9 दिन, 3 धमाके और ‘प्लान-B’ की आहट: पंजाब में फिर सिर उठाता आतंकी नेटवर्क, निशाने पर अब राष्ट्र की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था

बी के झा

NSK

जालंधर/ अमृतसर/नई दिल्ली, 7 मई

सीमा पार से चल रही साजिशें अक्सर गोलियों की आवाज से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे धमाकों और डर के मनोविज्ञान से अपनी मौजूदगी दर्ज कराती हैं। पंजाब में पिछले नौ दिनों के भीतर हुए तीन धमाकों ने यही संकेत दिया है कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी नेटवर्क ने अपनी रणनीति बदल दी है। अब उनका लक्ष्य सिर्फ पुलिस चौकियां नहीं, बल्कि देश की सामरिक संरचनाएं, केंद्रीय सुरक्षा बल और आर्थिक तंत्र बनते दिखाई दे रहे हैं।

जालंधर में बीएसएफ मुख्यालय के बाहर धमाका, अमृतसर के खासा इलाके में आर्मी कैंप के समीप विस्फोट और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के रेलवे ट्रैक को निशाना बनाना—इन घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। यह महज कानून-व्यवस्था की चुनौती नहीं, बल्कि भारत के खिलाफ चल रहे “हाइब्रिड वॉर” का संकेत माना जा रहा है।

रणनीति में बदलाव: पुलिस से आगे बढ़कर केंद्रीय ठिकानों पर हमला

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में पंजाब पुलिस ने सीमावर्ती जिलों में सक्रिय कई आतंकी मॉड्यूल्स को ध्वस्त किया। पुलिस चौकियों और थानों पर हमलों के बाद अब आतंकी संगठन अपनी “टारगेट प्रोफाइल” बदल रहे हैं।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बीएसएफ और सेना के ठिकानों के पास कम तीव्रता वाले धमाके करने का उद्देश्य भारी जनहानि नहीं, बल्कि सुरक्षा प्रतिष्ठानों की “अभेद्यता” पर सवाल खड़े करना है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश देने की कोशिश होती है कि पंजाब फिर अस्थिरता की ओर बढ़ रहा है।

राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के जानकारों के मुताबिक, यह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की पुरानी रणनीति रही है—सीधी जंग नहीं, बल्कि “लो-कॉस्ट हाई-इम्पैक्ट ऑपरेशन”। यानी कम संसाधनों में ऐसा माहौल बनाना जिससे भय, अविश्वास और राजनीतिक तनाव पैदा हो।

फ्रेट कॉरिडोर पर हमला: अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाने की कोशिश

वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को निशाना बनाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे अधिक चिंताजनक माना जा रहा है। यह कॉरिडोर देश की औद्योगिक सप्लाई चेन की रीढ़ माना जाता है।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह हमला प्रतीकात्मक था।

संदेश साफ है—यदि आतंकी नेटवर्क रेलवे, लॉजिस्टिक्स और माल परिवहन को बाधित करने में सफल होते हैं, तो इसका असर सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था तक पहुंचेगा।विशेषज्ञ इसे “इकोनॉमिक टेररिज्म” का शुरुआती संकेत मान रहे हैं, जहां लक्ष्य सिर्फ जान-माल का नुकसान नहीं, बल्कि निवेश और औद्योगिक भरोसे को कमजोर करना होता है।

ISI, ड्रोन और नार्को-टेरर का खतरनाक गठजोड़

पंजाब पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की जांच में लगातार यह तथ्य सामने आया है कि पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स ड्रोन के जरिए हथियार, ग्रेनेड और नशीले पदार्थ भारतीय सीमा में भेज रहे हैं।पंजाब के डीजीपी गौरव यादव पहले भी कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि आईएसआई यूरोप, कनाडा और अन्य देशों में बैठे खालिस्तानी समर्थक नेटवर्क के जरिए युवाओं को बरगलाने, मॉड्यूल खड़े करने और फंडिंग कराने का काम कर रही है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि “नार्को-टेरर” आज पंजाब के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। ड्रग तस्करी से आने वाला पैसा आतंकियों के लिए ऑक्सीजन का काम करता है। यही पैसा हथियार खरीदने, स्थानीय नेटवर्क तैयार करने और युवाओं को लालच देकर भर्ती करने में लगाया जाता है।गैंगस्टर-टेरर नेटवर्क: अपराध और आतंक का नया गठबंधनपंजाब में पिछले कुछ वर्षों में गैंगस्टरों और आतंकियों के गठजोड़ ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। जांच एजेंसियों के अनुसार, कई स्थानीय गैंगस्टर अब “कॉन्ट्रैक्ट नेटवर्क” की तरह काम कर रहे हैं।

