नक़ाब खींचने से तरक़्क़ी नहीं रुकती, सोच खींचने से रुकती है एक महिला, एक मुख्यमंत्री और वह सवाल जो लोकतंत्र को आईना दिखाता है
बी के झा पटना/नई दिल्ली, 20 दिसंबर लोकतंत्र में सत्ता की सबसे बड़ी परीक्षा उसके शिष्टाचार से होती है।और जब सत्ता सार्वजनिक मंच पर किसी महिला के शरीर, कपड़े या व्यक्तिगत चुनाव को छूती है—तो सवाल केवल शालीनता का नहीं, संवैधानिक गरिमा और स्त्री की आज़ादी का बन जाता है।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का…
