बी के झा
NSK News



नई दिल्ली, 9 जुलाई
नंदीग्राम एक्सप्रेस के फर्स्ट एसी कूपे को सुहागरात के कक्ष की तर्ज पर सजाने का मामला अब रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस का विषय बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में फूलों और सजावटी सामग्री से सुसज्जित कूपे को देखकर यात्रियों ने सवाल उठाए कि आरक्षित कोच तक किसी बाहरी व्यक्ति की पहुंच कैसे हुई।
रेल मंत्रालय के अनुसार, 6 जुलाई को ट्रेन संख्या 11002 नंदीग्राम एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे एक दंपति ने निजी तौर पर एक ऑनलाइन डेकोरेटर को नियुक्त किया था। जांच में सामने आया कि डेकोरेटर कोच में प्रवेश कर कूपे की सजावट करने में सफल रहा, जबकि उसे इसके लिए कोई अधिकृत अनुमति प्राप्त नहीं थी। मंत्रालय ने इसे सुरक्षा प्रोटोकॉल में गंभीर चूक मानते हुए संबंधित टिकट चेकर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। मामले की विस्तृत विभागीय जांच जारी है और दोष तय होने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
रेलवे सूत्रों का कहना है कि यदि कोई यात्री अपने आरक्षित कूपे को स्वयं सजाता है और इससे सुरक्षा या परिचालन व्यवस्था प्रभावित नहीं होती, तो सामान्यतः उस पर आपत्ति नहीं होती। किंतु इस मामले में विवाद का मूल कारण बाहरी व्यक्ति का अनधिकृत प्रवेश है, जिसने रेलवे की निगरानी व्यवस्था और प्रवेश नियंत्रण प्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।विशेषज्ञों का मानना है कि घटना केवल एक वायरल वीडियो का विषय नहीं, बल्कि उच्च श्रेणी के डिब्बों में सुरक्षा प्रबंधन की समीक्षा का अवसर भी है।
विभागीय जांच के निष्कर्ष अब यह तय करेंगे कि यह एक व्यक्तिगत लापरवाही थी या सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। फिलहाल, रेलवे ने संकेत दिए हैं कि संवेदनशील कोचों में प्रवेश और निरीक्षण संबंधी प्रावधानों को और सख्त किया जा सकता है।
