बी के झा
NSK




मुंबई/नई दिल्ली, 17 जुन
महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। कभी शिवसेना के भीतर शुरू हुई टूट अब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के लिए नई चुनौती बनती दिखाई दे रही है। राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि उद्धव गुट के कई सांसद सत्ता पक्ष के साथ जाने की तैयारी में हैं। इसी बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता Sanjay Raut ने संभावित बागी सांसदों के खिलाफ तीखा हमला बोलते हुए ऐसे बयान दिए हैं, जिन्होंने महाराष्ट्र की राजनीति का तापमान और बढ़ा दिया है।
बताया जा रहा है कि मुंबई से लेकर दिल्ली तक कई स्तरों पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चर्चा है कि उद्धव ठाकरे गुट के कुछ सांसद Shrikant Shinde से मुलाकात कर सकते हैं। इस संभावित राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर विपक्षी खेमे में बेचैनी साफ दिखाई दे रही है।
“रिक्शे में घूमने की हैसियत नहीं थी, आज चार्टर्ड विमान से सफर कर रहे हैं”संजय राउत ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बागी सांसदों पर करारा प्रहार किया। उन्होंने लिखा कि नांदेड़ हवाई अड्डे पर एक चार्टर्ड विमान उतरा और ‘ऑपरेशन टाइगर’ के नाम पर दो सांसदों को लेकर उड़ गया।राउत ने कटाक्ष करते हुए कहा कि, “जिन लोगों की कभी रिक्शे में घूमने की भी हैसियत नहीं थी, वे आज ठाकरे नाम की बदौलत निजी विमानों में सफर कर रहे हैं। लेकिन हर बात का हिसाब लिया जाएगा।
डरपोक लोमड़ियां भाग गईं, फिर खुद को टाइगर क्यों कहते हो?”
उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं।’
50 करोड़ की कीमत, लेकिन 50 हजार के भी लायक नहीं’
संजय राउत यहीं नहीं रुके। उन्होंने एक अन्य पोस्ट में संभावित दल-बदल पर गंभीर आरोप लगाते हुए लिखा कि, “हर सांसद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 50 करोड़ रुपये तय है और 15 करोड़ रुपये अग्रिम के रूप में दिए जा रहे हैं। लेकिन सच कहूं तो ये लोग 50 हजार रुपये के भी लायक नहीं हैं। उनकी राजनीतिक कीमत केवल शिवसेना और तृणमूल कांग्रेस जैसे दलों के ब्रांड की वजह से बढ़ी है।”हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है और संबंधित पक्षों की ओर से भी इस पर स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। फिर भी, इस तरह के आरोपों ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए विवाद को जन्म दे दिया है।
स्पीकर से मुलाकात की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, संभावित बागी सांसद Om Birla से मुलाकात कर उन्हें एक पत्र सौंप सकते हैं। माना जा रहा है कि यह कदम संसदीय दल के भीतर नई राजनीतिक व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि उद्धव ठाकरे गुट के नौ सांसदों में से छह सांसद अलग राह चुन सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो यह उद्धव ठाकरे के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा।
किन सांसदों के नाम चर्चा में?
जिन सांसदों के नाम संभावित रूप से शिंदे गुट के संपर्क में बताए जा रहे हैं, उनमें संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल आष्टीकर, ओमप्रकाश राजे निंबालकर, भानु साहेब वाकचौरे और संजय जाधव प्रमुख हैं। इसके अलावा नासिक से सांसद राजाभाऊ वाजे का नाम भी चर्चाओं में शामिल है। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर इनमें से कई नेताओं की ओर से स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
महाराष्ट्र की राजनीति का नया अध्याय
महाराष्ट्र की राजनीति पिछले कुछ वर्षों से लगातार अस्थिरता और पुनर्संरचना के दौर से गुजर रही है। पहले शिवसेना का विभाजन, फिर पार्टी के चुनाव चिह्न को लेकर विवाद और अब सांसदों के संभावित दल-बदल की अटकलें इस बात का संकेत हैं कि राज्य की राजनीति अभी और बड़े बदलावों की ओर बढ़ सकती है।यदि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट से बड़ी संख्या में सांसद अलग होते हैं, तो यह केवल संसदीय गणित का मामला नहीं होगा, बल्कि ठाकरे परिवार के राजनीतिक प्रभाव और संगठनात्मक क्षमता की भी बड़ी परीक्षा साबित होगा।
वहीं, यदि यह संकट टल जाता है तो उद्धव गुट इसे अपने पुनर्गठन और मजबूती के अवसर के रूप में भी प्रस्तुत कर सकता है।
राजनीति में वफादारी बनाम अवसरवाद का सवाल
पूरा घटनाक्रम एक बार फिर उस बहस को जन्म दे रहा है कि लोकतंत्र में जनादेश का वास्तविक स्वामी कौन है—वह दल जिसके नाम और विचारधारा पर जनता वोट देती है, या वह जनप्रतिनिधि जो परिस्थितियों के अनुसार अपनी राजनीतिक राह बदलने के लिए स्वतंत्र है?
महाराष्ट्र की मौजूदा सियासत इसी प्रश्न के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है।आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह केवल राजनीतिक अटकलों का दौर था या फिर महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा ‘खेला’ होने वाला है। फिलहाल, संजय राउत के तीखे शब्द और बागी सांसदों की संभावित गतिविधियां राज्य की राजनीति को नई दिशा देने के संकेत दे रही हैं।
