हैं —
यह अब नहीं चलेगा। 11 साल से देश के प्रधानमंत्री हैं, लेकिन एक भी रोजगार नहीं दिया, और अब बिहार में एक करोड़ नौकरी देने की बात कर रहे हैं। यह महज जुमला है, जिसे जनता समझ चुकी है।”
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की लगातार यात्राओं के बावजूद राज्य में अपराध की घटनाएं थम नहीं रही हैं।बिहार में आज महाजंगलराज की स्थिति बन गई है,”
तेजस्वी ने कहा।मोकामा हत्याकांड और अनंत सिंह की गिरफ्तारी पर टिप्पणी
मोकामा में जन सुराज कार्यकर्ता दुलारचंद यादव की हत्या और जदयू प्रत्याशी अनंत सिंह की गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया देते हुए तेजस्वी ने कहा —यह जनता देख रही है कि सत्ता की हनक में किस तरह अपराध पनप रहा है। हमारी सरकार आई तो दो महीने में हर अपराधी सलाखों के पीछे होगा।
महागठबंधन में कई उपमुख्यमंत्री के संकेततेजस्वी यादव ने यह भी संकेत दिया कि अगर महागठबंधन सत्ता में आता है, तो सरकार में सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा।हमारी सरकार में सभी वर्गों की भागीदारी होगी। मुस्लिम और दलित समुदायों से भी उपमुख्यमंत्री बनाए जाएंगे, ताकि हर तबका अपनी आवाज़ सरकार में महसूस कर सके,”
उन्होंने कहा।उनके इस बयान के बाद भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
भाजपा का पलटवार: “सपनों में मिली मुख्यमंत्री की कुर्सी”केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा —
“लालू जी के युवराज को यह आत्मविश्वास शायद किसी मुल्ला-मौलवी के सपने में मिला होगा कि वो मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। उन्हें समझना चाहिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के रहते बिहार की जनता उन्हें सत्ता में नहीं आने देगी। आज भी लोगों के ज़ेहन में लालू राज का जंगलराज ताज़ा है।भाजपा-जदयू खेमे में इस बयान को लेकर रणनीतिक बैठकें तेज हो गई हैं, क्योंकि तेजस्वी का दावा सीधे सत्ता परिवर्तन की घोषणा जैसा है।
राजनीतिक विश्लेषण:
आत्मविश्वास या चुनावी मनोविज्ञान?राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि तेजस्वी यादव का यह बयान दोहरे संदेश वाला है —
आंतरिक मनोबल बढ़ाने की कोशिश, ताकि
महागठबंधन कार्यकर्ता आत्मविश्वास में रहें।
जनता में धारणा निर्माण की रणनीति,
ताकि यह संदेश जाए कि “लहर विपक्ष के पक्ष में है।”एक वरिष्ठ विश्लेषक ने कहा,तेजस्वी यादव इस समय एनडीए की विकास बनाम रोजगार की बहस को ‘सुरक्षा बनाम अपराध’ के मैदान में मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। यह चुनाव के अंतिम चरण में जनता की धारणा को प्रभावित कर सकता है।
”एनडीए बनाम महागठबंधन: अंतिम मुकाबले की घड़ीजहां एनडीए अपने विकास मॉडल और स्थिर सरकार के नाम पर वोट मांग रहा है, वहीं महागठबंधन बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ रहा है।तेजस्वी यादव के बयान से यह स्पष्ट है कि विपक्ष इस चुनाव को “जनता बनाम सत्ता” के रूप में पेश करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता।
निष्कर्ष
बिहार का राजनीतिक तापमान अब उबाल पर है।तेजस्वी यादव की “18 नवंबर शपथग्रहण” की घोषणा ने चुनावी परिदृश्य को और रोमांचक बना दिया है।अब देखना यह होगा कि मतदाताओं का फैसला 14 नवंबर को किसके पक्ष में आता है —क्या तेजस्वी का आत्मविश्वास जनता का जनादेश बनेगा,या नीतीश कुमार का अनुभव फिर से सत्ता की कुर्सी सुरक्षित रखेगा।
