बी के झा
NSK News


नई दिल्ली, 9 जुलाई
दिल्ली में इमारतों के ध्वस्त होने की लगातार घटनाओं के बीच रोहिणी सेक्टर-16 में बुधवार को बारिश के दौरान एक भवन के गिरने से निर्माण सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासियों और आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों ने विभिन्न सरकारी एजेंसियों पर अवैध निर्माण तथा भवन उपनियमों के उल्लंघन के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अनधिकृत कॉलोनियों और गैर-अधिसूचित क्षेत्रों में समन्वित निरीक्षण तंत्र के अभाव के कारण ऐसे हादसे बार-बार सामने आ रहे हैं।घटना के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने स्पष्ट किया कि रोहिणी सेक्टर-16 का संबंधित क्षेत्र वर्ष 2016 में डी-नोटिफाई कर स्थानीय निकाय को हस्तांतरित किया जा चुका था। प्राधिकरण के अनुसार, ऐसे क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों की निगरानी और नियमन की जिम्मेदारी संबंधित स्थानीय निकाय की होती है।
नगर निगम के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, प्रभावित संपत्तियों का निर्माण हाल में स्वीकृत भवन योजनाओं के तहत किया गया था और स्थल पर फिनिशिंग का कार्य जारी था। अधिकारियों का अनुमान है कि प्लंबिंग कार्य के दौरान कॉलम और बीम में की गई ड्रिलिंग तथा छेड़छाड़ से संरचना की स्थिरता प्रभावित हुई हो सकती है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।इसी बीच निगम ने बताया कि चालू वर्ष के सर्वेक्षण में लगभग 28 लाख भवनों का निरीक्षण किया गया, जिनमें 19 को खतरनाक श्रेणी में चिन्हित कर आवश्यक नोटिस जारी किए गए हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते शहरीकरण के बीच भवन सुरक्षा मानकों के कड़ाई से अनुपालन और नियमित तकनीकी ऑडिट की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।
दूसरी ओर, राजधानी में संपत्ति प्रबंधन को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में दिल्ली सरकार प्रत्येक भूमि, मकान और फ्लैट के लिए ‘दिल्ली अर्बन प्रॉपर्टी आइडेंटिटी कार्ड’ (डूपिक) लागू करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कानून के तहत प्रत्येक संपत्ति को क्यूआर कोड युक्त विशिष्ट पहचान प्रदान की जाएगी, जिसमें स्वामित्व, उपयोग और संबंधित करों व सेवाओं का विवरण दर्ज होगा।
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से स्वामित्व संबंधी विवाद कम होंगे, विभागों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज होगा और संपत्ति हस्तांतरण के बाद बिजली, पानी तथा कर अभिलेख स्वतः अद्यतन हो सकेंगे। योजना के क्रियान्वयन हेतु आगामी तीन वर्षों में राजधानी का व्यापक सर्वेक्षण प्रस्तावित है, जो दिल्ली के शहरी प्रशासन को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
