बी के झा
NSK

मुंगेर/तारापुर, 6 नवंबर
दो दशकों से नक्सलवाद की गहरी छाया में दबे मुंगेर जिले के भीमबांध क्षेत्र में बुधवार को ऐसा सूर्योदय हुआ, जिसने पूरे इलाके की तस्वीर बदल दी। 20 साल बाद यहां फिर से मतदान हुआ—वह भी बिना किसी डर के, बिना किसी साये के। बूथों के बाहर उमड़ी भीड़ और लोगों के चेहरों पर छाई संतुष्टि इस बात की गवाही दे रही थी कि लोकतंत्र की रोशनी को रोकना मुश्किल है, बस देर-सवेर वह अपने घर का रास्ता ढूंढ ही लेती है।
2005 की दर्दनाक घटना के बाद बंद हो गए थे बूथसाल 2005 में एसपी सुरेंद्र बाबू और 7 पुलिसकर्मियों की नक्सलियों द्वारा हत्या के बाद प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से भीमबांध इलाके में मतदान पूरी तरह बंद कर दिया था। उस दिन के बाद से यह पूरा क्षेत्र चुनावी नक्शे में एक ब्लैक स्पॉट माना जाता था।
ग्रामीणों को वोट डालने के लिए 15-20 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था—जंगलों, पहाड़ियों और पगडंडियों को पार करके।20 साल बाद पहली बार गांव में वोटिंग — लोग बोले: लोकतंत्र घर लौटा हैइस बार बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में तारापुर, जमालपुर और मुंगेर सीटों पर मतदान शांतिपूर्ण रहा।
भीमबांध क्षेत्र में 7 बूथ दोबारा खोले गए। केंद्रीय सशस्त्र बलों की कड़ी निगरानी में पूरे इलाके को सुरक्षा के घेरे में रखा गया।81 वर्षीय बुजुर्ग विशुन देव सिंह, जिन्होंने खड़े होकर मतदान किया, की आंखों में खुशी झलक रही थी। उन्होंने कहा—“आज 20 साल बाद अपने ही गांव में वोट डाला। बूथ 20 किलोमीटर दूर चला गया था, हम बूढ़े लोग जा नहीं पाते थे। आज ऐसा लग रहा है जैसे लोकतंत्र हमारे दरवाजे लौट आया है।”पहली बार वोट डालने वाले 18 वर्षीय बादल प्रताप का उत्साह देखते ही बन रहा था।
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा—“हमारे गांव में पहली बार जीवन में वोटिंग देखी। अब लगता है कि गांव सच में बदल रहा है।”महिला मतदाता नीला देवी की बातों में राहत साफ झलक रही थी—“पहले जंगल पार कर वोट डालने जाते थे। डर भी लगता था। आज घर के पास बूथ है, सुरक्षा भी है… मन में सुकून है।”
‘ग्रामीण खुश हैं, माहौल शांत है’ – प्रशासन सेक्टर मजिस्ट्रेट अशोक कुमार पूरे दिन बूथों पर निगरानी में रहे।
उन्होंने कहा—“20 साल बाद इस इलाके में वोटिंग हो रही है। ग्रामीणों में उत्साह जबरदस्त है। मतदान शांतिपूर्ण है और सुरक्षा बल लगातार गश्त पर हैं।”एक स्थानीय सरकारी अधिकारी ने बताया कि प्रशासन ने कई हफ्तों तक जागरूकता अभियान चलाए, ग्रामीणों के साथ मीटिंग कीं और भरोसा दिलाया कि सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।इलाके में शांति और विकास की नई उम्मीद
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा कैंप, सड़कें, बिजली, स्कूल और सरकारी योजनाओं की बेहतर पहुँच से हालात बदलने लगे हैं। अब नक्सली वारदातें पहले जैसी नहीं रहीं। एक ग्रामीण ने मुस्कुराते हुए कहा—“अब डर नहीं है। बच्चे पढ़ रहे हैं, खेतों में काम हो रहा है। बूथ खुलने से लगता है कि हमारा गांव भी देश के साथ चल रहा है।”बिहार में पहले चरण की 121 सीटों पर मतदान पहले चरण में 18 जिलों की 121 सीटों पर वोटिंग सुबह 7 बजे से जारी रही। बाकी 122 सीटों पर 11 नवंबर को मतदान होगा और नतीजे 14 नवंबर को आएंगे। कुल 243 सीटों वाले बिहार में करीब 3.75 करोड़ मतदाता वोट डाल रहे हैं।
2020 के विधानसभा चुनाव में NDA को 125 सीटें मिली थीं जबकि महागठबंधन 110 सीटों पर रहा था।
निष्कर्ष
भीमबांध में 20 साल बाद बजे लोकतंत्र के इन घंटों ने न केवल मतदान की प्रक्रिया को ज़िंदा किया, बल्कि एक पूरे क्षेत्र में उम्मीद और विश्वास की लौ फिर जगा दी। आने वाले समय में यह इलाका नक्सल प्रभावित ज़िले की पहचान से निकलकर लोकतांत्रिक और विकासशील क्षेत्र के रूप में पहचाना जाए—यही ग्रामीणों की कामना है।