ग्रेनेड हमलों में चर्चित नाम ‘हैप्पी पासिया’ इसी मॉडल का उदाहरण माना गया। पुलिस का दावा है कि विदेश में बैठे आतंकी हैंडलर्स स्थानीय अपराधियों को पैसों का लालच देकर हमले करवाते हैं।

बीजेपी कार्यालय पर हुए हमले में गिरफ्तार आरोपियों को दो लाख रुपये का प्रलोभन दिए जाने की बात भी जांच में सामने आई थी।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मॉडल आतंकवाद को और खतरनाक बना देता है, क्योंकि इसमें वैचारिक कट्टरता के साथ-साथ संगठित अपराध की आर्थिक ताकत भी जुड़ जाती है।

विपक्ष का हमला: “कानून-व्यवस्था पर सवाल”

इन घटनाओं को लेकर विपक्षी दलों ने पंजाब सरकार और केंद्र दोनों पर निशाना साधा है।भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार आतंकवादी गतिविधियों को गंभीरता से लेने में विफल रही है। उनका कहना है कि सीमावर्ती जिलों में लगातार हो रही घटनाएं बताती हैं कि सुरक्षा तंत्र में कहीं न कहीं बड़ी चूक है।वहीं कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार से सवाल पूछा कि यदि सीमा सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां केंद्र के अधीन हैं, तो ड्रोन के जरिए हथियार और विस्फोटक आखिर कैसे लगातार पंजाब तक पहुंच रहे हैं।

शिरोमणि अकाली दल ने इसे पंजाब की शांति को अस्थिर करने की सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय साजिश बताते हुए सभी दलों से राजनीतिक मतभेद भूलकर एकजुट होने की अपील की है।आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है कि पंजाब पुलिस ने कई मॉड्यूल्स को तोड़ा है और राज्य सरकार आतंकवाद के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर काम कर रही है।

2016-2021 की दर्दनाक यादें फिर ताजा

हालिया घटनाओं ने पंजाब को उस दौर की याद दिला दी है जब 2016 से 2021 के बीच राज्य में लगातार टारगेट किलिंग हुई थीं। आरएसएस नेताओं, शिवसेना पदाधिकारियों, डेरा समर्थकों और धार्मिक व्यक्तियों की हत्याओं ने पूरे राज्य को दहला दिया था।तब जांच एजेंसियों ने खालिस्तान लिबरेशन फोर्स और अन्य मॉड्यूल्स की संलिप्तता उजागर की थी। कई मामलों में विदेशी फंडिंग और पाकिस्तान कनेक्शन सामने आए थे।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा घटनाएं उसी “स्लीपर नेटवर्क” को पुनर्जीवित करने की कोशिश का हिस्सा हो सकती हैं।

सबसे बड़ा सवाल: क्या पंजाब फिर अशांत दौर की ओर?

पंजाब ने आतंकवाद का वह भयावह दौर देखा है, जिसने हजारों परिवारों को तबाह किया था। यही कारण है कि आज छोटी घटना भी बड़े खतरे की चेतावनी मानी जा रही है।राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आतंकवाद सिर्फ सुरक्षा का मुद्दा नहीं होता; यह सामाजिक विश्वास, आर्थिक स्थिरता और राजनीतिक संतुलन पर भी हमला करता है। यदि समय रहते कठोर कार्रवाई, मजबूत खुफिया समन्वय और युवाओं को कट्टरपंथ से बचाने की रणनीति नहीं बनी, तो सीमावर्ती राज्य फिर अस्थिरता की प्रयोगशाला बनने की कोशिशों का सामना कर सकता है।

फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हैं, कई संदिग्धों पर नजर रखी जा रही है और सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ धमाके रोकना नहीं, बल्कि उस नेटवर्क को तोड़ना है जो ड्रग्स, गैंगस्टर और कट्टरपंथ को एक साथ जोड़कर पंजाब की शांति को निशाना बना रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *